जस्टिस स्वर्णकांता में थोड़ी भी लाज-शर्म और भारतीय न्याय व्यवस्था के प्रति आदर बची हो तो उन्हें तत्काल न्यायाधीश का पद छोड़ देना चाहिए… केजरीवाल का वक्तव्य उनके चेहरे पर लगी वो कालिख है जिसे छुड़ाना उनके लिए नामुमकिन है… लेकिन जिस प्रक्रिया से भारत में लोग देश के उच्च और सर्वोच्च न्यायालयों में जज बनाए जाते हैं… वैसे में उन जजों में उच्च नैतिकता की अपेक्षा करना भी बेकार है…!!!
-जितेन्द्र नारायण
गायत्री बिश्नोई-
आज हाई कोर्ट में जो हुआ, वो सिर्फ बहस नहीं थी, वो एक सीधा और करारा जवाब था। केजरीवाल जी ने अपने 10 पॉइंट्स में जिस तरह से जस्टिस स्वर्णकांता की बेंच के सामने सवाल रखे, उसने पूरे नैरेटिव को हिला कर रख दिया।
एक-एक दलील ऐसी थी जो सिस्टम को आईना दिखाने वाली थी, ऐसे सवाल जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिन फैसलों की वजह से हमारे नेताओं को जेल में रहना पड़ा, आज उन्हीं पर खुलकर जवाब दिया गया-बिना डरे, बिना झुके।
यही है असली हिम्मत। यही है सच्चाई की लड़ाई।
अरविंद केजरीवाल से असहमतियां अपनी जगह लेकिन जिस तरह उन्होंने जज को आइना दिखाया वह दुर्लभ है।
जज को सीधे-सीधे आरएसएस का कहकर उनसे न्याय की उम्मीद नहीं कहना बहुत साहस की बात है। अरविंद जी ने कल भारतीय न्याय व्यवस्था के भ्रष्ट हो रहे चेहरे पर एक सवालिया निशान लगा दिया है।
(वह पूरा कन्वर्सेशन देखने योग्य है। अरविंद केजरीवाल ने जज को सिलसिलेवार ढंग से एक्सपोज़ किया है।)
अरविंद केजरीवाल ने ‘हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा है’ के मिथ को ही तोड़ दिया। यानी न्यायालय निर्दोष नहीं भी हो सकते हैं। संवैधानिक संस्थाओं को समपर्ण भाव से देखना बन्द करना चाहिए।
-आदित्य कुमार गिरी
मनीष सिसोदिया-
दिल्ली हाई कोर्ट के सामने आज Arvind Kejriwal जी ने जिस तरह शालीनता, बुद्धिमानी और साहस के साथ एक-एक कर अपने तर्क रखे, उसने एक बार फिर मुझे गर्व से भर दिया कि मैं केजरीवाल की टीम का एक साथी हूँ।
मामला कोई साधारण नहीं था। हाई कोर्ट की जज साहिबा के सामने खड़े होकर यह कहना कि मेरे पास दस ठोस कारण हैं, जिनसे मुझे लगता है कि मुझे इस अदालत से न्याय नहीं मिल पाएगा…
किसी जज के सामने खड़े होकर यह कहना कि आप इस मामले से अलग हो जाएँ, क्योंकि मुझे आशंका है कि इस मामले में पक्षपात हो सकता है…
यह सब कहने के लिए सीने में सच्चाई और ईमानदारी का लोहा चाहिए- और वह Arvind Kejriwal के पास कूट-कूट कर भरा है। आपको यह वीडियो ज़रूर देखनी चाहिए…
नैतिकता यह कहती है कि जस्टिस स्वर्णाकांता शर्मा को अरविन्द केजरीवाल के कौल पर केस से हट जाना चाहिए था.
जब उन पर शक है तो है !
पहले जज किसी पक्षकार के परिचित होने, उससे लाभान्वित होने अथवा राजनीतिक झुकाव के कारण मामले से हट जाया करते थे. लेकिन अब सीधा सीधा आरोप लगने के बाद भी केस से वे न केवल चिपकी हुई हैं, बल्कि उस आरोप को भी सुन रही हैं जिसके कारण उनसे हटने का आग्रह किया जा रहा है.
