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उत्तर प्रदेश

प्रतीक नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी भाजपा का मोहरा बने और अखिलेश या सपा को असहज करे!

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-

प्रतीक यादव कैसे मरे, प्राकृतिक मौत या हत्या , अगर भाजपा सरकार इस सच को जानने की इच्छुक होगी तो जांच करने वाली एजेंसियों पर दबाव बनाने की कोशिश करेगी.

भाजपा ऐसा करेगी या नहीं, यह तो नहीं पता लेकिन यह जरूर पता है कि अब प्रतीक की मौत के बाद भाजपा अपर्णा को अपना वह हथियार बनाने वाली है, जो अगले चुनाव में उसकी मुख्य प्रतिद्वंदी सपा और उसके मुखिया अखिलेश यादव के खिलाफ जमकर इस्तेमाल होगा।

ऐसी खबरें आती रहती थीं कि भाजपा का हथियार बनकर ऊंची उड़ान के लिए बेकरार अपर्णा के पर अगर कोई कुतर रहा था तो वह उनके पति प्रतीक यादव ही थे। प्रतीक नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी को भाजपा मोहरा बनाए और अखिलेश यादव या सपा को असहज करे.

जाहिर है, प्रतीक के न रहने के बाद भाजपा में रहकर जैसे चाहे वैसे अपर्णा मुलायम परिवार के खिलाफ बयानबाजी करें या राजनीति करें, अब कोई उन्हें रोकने के लिए किसी तरह का दबाव नहीं बना पाएगा. ज्यादा अरसा नहीं बीता जब प्रतीक ने खुलकर तलाक लेने का अपना इरादा सोशल मीडिया पर जाहिर कर दिया था. अगर वह तलाक ले लेते तो अपर्णा की राजनीतिक उड़ान रनवे पर ही ध्वस्त हो जाती और मुलायम परिवार का ब्रांड उनसे काफी हद तक छिन जाता. भाजपा के लिए घर का भेदी लंका ढाए वाले रास्ते पर चलना बहुत कठिन हो जाता।

बहरहाल, प्रतीक के खुलेआम किए गए उसी ऐलान के बाद अपर्णा ने राजनीतिक चतुराई का बखूबी इस्तेमाल करके तत्काल समझौता कर लिया था. खुद प्रतीक ने सोशल मीडिया पर ही इस पुनर्मिलन की जानकारी दी थी.

सोशल मीडिया के उस पुनर्मिलन के महज कुछ ही समय बाद प्रतीक का निधन हो गया. अब मुलायम की राजनीतिक विरासत प्रतीक की दिवंगत पत्नी के पास जाने से कौन रोक पायेगा? यह अलग बात है कि सोशल मीडिया पर प्रतीक की हत्या का संदेह जताती हुई तमाम पोस्ट तैर रही हैं. मगर सच क्या है, यह कोई तभी बता पायेगा जब सत्ता पूरी ताकत से सच जानने के लिए जांच एजेंसियों को झोंकेगी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगी.

अपर्णा अगर अगले चुनाव में भाजपा के बैनर पर चमकती और फोकस में नजर आएं तो समझ जाइएगा कि कम से कम चुनाव तक तो भाजपा उनका इकबाल बुलन्द रखेगी ही. उसके बाद ही वह तय करेगी कि आगामी लोकसभा चुनाव तक उनकी कोई उपयोगिता है या नहीं. फिलहाल तो मुलायम परिवार के विभीषण का प्रयोग करके सपा की लंका लगाने में अपर्णा का कुछ तो महत्व भाजपा के लिए है ही.


राजेश साहू-

प्रतीक दो सेक्टर में कारोबार करते थे। पहला- रियल स्टेट। दूसरा- फिटनेस इंडस्ट्री। रियल स्टेट कारोबार को संभालने के लिए प्रतीक पत्नी अपर्णा यादव के भाई अमन सिंह बिष्ट की मदद लेते थे।

2012 में यूपी में सपा की सरकार बनने के बाद अमन ने 17 कंपनियां रजिस्टर कराईं। इनमें 12 जुलाई, 2012 से लेकर 29 अप्रैल, 2016 तक कुल 16 कंपनियों में अमन डायरेक्टर या डिजिग्नेटेड डायरेक्टर (नामित निदेशक) नियुक्त हुए थे।

