राम मंदिर चढ़ावा विवाद की कवरेज को लेकर देश के दो बड़े हिंदी न्यूज चैनलों—NDTV इंडिया और आजतक—की संपादकीय प्राथमिकता पर सवाल उठ रहे हैं। एक ही मामले पर दोनों चैनलों की हेडलाइन और प्रस्तुति बिल्कुल अलग नजर आई, जिससे यह बहस तेज हो गई है कि आखिर एक ही घटनाक्रम को दो प्रमुख चैनलों ने अलग-अलग नजरिए से क्यों पेश किया।
NDTV इंडिया ने अपनी खबर में दावा किया कि चढ़ावा विवाद के बाद मंदिर में जमा होने वाले दान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चैनल ने सूत्रों के हवाले से बताया कि 7 जून से पहले जहां प्रतिदिन औसतन 16 से 18 लाख रुपये बैंक में जमा हो रहे थे, वहीं विवाद शुरू होने के बाद यह राशि बढ़कर 22 से 24 लाख रुपये प्रतिदिन हो गई। यानी NDTV की पूरी रिपोर्ट का केंद्र यह संदेश रहा कि विवाद का दान पर नकारात्मक असर नहीं पड़ा, बल्कि चढ़ावा बढ़ा है।
दूसरी ओर, आजतक ने इसी मामले में बिल्कुल अलग एंगल अपनाया। चैनल की हेडलाइन थी—”राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच में बड़ा खुलासा, राम मंदिर के चढ़ावे में गिरावट”। आजतक ने जांच में सामने आए तथ्यों और चढ़ावे में कथित कमी को अपनी रिपोर्ट का प्रमुख आधार बनाया।
यानी, एक ही विवाद पर एक चैनल दान बढ़ने को प्रमुख खबर बना रहा है, जबकि दूसरा चढ़ावे में गिरावट और जांच के खुलासे को सबसे अहम मान रहा है। इससे दोनों चैनलों की संपादकीय प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े विवाद की रिपोर्टिंग में अलग-अलग पहलुओं पर फोकस करना संपादकीय स्वतंत्रता का हिस्सा है। हालांकि, जब एक ही घटनाक्रम पर दो प्रमुख राष्ट्रीय चैनलों की हेडलाइन एक-दूसरे से बिल्कुल उलट संदेश देती दिखाई दे, तो दर्शकों के बीच स्वाभाविक रूप से भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पहले से ही राष्ट्रीय बहस का विषय बना हुआ है। ऐसे में यह मामला केवल जांच या आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब मीडिया की प्रस्तुति और संपादकीय दृष्टिकोण भी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।


गजब है ये तो!
NDTV चला रहा है राम मंदिर के चढ़ावे में बढ़ोतरी हुई।
आज तक चला रहा है राम मंदिर के चढ़ावे में कमी आई।
क्या यूपी के सूचना विभाग के ‘विशाल’ संदेशे सभी जगह एक साथ नहीं पहुँच रहे हैं?
या फिर अवस्थी जी ने कोई ख़ुद की लकीर खींच रखी है?
क्या जय जयकार के तंत्र के आपसी कोआर्डिनेशन में कोई भारी कमी रह गई है?
-अभिषेक उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार
भारत समाचार का ट्वीट-
ब्रेकिंग न्यूज़। अयोध्या

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा दावा सामने आया है। जेल में बंद आरोपी अविनाश शुक्ल ने कथित तौर पर कहा है कि ट्रस्ट के डॉ. अनिल मिश्रा इस पूरे सिस्टम में शामिल थे और नियंत्रण उन्हीं का था।
मंदिर के पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने भी अनिल मिश्रा पर 40% कमीशन लेने का आरोप लगाया था। अब आरोप लग रहे हैं कि मिश्रा के 100 से ज्यादा करीबी ट्रस्ट कर्मियों के जरिए पूरा सिंडिकेट चल रहा था।
चोरी से लेकर दलाली तक, राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ज़रूर प्रधानमंत्री मॉनिटर कर रहे होंगे। नीट परीक्षा में पेपर लीक हुआ तो वायु सेना की मदद ली गई। राम मंदिर में चंदे चढ़ाने की डकैती रोकने के लिए नौ सेना की मदद लेनी चाहिए।
-रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार-यूट्यूबर



