
एक्स पर आज सुबह दिखी ऐसी ही एक पोस्ट का स्क्रीन शॉट । पोस्ट के कमेंट में लोग वीडियो पोस्ट कर रहे हैं और हालत ऐसी हो गई है कि कमेंट बंद कर दिए गए हैं। इसमें भी लिखा है।
यह खबर मेरे किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। प्रचारकों की पार्टी का नया कारनामा। बच्चों और अभिभावकों को धोखा देने के लिए प्रिंसिपल को रील बनाने की सलाह देने वाला नया टूलकिट।
संजय कुमार सिंह
मैंने लिखा था कि कर्नाटक का मुख्यमंत्री बदलने की खबर (अटकल) हेडलाइन मैनेजमेंट के लिए हो सकती है। आज खबर है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया है और डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री होंगे। चूंकि यह मामला कई दिनों से चल रहा इसलिए खबर नहीं है फिर भी ज्यादातर अखबारों की लीड यही है। हिन्दुस्तान टाइम्स में भी। तकरीबन सभी अखबारों को देख लेने के बाद आज मुझे ऐसी कोई खबर नहीं दिखी जिस पर लिखा जा सके, किसी कारण से विशेष लगे या कुछ ऐसा ही। लिहाजा मैं दूसरी खबरों में लग गया और इसी क्रम में पता चला कि सीबीएसई स्कूलों के प्रिंसिपल रील बनाकर पोस्ट कर रहे हैं। लगभग सब एक ही बात कर रहे हैं। मैं उसे जानने समझने में लगा रहा। तभी हिन्दुस्तान टाइम्स के सेकेंड लीड पर नजर गई और सोशल मीडिया पर रील देखकर जो अनुमान हो रहा था या अंदेशा लग रहा था वह सही साबित हुआ। पेश है आपके लिए खबर का अनुवाद। शीर्षक है, रील्स बनाएँ, OSM का समर्थन करें: स्कूलों को CBSE से स्क्रिप्ट मिली। नई दिल्ली डेटलाइन से संजय मौर्य की यह खबरबताती है कि भाजपा की राजनीति ने परीक्षा व्यवस्था का क्या हाल कर दिया है और जब नुकसान हो चुका है तो छात्रों और उनके भविष्य की चिन्ता करने की बजाय राजनीति की जा रही है और हर विरोध को राजनीति कहकर बचने की कोशिश चल रही है। इसमें प्रिंसिपल को भी शामिल कर लिया गया है। भले इससे भाजपा की छवि बनी रहे, राजनीतिक लाभ मिले लेकिन सिस्टम बहुत ही नालायक लोगों के हाथों में है और वे इसे ठीक करने के लिए कुछ नहीं कर पाएंगे – यह तो स्पष्ट है।
खबरें छपती होती तो आम आदमी को यह सब पता होता। अब ऐसा प्रचारित कर दिया गया है कि सरकार विरोधी यह सब फैलाते रहते हैं जैसे सरकार दूध की धुली है। खबर के अनुसार, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के क्षेत्रीय कार्यालयों ने इस हफ़्ते स्कूल प्रिंसिपलों को एक सोशल मीडिया टूलकिट भेजा। इसमें उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे सोशल मीडिया पर बोर्ड की विवादित ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग‘ (OSM) प्रणाली का बचाव करें। हिन्दुस्तान टाइम्स को पता चला है कि इसके बाद सैकड़ों स्कूलों ने ऐसे वीडियो पोस्ट किए। इनमें उन्हीं बातों को दोहराया गया है। वीडियो पोस्ट करने वालों में सरकारी केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय भी हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने “प्रिंसिपल के लिए सामग्री” (Material for Principals) को देखा है। इस शीर्षक वाले एक दस्तावेज़ में यह भी बताया गया था कि उन्हें क्या बोलना है। एक जगह इसमें प्रिंसिपल से आग्रह किया गया था कि वे बोर्ड को “इन शुरुआती दिक्कतों के मामले में बेहद सक्रिय, संवेदनशील और संवाद करने वाला” बताएँ। प्रिंसिपल के लिए इसमें एक बात यह भी लिखी थी कि, “जब भी इतने बड़े पैमाने पर कोई नई तकनीक लागू की जाती है, तो मुझे पता है कि उसे लागू करने में कुछ शुरुआती दिक्कतें आती हैं, जिनसे चिंता पैदा हो सकती है… कृपया घबराएँ नहीं। मैं हर छात्र और अभिभावक को यह भरोसा दिलाना चाहता /चाहती हूँ कि किसी भी बच्चे को किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।”
