विश्व दीपक-
मोदी सरकार Weapons of Mass Distraction (WOMD) का इस्तेमाल कैसे करती है – देखिए. ठीक उसी वक्त जब कई राज्यों में पेट्रोल पंप सूख चुके हैं, डीजल के लिये मारामारी मची है, एलपीजी सिलेंडर खाली पड़े हैं, आबादी का बड़ा हिस्सा चूल्हा युग में वापस लौट चुका है – मोदी जी के ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक नया शिगूफा छेड़ दिया.
पुरी जी ने दावा किया कि राजस्थान के डांडेवाला में नैचुरल गैस का बड़ा भंडार मिला है. इतना बड़ा भंडार है कि देश का ऊर्जा संकट समाप्त हो जायेगा. गैस का भंडार मिलने में समस्या नहीं है. समस्या है टाइमिंग की.
पुरी – जिनका नाम एपस्टीन फाइल में आ चुका है और जिनकी बेटी पर जॉर्ज सोरोस से पैसा लेने का आरोप लग चुका है – को गैस का भंडार पहले क्यों नहीं दिखाई दिया? ठीक उसी वक्त क्यों दिखाई दे रहा है जब जनता को न तो पेट्रोल मिल रहा, न एलपीजी, न बिजली?
ठीक उसी वक्त जब पांच किलो राशन पर जीने वाली जनता के मन में मोदी जी की महानता को लेकर शक पैदा होने लगा, हरदीप पुरी ने उम्मीद का एक इंद्रजाल रच दिया. अब कई महीने इसी चकल्लस में निकल जाएंगे. तब तक बरसात आ जाएगी.
लेकिन यह पहली बार नहीं है. याद होगा 2023 में जब रेयर अर्थ मिनरल की बात चल रही थी तो अचानक दावा किया गया कि कश्मीर में लिथियम मिला है. तीन साल बीत गये. अभी वहां लिथियम का भंडार है या गायब हो गया? किसी को पता नहीं. कितने ग्राम लिथियम सरकार ने निकाला है अब तक?
डांडेवाला में गैस भंडार खोजना वैसे ही है जैसे दिल्ली के जिमखाना क्लब में अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआई का अड्डा खोजना. वीपन्स ऑफ मास डिस्ट्रैक्शन यानि WOMD का इस्तेमाल करने में मोदी सरकार माहिर है.
मित्रों ने याद दिलाया – मोदी सरकार सोनभद्र में सोना और अंडमान में तेल की खोज कर चुकी है. केजी बेसिन का किस्सा सबको पता है. तब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. हर दिन अखबारों में केजी बेसिन की खबरें प्लांट की जाती थीं.
केजी बेसिन से देश को ऊर्जा मिली हो या न मिली हो लेकिन मोदी जी को इतना ईंधन जरूर मिल गया कि वो अपनी इमेज ‘विकास पुरुष’ के तौर पर गढ़ने में कामयाब रहे. उसी ईंधन के सहारे वो 2014 में सीधे गुजरात से दिल्ली की सत्ता पर विराजमान हुये. वीपन्स ऑफ मास डिस्ट्रैक्शन यानि WOMD का इस्तेमाल करने में खुद मोदी जी और उनके मंत्री माहिर हैं.




