फिरोजाबाद। जिले में तैनात तहसीलदार राखी शर्मा और जिलाधिकारी रमेश रंजन का विवाद तूल पकड़ चुका है। इसमें फिरोजाबाद के दो पत्रकार भी हैं जो डीएम के साथ मिलकर राखी शर्मा को निपटाने पर लगे हुए हैं। ऐसा आरोप है। दूसरी तरफ, लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
डीएम फिरोजाबाद रमेश रंजन के इशारे पर दो पत्रकारों रंजीत गुप्ता और रामपाल चौधरी ने तहसीलदार राखी शर्मा के खिलाफ कुत्सित अभियान चला रखा है। फ़र्ज़ी वीडियो पोस्ट कर रहे हैं। इन पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज होने के बाद राखी शर्मा के ख़िलाफ़ शिकायती वीडियो की बाढ़ आ गई है। ज्यादातर वीडियो एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद शूट किए गए हैं। एक विकलांग के हाथ में जबरन बैनर डंडा पकड़ा कर वीडियो बनाया गया। पत्रकार रंजीत गुप्ता की पटाखे की दुकान है जो नियम कानूनों को ताक पर रखकर संचालित की जाती है, ऐसा आरोप लगाया गया है। राखी शर्मा को भ्रष्टाचारी साबित करने के लिए पूरा मुहिम चलाया जा रहा है। इसके लिए वीडियो टेक्स्ट सब कुछ भारी मात्रा में फॉरवर्ड शेयर किया जा रहा है। ऐसा ही कंटेंट भड़ास के पास आया तो इसकी जाँच की गई। पता चला कि डीएम के इशारे पर दो पत्रकार सुपारी पत्रकारिता कर रहे हैं। राखी शर्मा को रेवन्यू बोर्ड लखनऊ ट्रांसफर किया गया है। माना जा रहा है कि डीएम रमेश रंजन का भी देर सबेर तबादला होगा। पूरे प्रकरण की जांच लखनऊ के कमिश्नर कर रहे हैं। राखी शर्मा के प्रेस वार्ता करने को अनुशासनहीनता माना गया है लेकिन सवाल है कि जब भ्रष्टाचार पर सबने चुप्पी साध रखी हो या लिप्त हों तो ऐसे में पब्लिक डोमेन में सब कुछ लाना कैसे अपराध हो गया? -यशवंत सिंह, फाउंडर एडिटर भड़ास4मीडिया
डीएम-तहसीलदार विवाद पर दो रिपोर्टरों का पक्ष
एबीपी न्यूज़ के रिपोर्टर रंजीत गुप्ता ने तहसीलदार राखी शर्मा के साथ चल रहे विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यह पूरा मामला एक खबर से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने एक पीड़ित की समस्या को उठाया था।
रंजीत गुप्ता के अनुसार, “मैं पिछले 18 साल से पत्रकारिता में हूं और हमेशा जनहित के मुद्दे उठाता रहा हूं। हाल ही में मैंने एक पीड़ित की तथ्यात्मक खबर चलाई थी, जिसकी पुष्टि खुद जिलाधिकारी ने भी की थी और कार्रवाई का आश्वासन दिया था। यह खबर सिर्फ हमारे चैनल ही नहीं, बल्कि कई अन्य मीडिया संस्थानों में भी चली।”
रंजीत कहते हैं, “खबर के प्रसारण के बाद तहसीलदार राखी शर्मा ने अपने वकील के जरिए मुझे लीगल नोटिस भेजा, लेकिन इसे निजी तौर पर भेजने के बजाय सोशल मीडिया और पब्लिक ग्रुप्स में वायरल किया गया। इससे साफ है कि मकसद मेरी छवि खराब करना और मुझे डराना था।”
रंजीत गुप्ता का दावा है, “मैंने उस नोटिस का विधिवत जवाब दे दिया था, लेकिन इसके बावजूद मेरे खिलाफ थाना टूंडला में एक फर्जी शिकायत दी गई। यह पूरा प्रयास मेरी आवाज और मेरी कलम को दबाने का था, क्योंकि उन्हें डर था कि मैं उनके खिलाफ और मामलों को उजागर करूंगा।”
खुद पर लगे ‘स्पॉन्सर्ड पत्रकार’ के आरोपों को खारिज करते हुए रंजीत गुप्ता कहते हैं, “मैं किसी का स्पॉन्सर्ड नहीं हूं। मैं सिर्फ जनहित में और भ्रष्टाचार के खिलाफ खबरें करता हूं। उल्टा मुझ पर दबाव बनाने के लिए मेरे चैनल हेड तक को फोन किया गया, जबकि मैं पिछले एक साल से न तो तहसीलदार से मिला हूं और न ही कोई बातचीत हुई है।”
प्रणाम आदरणीय भाई साहब।
टूंडला तहसील में तैनात तहसीलदार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की खबर कई मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से प्रकाशित की जिसमें नेशनल एक्सप्रेस अख़बार द्वारा भी ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। मैंने निष्पक्ष रूप से भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाया है और मेरा उद्देश्य केवल जनहित में सच सामने लाना है, किसी के प्रति व्यक्तिगत द्वेष नहीं था।
भड़ास मीडिया द्वारा चलायी गई खबर में किसी भी प्रकार से मेरा वर्जन नहीं लिया गया और एक पक्षीय खबर छाप दी गई।
तहसीलदार द्वारा आखिरकार कुछ चहेते पत्रकार साथियों को ही बुला कर क्यों करी प्रेस वार्ता। अगर पत्रकार ही पीड़ितों के न्याय के लिए आवाज नहीं उठायेंगे तो कौन उठायेगा?
आप बहुत सम्मानित और अनुभवी हैं बस आपसे यही निवेदन था की हमारा वर्जन भी होता तो हम भी अपना पक्ष रखते।
रामपाल चौधरी, नेशनल एक्सप्रेस, फिरोजाबाद।
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