प्रिंसिपलों से यह भी कहा गया कि वे छात्रों को बताएँ कि अगर उन्हें “अपने प्रदर्शन और डिजिटल शीट पर दिख रहे नतीजों में कोई अंतर” नज़र आता है, तो उन्हें CBSE की आधिकारिक पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए। हिन्दुस्तान टाइम्स द्वारा देखे गए कई वीडियो में छात्र और प्रिंसिपल इन्हीं बातों को दोहराते नज़र आए। देखे गए वीडियो में ज़्यादातर Instagram रील्स थे और उस दस्तावेज़ में लिखी भाषा से काफ़ी मिलते – जुलते हैं। हालांकि, सभी प्रिंसिपल ने ऐसा नहीं किया। दिल्ली के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा, “मैंने देखा कि Instagram पर CBSE और OSM प्रक्रिया का समर्थन करने वाले प्रिंसपल के वीडियो की बाढ़ आ गई है जबकि ये प्रिंसिपल अच्छी तरह जानते हैं कि इसकी वजह से छात्रों को कितनी परेशानियाँ उठानी पड़ रही हैं। ‘प्रिंसिपलों के लिए सामग्री‘ वाला दस्तावेज़ मुझे हमारे क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख ने भेजा था। लेकिन मुझे लगता है कि हमें छात्रों की चिंताओं, तनाव और तकलीफ़ों को आवाज़ देनी चाहिए, क्योंकि उनके करियर दाँव पर हैं। इसलिए, मैंने CBSE की OSM प्रक्रिया के समर्थन में कोई वीडियो नहीं बनाया।” केंद्रीय विद्यालय नंबर 1, एयर फ़ोर्स स्टेशन, गोरखपुर द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा का एक छात्र इस सिस्टम का बचाव करते हुए दिख रहा है। छात्र कहता है, “मैं उन अंकों से संतुष्ट हूँ जो मुझे सभी विषयों में मिले हैं। छात्रों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, वे कोई नई बात नहीं हैं, क्योंकि हर साल छात्रों को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मुझे नहीं लगता कि OSM कोई समस्या है।” प्रिंसिपल बैरिस्टर पांडे ने एचटी को बताया कि यह वीडियो स्कूल के अपने फ़ैसले को दिखाता है। पांडे ने इस बात से इनकार किया कि स्कूल ने किसी टूलकिट का पालन किया है, “छात्र इस विवाद पर अपनी राय साझा कर सकते हैं, और यह हमारे स्कूल स्टाफ़ का फ़ैसला था कि हमें सोशल मीडिया पर OSM के बारे में अपने छात्रों की राय पोस्ट करनी चाहिए।”
जवाहर नवोदय विद्यालय, जाजपुर द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में प्रभारी प्रिंसिपल अभिमन्यु भट्ट इस सिस्टम का बचाव करते हुए दिख रहे हैं। भट्ट कहते हैं, “OSM, CBSE की एक बहुत अच्छी पहल है… जवाबों का सही मूल्यांकन किया गया है… शिक्षकों को हर एक चीज़ को पढ़ने के लिए काफ़ी समय मिला। आने वाले सालों में 10वीं कक्षा के छात्रों को भी OSM से फ़ायदा होना चाहिए,” — ऐसा कहते हुए वे उस स्क्रिप्ट के मुख्य बिंदुओं को ही दोहरा रहे थे। दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिलीगुड़ी की प्रिंसिपल अनीशा शर्मा ने एक वीडियो में कहा कि OSM को “एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शुरू किया गया था, यह ध्यान में रखते हुए कि मूल्यांकन निष्पक्ष, सटीक, तेज़ और पारदर्शी होगा” — उन्होंने ठीक उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल किया जो उस दस्तावेज़ में लिखे हुए थे। “प्रिंसिपलों के लिए सामग्री” नामक दस्तावेज़ में कहा गया है: “शैक्षणिक दृष्टिकोण से, OSM सिस्टम ने हमारे मूल्यांकन की संरचनात्मक अखंडता में मौलिक सुधार किया है… यह हमारे मूल्यांकनकर्ताओं को अंकों की गणना के बजाय पूरी तरह से विषय-वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने के लिए आज़ाद करता है, जिससे एक अधिक मानकीकृत, पारदर्शी और पर्यावरण-अनुकूल मूल्यांकन प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त होता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप है।”
CBSE के एक प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी करने के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया। “हमने किसी को भी अपने पक्ष में कोई वीडियो पोस्ट करने का निर्देश नहीं दिया था,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा। 26 मई तक, कक्षा 12 की परीक्षा में शामिल हुए लगभग 18 लाख छात्रों में से लगभग हर चौथा छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की हुई प्रतियां पाने के लिए आवेदन कर चुका था; पिछले वर्ष की तुलना में आवेदनों की संख्या में 208% से अधिक की वृद्धि हुई है। यहां यह बताना जरूरी है कि दैनिक भास्कर में पहले छपी भास्कर पड़ताल, के अनुसार, दो दिन के एक्स्ट्रा काम से बचने के लिए ब्लर कॉपियां (भी) जांची गईं। नई दिल्ली डेटलाइन से उन्नति झाबक. की खबर इस प्रकार है, धुंधली कॉपी को रिजेक्ट करने का स्पष्ट विकल्प होने के बावजूद, कई शिक्षकों ने ब्लर कॉपियां ही जांच दीं। इन पर छात्रों को या तो कोई नंबर नहीं दिए या बहुत कम नंबर दिए या अपने मन से कुछ भी मार्क्स दे दिए। भास्कर से बातचीत में कुछ शिक्षकों ने यह बात स्वीकारी है..
