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सियासत

अमृतलाल एंड गन्नाकरी कंपनी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि जनता इथेनॉल वाले तेल से बहुत गुस्से में है!

Hindi news banner: a man at a press conference gesturing, with a bold Hindi quote about 20% ethanol in petrol and a logo at the top.

सुभाष सिंह सुमन-

पूरे देश में मिनिमम 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग अनिवार्य बनाकर एक्सपेरिमेंट चल रहा है इनका। वाह रे बॉस डीके!

जबतक इनके एक्सपेरिमेंट का रिजल्ट आयेगा, गन्नाकरी के लौंडे डॉलर में खरबपति हो लेंगे, अमृतलाल जनता से निचोड़कर 2-4 सौ बिलियन डॉलर अमरीका पहुँचा आयेगा, और खतरे में फंसा हिन्दू सर्विस सेंटर में चौकीदारी करता नजर आयेगा।


एक अकेला इथेनॉल का मुद्दा यह बताने के लिए पर्याप्त है कि केंद्र में बैठी अमृतलाल सरकार किस हद तक संवेदनहीन हो चुकी है। अमृतलाल ऐंड गन्नाकरी कंपनी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है कि जनता इथेनॉल वाले तेल से बहुत गुस्से में है। एक के बाद एक तुगलकी फरमान आ रहे हैं। ईटी की आज की एक रिपोर्ट है। रिपोर्ट कह रही है कि सरकार ने ई25 की टेस्टिंग शुरू कर दी है। ई25 मने 25 पर्सेंट इथेनॉल, बस 75% पेट्रोल। ई20 पर इसी तरह टेस्टिंग का दावा किया गया था। हालाँकि उसमें रिजल्ट क्या निकला, कोई नहीं जानता। आरटीआई में जवाब माँगने पर मना कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल रिजेक्ट हो गया।

30 जून को बीपीसीएल की एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी। मुद्दा इथेनॉल से जुड़ा था। उसमें केंद्र सरकार अपना पक्ष रखते हुए बता रही है कि अभी ई20 का एक्सपेरिमेंट चल रहा है। रिजल्ट पता चलने में साल भर लगेगा। मतलब पहले टेस्टिंग हुई ही नहीं थी? गन्नाकरी ने जनता को मूर्ख बनाने वाले के लिए सिर्फ नया जुमला फेंका था? या अब सुप्रीम कोर्ट के सामने सफेद झूठ बोला गया? सुप्रीम कोर्ट के जज साहब लोग भी बड़े महान। कोई यह तो पूछता सरकार से कि बिना ट्रायल-एक्सपेरिमेंट के पूरे देश में ई20 अनिवार्य कैसे कर दिया?

Protest poster at a refinery showing three Erlenmeyer flasks labeled E20, E25, and E30 on a lab stand; bold Hindi text condemns fuel changes and calls for action.

2022 से पहले बनी लगभग सारी कारें 20% इथेनॉल झेलने लायक नहीं हैं। उन सबको बर्बाद कर दिया ई20 अनिवार्य बनाकर। उसके बाद अभी तक बनी सारी कारें 20% तक ही इथेनॉल झेलने के लिए बनी हैं। अब उन्हें बर्बाद किया जायेगा 25% और 30% इथेनॉल मिलाकर।

मैंने पहले भी कहा है और फिर से कह रहा हूँ। अभी जैसा हाल चल रहा है और सरकार जिस तरह तुगलकी हो चुकी है, पेट्रोल में मिनिमम मिलावट 20% पर स्थिर नहीं रहने वाली है। अनिवार्य न्यूनतम मिलावट को 25-30% किया जायेगा। अभी 25% इथेनॉल वाले तेल की जिस टेस्टिंग की बात की जा रही है, उसे ई20 के लिए बनी कारों पर ही टेस्ट किया जा रहा है। जैसे बिना इथेनॉल वाला नॉर्मल पेट्रोल बाजार से गायब हो गया, वैसे ही ई20 भी गायब हो जायेगा। 25-30% इथेनॉल वाला ही ऑप्शन रह जायेगा बाजार में। आगे उसे और नहीं बढ़ाया जायेगा, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।

सरकार का इरादा साफ है। हमारी-आपकी गाड़ी जाये कबाड़ में, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी को अपना बेटा कुबेर बनाना है। किसी को एप्सटीन फाइल्स का एहसान उतारना है। देश बेशक फिर से गुलाम बन जाये।

ई25 की टेस्टिंग वाली बात भी कोई रहस्योद्घाटन नहीं है। कई इंडिपेंडेंट एनालिस्ट एक महीने पहले से यह कह रहे हैं। वो जो कह रहे हैं, यदि सच है, तो और भी खतरनाक है। उनका कहना है कि ई20 के नाम पर ई25 और ई30 पेट्रोल बेचा जा रहा है और चुपचाप हमारी गाड़ियों पर उसका भी एक्सपेरिमेंट चल रहा है।

