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कर्मचारियों के वेतन और पीएफ में मनमानी करने वाले दैनिक जागरण को एक और बड़ा झटका!

रतन भूषण-

जागरण तेरी यही कहानी, कोर्ट में झूठ, ऑफिस में मनमानी

इन सभी तस्वीरों को गौर से देखिए। क्योंकि इन्हें देखने के बाद आपको यह समझ में आ जाएगा कि देश का नंबर वन हिंदी अखबार कहलाने वाले जागरण और इसके मालिक अपने वर्कर के प्रति कितने उदार और देश के प्रति कितने जिम्मेदार हैं! सच यही है कि जागरण समूह चोर है। यह न तो वर्कर के बारे में सोचता है और न ही देश के बारे में। यह जहां भी मौका मिले, चोरी करने का मौका नहीं गंवाता।

उपरोक्त आदेश माननीय इलाहाबाद हाई कोर्ट का है, जो वर्कर द्वारा किए गए मजीठिया वेज बोर्ड के केस का आदेश है। वर्कर ने नोएडा लेबर कोर्ट में जीत हासिल की, जागरण इलाहाबाद हाई कोर्ट गया। यह आदेश उसी का है जिसमें जागरण को हार नसीब हुई है। इससे पहले भी नोएडा के लगभग डेढ़ सौ लोगों के लिए ऐसे ही आदेश कई बार आ चुके हैं और जागरण हर बार मुंह की खा चुका है। जाहिर है, जब कोर्ट में सिर्फ झूठ बोलोगे, तो जीत नसीब कैसे होगी? तो माननीय ने इस बार भी जागरण की अर्जी ख़ारिज कर दी है। तो जागरण माननीय सुप्रीम कोर्ट की शरण में फिर गया है। पिछले दिनों तो डेट मिल गई, अब आगे क्या होगा, देखने वाली बात होगी।

वर्षों तक जागरण से जुड़े होने के कारण मैं यह जान पाया कि जागरण समूह और इसके मालिक चोर हैं। वेतन सरकार द्वारा तय वेतन से भी कम देना इनकी बहुत पुरानी आदत है। यह वर्कर के पद और वेतन को उसकी वेतन पर्ची को देखकर जाना जा सकता है। जाहिर है, जब वेतन कम, तो पीएफ भी कम कटेगा। पीएफ कम मतलब वर्कर के साथ साथ सरकार से भी चोरी, क्योंकि जितनी सरकार के हिस्से में पीएफ से राशि जाती, उससे कम गई। ऐसे अखबार समूह और उसके मालिकान देशभक्त कैसे हो सकते हैं? वर्कर से काम अपने हिसाब से कराया जाता है। ऑफ़िस में इनकी मनमानी चलती है। सरकार से डर जागरण को लगता नहीं, क्योंकि ये पहुंच वाले हैं। इनका हर जगह भौकाल है।

वर्षों यही चला। लेकिन मजीठिया वेज बोर्ड के आते ही जागरण नोएडा के लगभग 200 लोगों ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के यहां 2011 में केस लगाया, जो अब तक देश के तमाम कोर्ट और उनके आदेशों के साथ जारी है। देश के तमाम अखबार समूह के वर्कर भी इस केस में आए हैं।

माननीय सुप्रीम कोर्ट के यहां जो केस हैं, उनमें जल्द सुनवाई हो और आदेश आए, यही आशा है। वैसे, यह तय है कि रावण रूपी जागरण या अन्य अखबार मालिकान हारेंगे। राम रूपी वर्कर की जीत पक्की है। देर भले ही जो हो। ऐसा इसलिए क्योंकि देश के हर कोर्ट में मालिकान की हार होती आई है। ये छोटे जुर्माने भी अदा करते आ रहे हैं। कई बार मालिकान झूठ बोलकर माननीय को बरगला देते हैं, लेकिन फिर मालिक की पोल खुल जाती है और अंत में सत्य की जीत होती है। माननीय सुप्रीम कोर्ट में भी यही होगा। सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं…। जय संविधान, जय हिंदुस्तान…

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