चेकिंग में 1 महीने की देरी, शिक्षकों पर भारी दबाव;
शिक्षकों का कहना है कि इस बार कॉपियों की जांच प्रक्रिया काफी देरी से शुरू हुई। पहले फिजिकल चेकिंग में परीक्षा खत्म होने के 10 दिन के भीतर शिक्षकों को चेकिंग के लिए बुला लिया जाता था, पर इस बार उन्हें एक महीने बाद बुलाया गया। इस देरी से शिक्षकों पर कम समय में ज्यादा कॉपियां चेक करने का भारी दवाव आ गया। शुरुआत में कंप्यूटर सिस्टम पर गति धीमी होने के बाद, काम खत्म करने के दबाव में शिक्षकों को प्रतिदिन 12 से 15 कॉपियां तक चेक करनी पड़ीं, जिससे उनका रूटीन और जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।
कंप्यूटर तय कर रहा कॉपी, मैन्युअल क्रॉस-चेकिंग नहीं
पुरानी व्यवस्था में पहले चरण में दो इवैल्यूएटर आपस में कॉपियां एक्सचेंज करके दोबारा जांचते थे। इससे सुनिश्चित होता था कि किसी सवाल के अंक छूटे नहीं हैं और कुल अंक सही जोड़े गए हैं। इसके बाद एएचई (असिस्टेंट हेड एग्जामिनर) रैंडम कॉपियां चुनकर जांच करते थे। फिर एचई (हेड एग्जामिनर) भी अलग से रैंडम कॉपियां चेक करते थे। मगर इस बार सिर्फ रैंडम कुछ कॉपियों की क्रॉस-चेकिंग हुई।
सीबीएसई की खबर आज देशबन्धु में तीन कॉलम की है। मुख्य शीर्षक है, मुझ (राहुल गांधी) पर हमला करने से आपके अपराध कम नहीं होंगे। 18 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ, जवाब मांगना बंद नहीं करूंगा। फ्लैग शीर्षक है, राहुल गांधी ने धर्मेन्द्र प्रधान पर किया पलटवार। दैनिक भास्कर में भी यह खबर तीन कॉलम में है। लीक रोकने के लिए माथापच्ची, रक्षा मंत्री के साथ शिक्षा मंत्रालय, एनटीए की बैठक। जैसी सूचनाओं के साथ मुख्य शीर्षक है, नीट री-टेस्ट पेपर को लाने ले जाने में वायु सेना की मदद लेने की तैयारी। एक और खबर का शीर्षक है, आखिर शिक्षा मंत्री ने माना ओएसएम में गड़बड़ी, इसकी जिम्मेदारी मेरी। इस खबर में आगे कहा गया है, ….सीबीएसई अधिकारियों के साथ बैठक के बाद कहा कि इस सिस्टम में गड़बड़ी हुई है। छात्रों को जिस भी समस्या का सामना करना पड़ा है, उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूं। इसका समाधान निकाला जाएगा और व्यवस्था को सुधारा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीबीएसई ने पहली बार ओएसएम इवैल्यूएशन सिस्टम अपनाया है। इनमें 98 लाख आंसर शीट्स के 40 करोड़ पेज स्कैन किए गए हैं। इसमें कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं। खबर यह भी है, ….बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री 21 जून के री-टेस्ट की तैयारियों पर खुद नजर रख रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी हर जानकारी उन्हें दी जा रही है। खबर में यह बताया गया है कि जिस सॉफ्टवेयर से ओएसएम हुआ, उसकी समीक्षा और तकनीकी दिक्कतें दूर करने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के एक्सपर्ट्स सीबीएसई को तकनीकी मदद दे रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि निजी कंपनी को ठेका दिया गया है तो यह सब उसका काम था और बच्चों पर प्रयोग नहीं किए जाने चाहिए थे। पहले सिस्टम की जांच होती, खामियां थीं तो सुधार होता और फिर लागू किया जाता। इतनी जल्दी क्या थी और थी तो यह सब पहले क्यों नहीं बताया गया। अमर उजाला में आज पहले पन्ने पर सीबीएसई से संबंधित कुछ नहीं है।
