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उत्तर प्रदेश

सांध्य दैनिक ‘गाण्डीव’ के संपत्ति विवाद में रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और राजकुमार बाजपेयी जेल भेजे गए!

Collage with Gandiv bow silhouette, a 'Gandiv' logo, three portrait photos (two women, one man), and a red Hindi headline about a crore-rupee deal and jail.

वाराणसी। वाराणसी के चर्चित सांध्यकालीन समाचार पत्र ‘गाण्डीव’ से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के संपत्ति विवाद में पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। इस मामले में पुलिस ने रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और राजकुमार बाजपेयी को गिरफ्तार कर विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। अदालत ने तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजते हुए उनकी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

वाराणसी की पत्रकारिता में ‘गाण्डीव’ की अलग पहचान

‘गाण्डीव’ कभी वाराणसी का बेहद चर्चित सांध्यकालीन समाचार पत्र माना जाता था। एक दौर में व्यापारी, अधिवक्ता, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम पाठक शाम के समय इसकी सुर्खियों का इंतजार करते थे। शहर की पत्रकारिता में इस अखबार की अपनी विशिष्ट पहचान रही है।

जानकारों के अनुसार, स्वर्गीय डॉ. भगवान दास अरोड़ा ने ‘गाण्डीव’ की स्थापना की थी। विभाजन के बाद वाराणसी पहुंचे डॉ. अरोड़ा को शहर के वरिष्ठ चिकित्सक एवं पूर्व विधायक डॉ. कैलाश टंडन का सहयोग मिला। प्रारंभ में उर्दू भाषी रहे डॉ. अरोड़ा ने बाद में हिंदी सीखी और ‘गाण्डीव’ को शहर के प्रमुख सांध्य दैनिकों में शामिल कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, चौखम्भा निवासी और बनारसी साड़ी कारोबारी आनंद कृष्ण अग्रवाल को मलदहिया स्थित ‘बरकत भवन’ नामक मकान बिक्री के लिए दिखाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें बताया गया कि यह संपत्ति मीरा अरोड़ा और रचना अरोड़ा के स्वामित्व में है तथा इसकी कीमत 3.20 करोड़ रुपये तय की गई।

शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने बताया कि मकान बैंक में गिरवी है और ऋण चुकाने के बाद उसे बंधकमुक्त कर खरीदार के नाम रजिस्ट्री कर दी जाएगी।

एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 23 मई 2025 को 10 लाख रुपये का चेक दिया। इसके बाद 10 जून 2025 को 65 लाख और 75 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किए। इस तरह कुल 1.50 करोड़ रुपये ऑनलाइन भुगतान किए गए।

आरोप है कि इसके बाद 500 रुपये के स्टांप पेपर पर विक्रय अनुबंध तैयार किया गया और बैंक का नो-ड्यूज प्रमाणपत्र दिखाकर 10 अगस्त 2025 को ‘गाण्डीव’ कार्यालय में 1.50 करोड़ रुपये नकद भी लिए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस प्रकार उन्होंने कुल 3 करोड़ रुपये का भुगतान किया।

नगर निगम के रिकॉर्ड से खुला विवाद

एफआईआर के मुताबिक, भुगतान के बाद जब शिकायतकर्ता ने संपत्ति के मूल दस्तावेज मांगे तो उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। बाद में नगर निगम के रिकॉर्ड की जांच में संपत्ति के स्वामित्व को लेकर संदेह पैदा हुआ। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके साथ कूटरचित दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि पैसा वापस मांगने पर आरोपियों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद पुलिस कमिश्नरेट में शिकायत दर्ज कराई गई।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 351(2) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद पुलिस ने रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और राजकुमार बाजपेयी को गिरफ्तार कर लिया।

कोर्ट ने भेजा जेल

तीनों आरोपियों को विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया और जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी मधुसूदन तिवारी ने पैरवी की।

मामला न्यायालय में विचाराधीन

यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। समाचार में उल्लिखित आरोप एफआईआर और पुलिस जांच पर आधारित हैं। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

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