एक अन्य कंपनी में अमन 1 मई, 2018 में बतौर डायरेक्टर नियुक्त हुए थे। इनमें ज्यादातर कंपनियां रियल स्टेट से जुड़े कारोबार के तौर पर रजिस्टर थीं। हालांकि, अमन भले ही डायरेक्टर थे, लेकिन पूरे कारोबार की बागडोर प्रतीक यादव के हाथ में रहती थी।

प्रतीक के एक करीबी दोस्त ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया- 2017 में सपा की सत्ता से विदाई हो गई। इसके बाद से अमन और प्रतीक के बीच कारोबार के नफा-नुकसान को लेकर कहासुनी शुरू हो गई थी। यह नुकसान कितना बड़ा था, इसे लेकर कभी कोई जिक्र नहीं हुआ।


राजीव तिवारी बाबा-

रोहित शेखर तिवारी याद है न आप लोगों को! पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव की आज सुबह-सुबह संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत ने यूपी की राजनीति और मीडिया से जुडे लगभग हर किसी को स्तब्ध कर दिया। आम तौर पर विवादों से दूर रहने वाले प्रतीक पिछले कुछ समय से अपनी शादी को‌ लेकर चर्चा में थे। और इस चर्चा की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी। प्रतीक की मौत पर कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।‌ ऐसे में अनायास ही मुझे रोहित शेखर तिवारी की याद आ गई। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पुत्र की हैसियत, रोहित ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ कर पाई थी। रोहित की मौत भी कुछ ऐसे ही संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, जांच के बाद में जिसे हत्या पाया गया। प्रतीक के मामले में अभी ऐसा कुछ कहना जल्दबाजी होगी मगर संदेह और सवाल तो उठने शुरू हो गये हैं। इसलिए फिलहाल इंतजार करते हैं लेकिन दोनों व्यक्तियों के जीवन की परिस्थितियों और मौत की घटना की तुलना तो बनती है।

भारतीय राजनीति में प्रमुख परिवारों के युवा सदस्यों की अचानक और रहस्यमयी मौतें अक्सर सवाल खड़े करती हैं। 13 मई 2026 को मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव की 38 वर्ष की आयु में लखनऊ में अचानक मृत्यु हो गई, जबकि अप्रैल 2019 में नारायण दत्त तिवारी के पुत्र रोहित शेखर तिवारी (लगभग 40 वर्ष) की दिल्ली में मौत हुई थी। दोनों घटनाएं राजनीतिक परिवारों से जुड़ी हैं। दोनों के पिताजी अपने समय के महत्वपूर्ण राजनीतिक शख्सियत रहे। दोनों को उनके पिता का नाम काफी संघर्षपूर्ण तरीके से मिला। रोहित और उनकी मां को इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी जबकि प्रतीक और उनकी मां को लंबे समय तक सामाजिक पारिवारिक उपेक्षा झेलने के बाद मान्यता मिली।

प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे। अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक सक्रिय राजनीति से दूर रहे। वे फिटनेस enthusiast थे, लखनऊ में जिम चलाते थे, रियल एस्टेट से जुड़े थे और जीव आश्रय नामक एनजीओ के माध्यम से पशु कल्याण कार्य करते थे। उनकी शादी 2011 में भाजपा नेता अपर्णा यादव से हुई थी, जिससे दो बेटियां हैं। हाल ही में जनवरी 2026 में वैवाहिक विवाद की खबर आई थी, जिसमें प्रतीक ने तलाक की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में मामला सुलझ गया था।

रोहित शेखर तिवारी पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पुत्र थे। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पिता-पुत्र संबंध स्थापित हुआ था। रोहित भी राजनीति से ज्यादातर दूर रहे। उनकी शादी वकील अपूर्वा शुक्ला से हुई थी।

दोनों ही प्रमुख उत्तर भारतीय राजनीतिक परिवारों के युवा बेटे थे, जिन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। प्रतीक यादव की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले गए, जहां उन्हें ब्रॉट डेड घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार पल्स पूरी तरह गिर चुकी थी और दिल रुक गया था। प्रतीक कुछ दिनों पहले (30 अप्रैल) भी स्वास्थ्य समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती थे, जहां फेफड़ों की समस्या और ब्लड क्लॉटिंग का जिक्र था। वे घर लौट आए थे।