यह न्यायपालिका के नाम पर बेशर्मी और थेथरई की इंतहा है. केजरीवाल पर शक करना तब उचित होता जब उन्होंने किसी ख़ास कोर्ट में केस ट्रांसफर करने आग्रह किया होता !
फ़िलहाल, वक्त का तकाज़ा है और न्याय की मांग भी कि वे न्यायहित में केस से अविलंब हट जावे.
-देवेंद्र सुरजन
विकास कुमार-
“कोर्ट में जज के थूक से भी डरना।”
अगर आप कभी अदालत गए हों, तो ये पंक्ति किसी वकील ने जरूर कही होगी। जज को भगवान का दर्जा भी दिया जाता है। जजों के सामने पत्ते की तरह कांपते IPS-IAS अधिकारियों को हमने देखा है। लेकिन कल का दिन एकदम अलग था।
दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्ण कांता के सामने अरविंद केजरीवाल ने करीब एक घंटे तक अपनी दलील पेश की। वह चाहते हैं कि उनका केस जज स्वर्ण कांता की बजाय कोई और जज सुने। अरविंद केजरीवाल ने पूरी सहजता और तर्क के साथ कोर्ट को बताया कि उनका झुकाव एक तरफ हो सकता है, इसलिए जज स्वर्ण कांता को केस से अलग कर लेना चाहिए।
मुझे लगता है कि यह पेशी भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
हर किसी को इस बहस को देखना चाहिए।



Hansraj
April 14, 2026 at 11:19 pm
*एनसीआर प्रेस क्लब के हुआ विस्तार, हंसराज बाबा को सर्वसम्मति बनाया प्रेस क्लब अध्यक्ष* कोटपुतली बहरोड़ जिले में पत्रकारों के संगठन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एनसीआर प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। शुक्रवार को बहरोड़ क्षेत्र के नेशनल हाईवे स्थित होटल लाल विलास में आयोजित बैठक में क्षेत्र के कई वरिष्ठ और युवा पत्रकारों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन की सक्रियता बढ़ाना, पत्रकारों के हितों की रक्षा करना और निष्पक्ष पत्रकारिता को बढ़ावा देना रहा।
बैठक के दौरान पत्रकारों ने संगठन को लेकर अपने विचार साझा किए और वर्तमान समय में मीडिया के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा की। पत्रकारों ने एकजुटता को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि संगठित होकर ही पत्रकार अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं और समाज में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।
इस अवसर पर सर्वसम्मति से एनसीआर प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें हंसराज बाबा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं धर्मसिंह यादव और सुरेंद्र सुरोलिया को उपाध्यक्ष बनाया गया। सुनील मेघवाल को सचिव, आशीष गोयल को कोषाध्यक्ष और अनूप यादव को मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया। सभी पदाधिकारियों का चयन आपसी सहमति और विश्वास के आधार पर किया गया, जिससे संगठन में एकता का संदेश भी गया।
कार्यकारिणी के गठन के बाद नवनियुक्त पदाधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेस क्लब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि पत्रकारों के लिए एक मंच है, जहां उनकी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि क्लब का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करना, उनके हितों के लिए आवाज उठाना और क्षेत्र में निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देना है।
नवनियुक्त अध्यक्ष हंसराज बाबा ने अपने संबोधन में सभी पत्रकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए सभी पत्रकारों का सहयोग आवश्यक है और वे सभी को साथ लेकर चलेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने तय किया कि भविष्य में नियमित बैठकों का आयोजन किया जाएगा और पत्रकारों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा पत्रकारों के प्रशिक्षण और विकास के लिए भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया।
इस बैठक में क्लब से जुड़े दर्जनों पत्रकार मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर संगठन को नई दिशा देने का संकल्प लिया। कुल मिलाकर यह बैठक पत्रकारों के लिए उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करने वाली साबित हुई, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र में पत्रकारिता को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।