रवीश रंजन शुक्ला-
बदायूं में किन्नरों के गैंग ने मनमाना नेग न देने पर दूल्हे के भाई को गोली मार दी, इलाज जारी है। किन्नर 21 हजार नेग मांग रहे थे। दूल्हा पक्ष 2100 रुपए दे रहा था। पैसे नहीं मिलने पर किन्नरों ने बददुआ देनी शुरू की तो दूल्हे वाले भड़क गए और लड़ाई हो गई।
अब 6 किन्नर गिरफ्तार हुए हैं.. लेकिन किन्नरों की दादागिरी की अब इंतहा हो गई…मैं खुद इसका भुग्तभोगी रहा हूँ..मेरे चचेरे भाई की शादी बस्ती में थी… सुबह-सुबह किन्नरों का गैंग एक वैन से बरात स्थल पर पहुंच गया और चाचा जी से 21000 हजार रुपए मांगने लगा…
चूँकि शादी बहुत सादे तरीक़े से बिना किसी दहेज हो रही थी सो सबने स्वेच्छा से 2100 रुपए देने की कोशिश की लेकिन किन्नरों का गैंग लड़ पड़ा.. मुझे पता लगा तो मैं भी किन्नरों को समझाने की कोशिश करने लगा। लेकिन फिर किन्नर मुझसे भी लड़ने लगे..
आख़िरकार पुलिस बुलाने के लिए जब फोन मिलाने लगा तब ये किन्नर किसी तरह 2400 लेकर गए.. मैंने राहत की साँस ली…ट्रेन से लेकर सड़क तक पर ये दादागिरी भारत जैसे देश में ही चल सकती है..ऐसे किन्नरों पर सख्ती से काम करने की जरुरत है..
किन्नरों की दादागिरी पर बड़ा फ़ैसला…
गोंडा की रेखा देवी की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि किन्नरों को बधाई राशि या नेग वसूलने का क़ानूनी अधिकार नहीं है.. न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि बधाई वसूलने की प्रथा का कोई कानूनी या वैध आधार नहीं है। कोर्ट के अनुसार, किसी भी व्यक्ति से उसकी इच्छा के विरुद्ध या जबरन पैसा वसूलना कानूनन गलत है। यह आदेश गोंडा जिले की निवासी एक किन्नर, रेखा देवी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए दिया गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि बधाई वसूलने के लिए उनके लिए एक निश्चित क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) तय किया जाए।
उनके ‘बधाई अधिकारों’ को सुरक्षित किया जाए ताकि अन्य समूहों के साथ विवाद न हो। इस पर क़ानूनी फ़ैसला सुनाते हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को सिरे से ख़ारिज करते कहा कि ये किसी के इच्छा के विरुद्ध नेग किन्नर नहीं वसूल सकते हैं क्योंकि ये कोई क़ानूनी अधिकार नहीं है..किन्नरों की बढ़ती गुंडागर्दी के खिलाफ अब पुलिस के सख्त कार्रवाई करने का रास्ता भी खुल गया है…कोई स्वेच्छा से नेग देना चाहे तो कोई आपत्ति नहीं है लेकिन मनमाना नेग ताक़त के बल पर वसूल करना बेहद निंदनीय है..