इथेनॉल वाले मुद्दे को बड़ा बनाने की जरूरत है। 5 जुलाई को जंतर-मंतर पर इसके लिए धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। दिल्ली और आस-पास के लोगों को वहाँ पहुँचना चाहिए। जो नहीं पहुँच सकते, उन्हें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इसके बारे में बताना चाहिए। सब जानें तो कि लोकतंत्र में जनता के वोट से चुनकर आयी कोई सरकार कैसे उसी जनता का खून पीने पर आमादा हो चुकी है। इसके अलावा भी कुछ चीजें हम कर सकते हैं। नयी कार खरीदने की योजना कम से कम 1 साल के लिए टाल दीजिए। वैसे भी खरीदकर कोई लाभ नहीं।

अभी आपको मिलेगी ई20 कम्पलायंट कार। तेल मिलेगा 25-30% इथेनॉल वाला। साल भर में इंजन खुल जायेगा। नहीं खरीदने से कार कंपनियों की बिक्री कम होगी। बाकी काम कार कंपनियाँ खुद कर देंगी। इस सरकार को लोगों की रत्ती भर परवाह नहीं, लेकिन कॉरपोरेट के सामने यह सरकार कभी भी मुर्गा बन जाती है।


ये है फॉक्सवैगन वर्टस… गरीबों की ऑडी। गन्नाकरी ब्रो और अमृतलाल के सौजन्य से गाड़ियों को गन्ना-जूस पिलाने वाली जो पॉलिसी आयी है, यह बेचारी उसकी सबसे बड़ी विक्टिम बनी है।

Gray Volkswagen sedan driving on a sunlit road with trees in the background (front three-quarter view)./ Rearview mirrors visible, motion blur suggests speed.

भारत में मरे पड़े सेडान सेगमेंट को इस अकेली कार से संजीवनी मिली। आप देख सकते हैं, यह जर्मन कन्या परमसुंदरी है। प्योर यूरोपियन ब्यूटी। कालिदास की प्रतिभा का अंशमात्र भी मुझमें होता, तो मैं इसके लिए नयी शकुंतला रच देता। कार दिखने में जितनी सुंदर है, उससे कहीं अधिक मजबूत है। इंजन और भी उत्कृष्ट। इसके टर्बो के सामने इसके डबल दाम की कारें हांफ जाती हैं। जर्मन इंजीनियरिंग का विशुद्ध नमूना है। ड्राइविंग डायनेमिक्स अनमैच्ड। ग्राउंड क्लियरेंस भारत में एसयूवी के नाम पर टॉप सेलिंग बन रहीं कई कूड़ा गाड़ियों से भी बेहतर। जो लोग ड्राइव एंजॉय करते हैं, उनके लिए 40 लाख तक के बजट में इसके टक्कर की कोई कार फिलहाल भारतीय बाजार में नहीं है। इसके लिए मेरे एक प्रिय मित्र के शब्द रहते हैं:- 20 लाख में 40 लाख वाली कार के मजे देगी।

मुझे किसी दोपाई कन्या से पहली नजर वाला प्रेम नहीं हुआ कभी, लेकिन इस चार पैरों वाली कन्या से हो गया। दिसंबर में खरीदने की पूरी तैयारी कर ली। तब फेसलिफ्ट के चक्कर में रुक गये। फेसलिफ्ट के लीक में कनेक्टेड डीआरएल वाली जानकारी मिली। मैं ट्यूबलाइट वाली वर्टस नहीं ले सकता, तो अभी वाली लेने का इरादा पक्का कर लिये। सबकुछ फाइनल हो चुका था। तभी पेट्रोल में गन्ना जूस की मिलावट 20% से बढ़ाने वाली खबर मिल गयी। मैंने तत्काल प्रभाव से इरादा बदल लिया। उसके बाद लगभग हर रोज शोरूम से फोन आता रहा। तरह-तरह के ऑफर मिलने लगे। लेकिन मैं इरादा बदल चुका था।

एक-दो महीने पहले तक इंस्टाग्राम पर वर्टस ऑरा फार्मिंग करती थी। गजब ही भौकाल मचा रहता था। इधर एक-दो महीने में इसका सारा ऑरा जीरो होने को है। जिस सेडान से लोग लद्दाख नापकर भौकाल बना रहे थे, वो अब ब्रेकडाउन और ईपीसी लाइट इश्यू के कारण रोज रुला रही है। मुझे इसका ही डर लगा था। मुझे लगा था कि जो इथेनॉल सुजुकी के जापानी नेचुरल एस्पिरेटेड इंजन को बुखार ला दे रहा है, वह नाजुक जर्मन टर्बो को आईसीयू में ही भेजेगा। वही होते देख रहा हूँ। बलेनो के जापानी डीएनए में दिक्कत यहीं तक सीमित है कि एवरेज और पॉवर की लंका लगी है। वर्टस में एक्सपी95 पर भी इंजन बैठ रहा है। 165-170 रुपये लीटर वाला एक्सपी100 भरवा पाना सबके लिए संभव नहीं है। जिनके लिए संभव है, उनका भी दुख कम नहीं है। एक्सपी100 मिलेगा, तब तो भरवा पाओगे? कागज पर यह आराम से मिल रहा है। पेट्रोल पंपों पर सिर्फ उन्हें, जिनका भाग्य त्रिदेवों ने मिलकर लिखा है।

यदि आप भी चाहते हैं कि सरकार इथेनॉल पॉलिसी पर सुधरे, तो विरोध का सबसे अच्छा तरीका है कि भले ही बहुत मन कर रहा हो, अभी नयी कार नहीं खरीदें।

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