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MIB की सख्ती; मंत्रालय से अगली अनुमति मिलने तक किसी भी चैनल की रेटिंग जारी न करे BARC

नई दिल्ली। देश में टेलीविजन दर्शक मापन (TV Ratings) का पूरा सिस्टम एक बार फिर ठहर गया है। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC India) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के निर्देश के बाद तत्काल प्रभाव से सभी साप्ताहिक टीवी रेटिंग जारी करने पर रोक लगा दी है। अब मंत्रालय से अगली अनुमति मिलने तक किसी भी चैनल की रेटिंग प्रकाशित नहीं की जाएगी।

BARC ने गुरुवार तड़के अपने सब्सक्राइबर्स को जारी एडवाइजरी में कहा कि मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि नई Television Ratings Policy-2026 के तहत अनुमति मिलने तक साप्ताहिक टीवी रेटिंग प्रकाशित न की जाए। इसके चलते गुरुवार सुबह 11 बजे जारी होने वाली निर्धारित रेटिंग भी रोक दी गई।

क्या है पूरा मामला?

यह फैसला Television Ratings Policy-2026 से जुड़ा है, जिसे केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को अधिसूचित किया था। नई नीति के तहत सभी मौजूदा रेटिंग एजेंसियों को नए नियमों के अनुसार दोबारा पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि नई नीति के तहत अनुमति मिलने तक कोई भी रेटिंग एजेंसी टीवी रेटिंग प्रकाशित नहीं कर सकती।

हालांकि उद्योग सूत्रों के मुताबिक BARC ने निर्धारित समयसीमा के भीतर नए नियमों के तहत आवेदन कर दिया था और नई व्यवस्था लागू करने की तैयारियां भी पूरी कर ली थीं।

लैंडिंग पेज विवाद बना बड़ी वजह

नई नीति का सबसे विवादित प्रावधान Landing Page Viewership को रेटिंग से बाहर करना है। इसके तहत यदि सेट-टॉप बॉक्स चालू करते ही किसी चैनल का लैंडिंग पेज दिखाई देता है, तो उस शुरुआती व्यूअरशिप को रेटिंग में शामिल नहीं किया जाएगा। केवल वही व्यूअरशिप गिनी जाएगी जिसमें दर्शक अपनी पसंद से चैनल देखना जारी रखे।

सरकार का तर्क है कि इससे कृत्रिम (Artificial) टीआरपी खत्म होगी और दर्शकों की वास्तविक पसंद सामने आएगी।

केरल हाई कोर्ट में मामला विचाराधीन

नई नीति के इस प्रावधान को ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और DEN Networks ने केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि लैंडिंग पेज भी वास्तविक दर्शक अनुभव का हिस्सा है, इसलिए उसे रेटिंग से बाहर नहीं किया जा सकता।

22 मई को हाई कोर्ट ने नीति की Clause 5.4.1 पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला 8 जून, 15 जून और 19 जून को सूचीबद्ध हुआ, लेकिन अंतिम सुनवाई नहीं हो सकी। अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को प्रस्तावित है।

BARC ने तैयार कर लिया था नया सिस्टम

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार BARC ने लैंडिंग पेज हटाने के लिए तकनीकी ढांचा भी तैयार कर लिया था। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार यदि कोई चैनल केवल सेट-टॉप बॉक्स के लैंडिंग पेज पर दिखाई देता, तो उस शुरुआती व्यूअरशिप को रेटिंग में शामिल नहीं किया जाता। लेकिन यदि दर्शक बाद में उसी चैनल को अपनी पसंद से देखता, तो उस व्यूअरशिप को गिना जाता।

यानी BARC नई नीति लागू करने के लिए तैयार था, लेकिन अदालत की रोक के कारण यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।

उद्योग में उठे सवाल

मीडिया इंडस्ट्री के कई विशेषज्ञों का मानना है कि BARC ने नई नीति के तहत आवेदन भी कर दिया था और तकनीकी तैयारियां भी पूरी कर ली थीं। ऐसे में केवल अदालत में लंबित एक प्रावधान की वजह से पूरी रेटिंग प्रणाली रोक देना उद्योग के लिए बड़ा झटका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सुधारों का उद्देश्य बेहतर और पारदर्शी डेटा उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि पूरे उद्योग को “डेटा-डार्क” स्थिति में धकेल देना।

विज्ञापन बाजार पर पड़ेगा असर

टीवी रेटिंग रुकने का सीधा असर विज्ञापन उद्योग पर पड़ेगा। चैनलों की रैंकिंग, विज्ञापन दरें, मीडिया प्लानिंग, एजेंसियों के फैसले और विज्ञापन इन्वेंट्री का मूल्यांकन काफी हद तक BARC की रेटिंग पर निर्भर करता है।

विशेष रूप से छोटे और मझोले टीवी चैनलों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे अपनी दर्शक संख्या साबित करने के लिए रेटिंग डेटा पर ही निर्भर रहते हैं।

फिलहाल अगली अनुमति का इंतजार

BARC ने स्पष्ट कर दिया है कि मंत्रालय से औपचारिक अनुमति मिलने तक किसी भी श्रेणी के टीवी चैनलों की रेटिंग जारी नहीं की जाएगी। ऐसे में भारतीय टेलीविजन उद्योग एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गया है और अब सभी की निगाहें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा केरल हाई कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं।

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