नवा ठाकुरिया-
कई महीनों की अनिश्चितता के बाद Press Council of India (PCI) को नया अध्यक्ष मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज Justice Ranjana Prakash Desai ने 24 अप्रैल 2026 को अध्यक्ष पद संभाल लिया है। हालांकि, काउंसिल में पत्रकारों के लिए निर्धारित कई सीटें अब भी खाली हैं।
Justice Ranjana Prakash Desai को तीन साल के दूसरे कार्यकाल के लिए नामित किया गया है। इससे पहले वह 17 जून 2022 से 16 दिसंबर 2025 तक PCI की अध्यक्ष रह चुकी हैं।
हालांकि, प्रेस काउंसिल के गठन में अभी भी बड़ी कमी बनी हुई है। 15वीं काउंसिल में पेशेवर पत्रकारों के लिए निर्धारित 13 सीटें—जिनमें 7 कार्यरत पत्रकार (नॉन-एडिटर) और 6 संपादक शामिल होने चाहिए—अब तक भरी नहीं गई हैं।
करीब दो महीने पहले Sasmit Patra ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार से काउंसिल को जल्द पूरा करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि 14वीं काउंसिल का कार्यकाल 5 अक्टूबर 2024 को खत्म होने के बाद से पूर्ण परिषद का गठन जरूरी है, ताकि स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस को मजबूती मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा था कि 17 दिसंबर 2025 से PCI बिना अध्यक्ष के था, इसलिए नए अध्यक्ष की नियुक्ति जरूरी है ताकि बाकी सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी पूरी हो सके।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल काउंसिल में कुछ सदस्य कार्यरत हैं, जिनमें राज्यसभा और लोकसभा के सांसद, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, बार काउंसिल और साहित्य अकादमी के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा बड़े, मध्यम और छोटे अखबारों के प्रबंधन से जुड़े कुछ सदस्य भी परिषद में मौजूद हैं।
इसके बावजूद 29 सदस्यीय इस संस्था में 14 सीटें अभी भी खाली हैं और उन्हें भरने की प्रक्रिया जारी है, हालांकि इसमें कई अड़चनें सामने आई हैं।
विवाद और अड़चनें
यह संकट तब शुरू हुआ जब PCI के नियमों में बदलाव कर प्रेस क्लबों से प्रतिनिधि चुनने का प्रस्ताव सामने आया। कई राष्ट्रीय पत्रकार संगठनों ने इसका विरोध किया और कुछ ने कोर्ट का रुख भी किया।
उनका तर्क है कि प्रेस क्लब मुख्यतः स्थानीय और मनोरंजक संस्थाएं होती हैं, जिनमें गैर-पत्रकारों को भी सदस्यता दी जाती है, इसलिए वे पेशेवर पत्रकारों का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर सकतीं।
वहीं, पत्रकार यूनियनों को देशभर के मीडिया कर्मियों का अधिक व्यापक प्रतिनिधि माना जाता है।
PCI की भूमिका और सीमाएं
1965 के प्रेस काउंसिल एक्ट के तहत 1966 में स्थापित और 1979 में पुनर्गठित Press Council of India का उद्देश्य देश में प्रिंट मीडिया के स्तर को बनाए रखना और पत्रकारिता मानकों को सुधारना है।
यह संस्था अखबारों, समाचार एजेंसियों, संपादकों और पत्रकारों के खिलाफ शिकायतें सुन सकती है, लेकिन इसके पास सजा देने की सीमित शक्तियां हैं।
बड़ा सवाल
देश में जहां 1 लाख से ज्यादा प्रिंट प्रकाशन, करीब 400 सैटेलाइट न्यूज चैनल और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं, वहीं PCI का दायरा अभी भी मुख्य रूप से प्रिंट मीडिया तक सीमित है। इसी वजह से यह मांग भी उठती रही है कि टीवी, रेडियो और डिजिटल मीडिया को भी PCI के दायरे में लाया जाए और संस्था को ज्यादा शक्तियां दी जाएं।
देखें पत्र…



