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दिल्ली

पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी मानहानि केस में दिल्ली हाईकोर्ट का OpIndia को राहत से इनकार!

Senior journalist Swati Chaturvedi on a news broadcast, with the quote: 'Modi won 2014 elections on Gujarat model. After 22 years, I want to know from BJP where is the Gujarat model?'

दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार Swati Chaturvedi से जुड़े कथित मानहानिकारक लेखों को हटाने के निचली अदालत के आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

यह मामला OpIndia की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें पटियाला हाउस कोर्ट की जिला जज मीनू कौशिक द्वारा 13 मई को दिए गए आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने OpIndia को स्वाति चतुर्वेदी से संबंधित दो कथित मानहानिकारक लेख हटाने या ब्लॉक करने का निर्देश दिया था।

मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान OpIndia की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया जाना चाहिए और उस पर तत्काल रोक लगाई जाए।

वहीं पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी की ओर से अधिवक्ता अक्षत गुप्ता ने इस मांग का विरोध किया।

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने अपील पर नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना दोनों पक्षों को पूरी तरह सुने आदेश पर रोक लगाना, अपील को लगभग स्वीकार करने जैसा होगा।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी। तब तक OpIndia को विवादित लेख हटाने या ब्लॉक रखने के आदेश का पालन करना होगा।

ट्रायल कोर्ट ने क्या कहा था?

पटियाला हाउस कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जिन “सोर्स आर्टिकल्स” के आधार पर OpIndia ने रिपोर्ट प्रकाशित की, वे पहली नजर में इस आरोप का समर्थन नहीं करते कि स्वाति चतुर्वेदी किसी कथित उगाही रैकेट का संचालन कर रही थीं।

अदालत ने यह भी कहा था कि एक पत्रकार के तौर पर स्वाति चतुर्वेदी की पेशेवर साख और विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में मुकदमे के अंतिम फैसले तक इन लेखों का प्रसार उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर और अपूरणीय नुकसान पहुंचा सकता है।

स्वाति चतुर्वेदी के वकील ने क्या कहा?

पत्रकार की ओर से पेश अधिवक्ता अक्षत गुप्ता ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं पाया।

उन्होंने कहा, “स्वाति एक प्रतिष्ठित पत्रकार हैं। उनके खिलाफ उगाही रैकेट चलाने जैसे निराधार आरोप उनकी साख और पेशेवर कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। इस लंबी कानूनी लड़ाई में फिलहाल उनकी प्रतिष्ठा की रक्षा करने में हमें सफलता मिली है।”

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