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उत्तर प्रदेश

नोएडा बवाल (पार्ट 3): हिंसा की कवरेज कर रहे भास्कर रिपोर्टर से पुलिस ने की मारपीट, इंडिया टीवी दफ्तर का घेराव, देखें वीडियो

नोएडा: उत्तर प्रदेश के Noida में सोमवार सुबह सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन उस समय और विवादों में घिर गया, जब कवरेज कर रहे पत्रकारों पर ही पुलिस कार्रवाई के आरोप लगे। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर साकेत आनंद के साथ मारपीट का मामला सामने आया है।

प्रत्यक्षदर्शी और भास्कर रिपोर्टर उदय भटनागर के मुताबिक, वह और साकेत आनंद सेक्टर-85 स्थित एक फैक्ट्री के बाहर मजदूरों के प्रदर्शन को कवर कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और अंदर फंसे कंपनी अधिकारियों को बाहर निकालने के लिए कार्रवाई शुरू की। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें पत्रकार भी चपेट में आ गए।

उदय भटनागर का कहना है कि पुलिस ने न सिर्फ मजदूरों पर बल्कि मीडिया कर्मियों को भी निशाना बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि “आईडी कार्ड दिखाने और खुद को पत्रकार बताने के बावजूद पुलिसकर्मी ने लाठी चलाई और कवरेज करने से रोकने की कोशिश की।”

साकेत आनंद ने भी बताया कि जब वे पुलिस और मजदूरों के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तब पुलिस ने वीडियो बनाने से रोका और इसके बाद लाठीचार्ज शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने जानबूझकर मीडिया पर हमला किया और बाद में मजदूरों को जबरन वाहनों में भरकर ले जाया गया।

इस घटना को लेकर पत्रकारों ने Savya Goyal से नाराजगी जताई। हालांकि, आरोप है कि डीसीपी ने शिकायत सुनने के बावजूद मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और पुलिसकर्मियों का बचाव करती नजर आईं। इसके बाद पत्रकारों ने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं होती है तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

इधर, पूरे नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन व्यापक रूप ले चुका है। अलग-अलग इलाकों में कर्मचारियों ने उग्र होकर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं कीं। कई गाड़ियों को आग के हवाले किया गया और सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। पुलिस के साथ भी झड़पें हुईं, जिसके बाद हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और कई इलाकों में बैरिकेडिंग कर दी गई।

मजदूरों का कहना है कि जब तक उनकी सैलरी बढ़ाने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, पत्रकारों पर लाठीचार्ज की घटना ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


मज़दूरों के आंदोलन को कवर कर रहे पत्रकारों को भी पीट रहे हैं यूपी पुलिस के बहादुर पुलिसकर्मी।
और अब तो आंदोलन का ‘वो वाला एंगल’ भी तलाशा जा रहा है, जो मिल ही जाएगा और फिर हो सकता है कि कुछ पत्रकार भी उसमें लपेट दिए जाएँ!
‘न्यू इंडिया’ में सिस्टम ऐसे ही काम कर रहा है। -समीरात्मज मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार

भास्कर रिपोर्टर साकेत आनंद को चमकाता पुलिसकर्मी

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