रोहित शेखर तिवारी 16 अप्रैल 2019 को दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी स्थित घर में अचानक बीमार पड़े। उन्हें मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां ब्रॉट डेड घोषित किया गया। शुरुआत में हार्ट अटैक बताया गया। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अस्फिक्सिया (दम घुटने) का खुलासा हुआ — स्ट्रैंगलिंग (गला दबाना) और स्मदरिंग (तकिए से मुंह दबाना) से मौत हुई। यह हत्या साबित हुई। पत्नी अपूर्वा शुक्ला पर आरोप लगा, उन्होंने कबूल भी किया कि वैवाहिक विवाद और संपत्ति के मुद्दे पर उन्होंने यह कदम उठाया।

प्रतीक की मौत अभी चिकित्सकीय/रहस्यमय श्रेणी में है, जबकि रोहित की मौत स्पष्ट आपराधिक हत्या थी। दोनों 38-40 वर्ष की आयु में, घर पर अचानक बीमार पड़कर अस्पताल पहुंचे और ब्रॉट डेड घोषित। दोनों मामलों में पहले हार्ट संबंधी समस्या बताई गई। दोनों में वैवाहिक तनाव की खबरें थीं। प्रतीक-अपर्णा में हालिया सार्वजनिक विवाद, रोहित-अपूर्वा में गहरी नाराजगी। दोनों घटनाओं ने UP-दिल्ली की राजनीति में हलचल मचाई। क्रॉस-पार्टी शोक संदेश आए।

इस तुलना का उद्देश्य रहस्य का वह तत्व है जो प्रतीक की मौत के शुरुआती घंटों में दिख रहा है। सच क्या है वह तो प्रतीक की मौत की विस्तृत जांच के बाद सामने आएगा। हार्दिक इच्छा तो है कि जांच में आशंकाएं सच न साबित हों। मगर जांच तो जरूरी है। ऐसे में एक पत्रकार और शुभचिंतक के नाते सलाह है कि परिजनों और शासन प्रशासन को भी चाहिए कि सीबीआई से विधिवत् जांच कराकर सभी के मन में घुमड़ रही आशंकाओं के मुकाबले सच को सामने लाएं।


राजा की तरह जिंदगी जीने वाला आदमी तबियत बिगड़ने के बाद सिविल हॉस्पिटल गया…. जी हां एक सरकारी अस्पताल में…
सोचने वाली बात है की लखनऊ जहां एक से बढ़कर एक शानदार अस्पताल हैं जहां अपर मिडिल क्लास आदमी भी बीमार पड़ता है तो मेदांता जैसे वर्ल्ड क्लास हॉस्पिटल में जाता है…उसी लखनऊ में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव का दुलारा तबीयत बिगड़ने के बाद सरकारी अस्पताल में गया….
प्रतीक कई महीनों से डिप्रेशन में चल रहे थे। अपर्णा से रिश्ते अच्छे नहीं थे, एक बार नहीं तीन बार इंस्टाग्राम स्टोरी लगा चुके थे की अपर्णा बिष्ट ने उन्हें उनके परिवार से दूर कर दिया।
लेकिन एक बड़े परिवार की इज्जत प्रतीक के सिर पर थी, रिश्ता तोड़ने से बेहतर जोड़ना समझा और नतीजा प्रतीक डिप्रेशन में चले गए।
वजह जो भी रही हो लेकिन एक भरपूर जिंदगी जीने वाला आदमी, जानवरों से इश्क करने वाला आदमी, सपोर्टस कार का दीवाना आदमी, फिटनेस को लेकर पागल आदमी का अंत इतना दुखद होगा यह हैरान करने वाला है। -कविश अजिज


गौरव शुक्ला चंद्रकांत-

2 बेटियों ने अपने पिता को खो दिया, एक महिला ने अपना पति खो दिया… जिस शख्स की मौत हुई उसकी पत्नी एक राजनैतिक महिला थी, महिला आयोग की उपाध्यक्ष.. कार्यक्रम पहले से तय था कि उस महिला को असम जाना था… तो वो असम गईं, पति की तबीयत खराब थी तो उस दिन शाम से रात तक कई बार फोन पर पति से बात की, दोनों बेटियां घर पर ही थीं… घर का पूरा स्टाफ था… रात में उस महिला ने अपने ज्योतिष को फोन किया..