इसमें दिलचस्प यह है कि सीबीएसई ने जिस कोएम्प्ट एजूटेक कंपनी को ओएसएम का कॉन्ट्रैक्ट दिया, वह पहले ग्लोबरेना नाम से विवादों में रही है। उसने तेलंगाना में 2019 और 2023 में बोर्ड परीक्षा से जुड़े घोटाले किए थे। तब 23 युवाओं ने आत्महत्या की थी। राहुल गांधी ने कहा है कि यह सब सार्वजनिक है फिर भी सीबीएसई ने उसी कंपनी को किसके कहने पर ठेका दिया? सरकार या सीबीएसई ने इसका जवाब तो नहीं दिया है लेकिन राहुल गांधी पर ही आरोप लगाए हैं। गनीमत यह है कि अखबारों ने उसे भी नहीं छापा है वरना सवाल नहीं छापकर आरोप छाप ही दें तो कोई क्या कर सकता है। दैनिक भास्कर ने अपनी इस खबर के साथ भाजपा के आरोपों के जवाब में जो कहा है उसे भी छापा है, धर्मेंद्र प्रधान जी, आप मुझ पर हमला करना चाहें कर लें, इससे आपके अपराध नहीं धुलेंगे। स्पष्ट है कि सरकार घिर गई है। ऐसे में सीबीएसई के प्रिंसिपल को रील बना कर सोशल मीडिया पर अपलोड करने के लिए क्या सीबीएसई ने कहा होगा? मुझे नहीं लगता है कि सीबीएसई को यह सब करने की जरूरत है। ना सीबीएसई ने अपने स्तर पर ठेका दिया होगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया में खबर पहले पन्ने पर तो नहीं है लेकिन अंदर छपी खबर के अनुसार, शिक्षा मंत्री ने जिम्मेदारी स्वीकार की है। यही खबर द हिन्दू में भी अंदर होने की सूचना पहले पन्ने पर है। इंडियन एक्सप्रेस ने भी शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के जिम्मेदारी लेने की खबर अंदर छापी है। पहले पन्ने पर छपी खबर के अनुसार, सीबीएसई ने जिस फर्म को तैयार किया (ठेका दिया) वह तेलंगाना की परीक्षा में गड़बड़ी के लिए पहले से निगरानी में थी। उसपर जुर्माना हो सकता है। पर यह सब पुरानी बात है। राहुल गांधी आरोप लगा चुके हैं। नवोदय टाइम्स की खबर का शीर्षक है, नीट अब सेना की निगरानी में। इसके साथ एक खबर का शीर्षक है, प्रधान ने कहा कि समस्याओं का समयबद्ध समाधान करें। गौरतलब है कि दूसरे अखबारों की खबरों के अनुसार शिक्षा मंत्री ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की है और इस खबर के अनुसार वे अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं कि समस्याओं को समयबद्ध समाधान करें। खबर के अनुसार, सीबीएसई मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधान ने कहा कि किसी भी प्रकार की चूक या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। द टेलीग्राफ में यह सिंगल कॉलम की खबर है जो बताती है कि राहुल गांधी के आरोप के बाद शिक्षा मंत्री ने ओएसएम से हुई गड़बड़ी की जिम्मेदारी ली। दि एशियन एज की खबर भी लगभग ऐसी ही है। पर किसी ने यह नहीं बताया है कि राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देने में असफल सीबीएसई और शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई के प्रिंसपल को रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए कहा है। हालांकि रील से यह स्पष्ट हो जा रहा है और उसकी अलग चर्चा भी हो चुकी है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



