वेंकटेश-
वो UPA सरकार का शुरुआती दौर था. तब मैं एक साप्ताहिक अखबार में था. संस्थान के क़ाबिल रिपोर्टर्स में से एक रिपोर्टर ने मुझसे नई स्टोरी का आइडिया मांगा. एक सप्ताह पहले ही वे बाबरी ढांचे के पास हुई ASI खुदाई में मिली पौराणिक कलाकृतियों, मूर्तियों, सिक्कों आदि के बारे में लंबी रिपोर्ट फ़ाइल कर चुके थे. उनकी खबर तत्कालीन सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ जा रही थी.
ASI सर्वे की तस्वीरें बाहर आने और अखबार में छप जाने से UPA सरकार की नज़र टेढ़ी हो गई थी. मैंने उनसे कहा कि आइडिया तो है लेकिन आप कर नहीं पाओगे. उन्होंने पूछा क्या? मैंने कहा रहने दो.
उन्होंने दोबारा ज़ोर देकर पूछा तो मैंने कहा वित्त मंत्री का परिवार इन्वेस्टर है. शेयर बाज़ार में पैसे लगाता है और कमाता भी है. आप ये पता लगाओ कि बजट से एक महीना पहले और एक महीना बाद उन्होंने कौन-कौन से शेयर खरीदे और कौन-कौन से शेयर बेचे, फिर बजट प्रोपोजल से उनका मिलान करो और बताओ कि क्या बजट प्रावधानों की अग्रिम जानकारी होने से वित्त मंत्री के परिवार ने पैसे बनाए?
यह खबर नहीं हो पाई. हो भी नहीं सकती थी. इसमें रिस्क बहुत था. सत्ता चाहे जितनी मॉडरेट या जितनी हार्डकोर दिखे, उसका चरित्र एक ही होता है. सबकी एक हद तय होती है जिसे पार करने पर सत्ता फुफकार उठती है. खबर हो भी जाती तो संस्थान उसे छापने से पहले 10 बार सोचता.

करीब 20-21 साल बाद अमेरिका ने साबित किया कि बजट ही नहीं, युद्ध से भी इनसाइडर ट्रेडिंग होती है और सत्ता व्यवस्था के करीबी लोग अरबों-खरबों के खेल करते हैं.
खैर अपना विषय अमेरिका नहीं है. अभी अपना विषय उज्जैन है. सोचता हूं कि इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के विरुद्ध खबर छापकर कितना बड़ा रिस्क लिया है. यदि इनसाइडर सपोर्ट के बिना यह रिस्क लिया गया है तो सचमुच बड़े गूदे का काम है.
विवेक कुमार-
मीडिया जगत में संघ के सबसे पुराने और विश्वस्त मित्र रामनाथ गोयनका के अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने आज मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव के जमीन घोटालों का खुलासा किया है।

इंडियन एक्सप्रेस आजकल रामनाथ का पोता अनंत चलाता है। इनके दादा इंदिरा गांधी के खिलाफ काफी मुखर थे, जन संघ के सांसद भी रहे थे। इंदिरा गांधी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बनाने में उनका बड़ा हाथ था। लेकिन उनका पोता अनंत मोदी की चाटुकारिता करता है, उनको एक्सप्रेस के प्रोग्राम में बुलाकर उनकी चरण वंदना करता है। गोयनका परिवार मोदी भक्ति में आकंठ डूबा हुआ है।
वैसे तो मोहन, भजन, नायब, पुष्कर जैसे सब प्यादे अपने अपने परिवार को सैट करने में लगे हैं क्योंकि इनकी अपनी कोई राजनैतिक हैसियत नहीं है, इनके कार्यालय PMO से चलते हैं। तो ये लोग अपना ज्यादातर वक्त व्यक्तिगत संपत्ति सुधार में लगाते हैं। लेकिन ये बात बिल्कुल गले नहीं उतरती कि गोयनका परिवार खुद से अपने अखबार में मोदी के किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ इतनी बड़ी स्टोरी छाप दे।
मोहन यादव के खिलाफ जमीन घोटाले की कहानी में संघ भाजपा के अंदर का ही कोई आदमी मोहन को निपटाने की कहानी लिख रहा है।
इंडियन एक्सप्रेस वैसे तो आजाद होने की अच्छी एक्टिंग करता रहता है। लेकिन जब बात मोदी की आती है तो संघ के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर और इंडियन एक्सप्रेस में कोई ज्यादा फर्क नहीं रह जाता।
देश का मीडिया मोहन यादव जैसे दर्जनों घोटालों पर कुंडली मार कर बैठा है, खबर बाहर तभी आएगी जब ऊपर बैठे किसी बड़े आदमी को स्कोर करना होगा।
अनंत गोयनका एक कारोबारी है और ये मोहन यादव की स्टोरी भी उनके कारोबार का एक हिस्सा है।
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