जैसे ही मौत की खबर मिली… वो असम से निकलती है.. सीधे लखनऊ के लिए फ्लाइट नहीं मिली तो पहले दिल्ली पहुंची.. फिर लखनऊ और फिर घर… । इस लंबे सफर में 14 साल का वो सफर आंखों के सामने तो होगा ही, दोनों बेटियों का चेहरा, पति का चेहरा बार बार घूम रहा होगा…

लेकिन सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के लिए बैठे लोग कहते हैं कि ‘अपर्णा यादव डायन है’, ‘पति 6 बजे सुबह मरा और ये दोपहर में 3 बजे आ रही हैं’… इससे भी ज्यादा घटिया लिखा और बोला जा रहा है…

हो सकता है कि अपर्णा यादव में कमियां होंगी, वो एक अच्छी पत्नी नहीं साबित हो पाई होंगी.. या फिर प्रतीक में कमी रही होंगी… या दोनों में कमी रही होंगी… ये सारे सवाल ये सारे आरोप ये सारी घिनौनी बातें सिर्फ इसलिए क्योंकि कुछ दिनों पहले प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि अपर्णा यादव सेल्फिश हैं, उन्होंने परिवार को तोड़ा है…

कितने लोग ऐसे हैं जिनके घरों में रिश्तेदारियों में पड़ोस में ऐसी महिलाएं नहीं हैं… जो परिवार तोड़ने में शामिल रही हैं, क्या हमारे और आपके घरों में आस पास जितनी महिलाएं हैं क्या वो सब परिवारों को साथ लेकर ही चल रही हैं क्या, कितने आदर्श पति और कितनी आदर्श पत्नियां दिखी हैं आपको… कौन ऐसा है जिसमें कोई कमी नहीं है…

लेकिन इसका मतलब ये है कि आप एक महिला को डायन कहने लगेंगे, अपर्णा और प्रतीक की लव मैरिज 14 साल पहले हुई थी… प्रतीक लंबे वक्त से बीमार थे, उनका इलाज चल रहा था… अपर्णा ने खूब पूजा पाठ किया है… घर पर बहुत सी पूजा करवाई, हवन करवाए…

प्रतीक का भारत से लेकर विदेश तक इलाज हुआ… लेकिन शायद आप ये जानते भी नहीं होंगे कि प्रतीक को पल्मोनरी एम्बोलिज्म नाम की बीमारी थी, क्या होती है ये बीमारी.. कितना परेशान करती है गूगल कर लीजिएगा…

अखिलेश यादव को लोग खूब बातें कहते हैं… पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचने वालों में सबसे पहला नाम अखिलेश यादव का है.. वही अखिलेश जो प्रतीक के सौतेले भाई हैं कुछ लोगों की नजरों में… जिनके बारे में कुछ ओछी मानसिकता और जाहिल किस्म के लोग सवाल कर रहे थे कि अखिलेश प्रतीक को अस्पताल देखने गए थे या नहीं…

डिंपल यादव प्रतीक की भाभी हैं वो भी पहुंचीं.. पूरा परिवार पहुंचा… हां, ये सच है कि अपर्णा ने अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए खुद को समाजवादी पार्टी से अलग किया.. बहुत हद तक परिवार से भी दूरी बनाई… लेकिन कभी परिवार के लोगों का अनादर नहीं किया..

बहुत से लोगों को देख रहा हूं कि प्रतीक की मौत को वो प्री प्लांड मर्डर बता रहे हैं, बिना कुछ जाने बिना कोई पड़ताल किए… एक महिला आज अपने सबसे मुश्किल दौर में हैं, उसने अपने पति को खोया है…

अपनी बेटियों के पिता को खोया है.. उस परिवार की तकलीफ को हम आप नहीं समझ सकते… लेकिन कम से कम हल्की बातें लिखकर अपनी हल्की मानसिकता और घटिया सोच का परिचय तो ना दें..

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