गाजीपुर GeM टेंडर घोटाले की आरोपी फर्म Vanshika HR Services से UPSRTC ने एफआईआर छिपाने के आरोपों पर मांगा स्पष्टीकरण!
UPSRTC ने नोएडा क्षेत्र की निविदा में L1 घोषित फर्म से दर्ज FIR के संबंध में सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। यह वही फर्म है जिसका नाम गाजीपुर GeM टेंडर विवाद में भी सामने आया था।
लखनऊ/गाजीपुर। गाजीपुर के चर्चित GeM टेंडर घोटाले में पहले से सवालों के घेरे में रही वंशिका एचआर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड अब एक और सरकारी विभाग की जांच के दायरे में दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने नोएडा क्षेत्र की एक निविदा में एल-1 घोषित इस फर्म से उसके विरुद्ध दर्ज एफआईआर और निविदा के दौरान दी गई स्व-घोषणा (Annexure-V) के संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण तलब किया था।
सूत्रों के अनुसार, विभाग ने फर्म से पूछा कि यदि उसके विरुद्ध दर्ज एफआईआर से उसका संबंध है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और निविदा में प्रस्तुत स्व-घोषणा में उसका उल्लेख क्यों नहीं किया गया। विभाग ने यह भी संकेत दिया कि यदि स्व-घोषणा में तथ्य छिपाए गए पाए जाते हैं तो नियमानुसार निविदा निरस्त करने तथा अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
यह वही वंशिका एचआर सर्विसेज है जिसका नाम गाजीपुर GeM टेंडर विवाद में भी सामने आया था। इसी प्रकरण की विवेचना को लेकर गंभीर सवाल उठने के बाद डीआईजी वैभव कृष्ण ने दो विवेचकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की। विभागीय आदेश में यह माना गया कि विवेचना के दौरान गंभीर अनियमितताएँ हुईं और जांच पूरी किए बिना संबंधित फर्म के पक्ष में टिप्पणी दर्ज की गई। इसी आधार पर दोनों विवेचकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई।
गाजीपुर प्रकरण में डीआईजी वैभव कृष्ण द्वारा की गई कार्रवाई को पुलिस महकमे में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दस्तावेज़ों के आधार पर सामने आई अनियमितताओं पर उन्होंने संबंधित विवेचकों के विरुद्ध कार्रवाई कर यह संकेत दिया कि जांच प्रक्रिया से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उठते हैं ये सवाल
यदि एक से अधिक सरकारी विभागों में एक ही फर्म को लेकर सवाल उठे, तो क्या सभी संबंधित निविदाओं की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए?
क्या निविदा में प्रस्तुत स्व-घोषणाओं का पर्याप्त सत्यापन किया गया था?
जिन मामलों में विवेचना पर ही सवाल उठे, उनकी निष्पक्ष जांच कौन सुनिश्चित करेगा?
क्या इस पूरे प्रकरण में केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त है या आगे आपराधिक जांच की भी आवश्यकता है?
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सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने एक निविदा प्रक्रिया के दौरान वंशिका एचआर सर्विसेज के विरुद्ध दर्ज एफआईआर और स्व-घोषणा (Annexure-V) को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था, तब गाजीपुर GeM टेंडर प्रकरण में इसी फर्म के संबंध में विवेचक रोहित कुमार द्विवेदी ने किस आधार पर लिखित रूप से ऐसा प्रतिवेदन तैयार किया, जिससे फर्म को राहत मिलती दिखाई दी। जबकि गाजीपुर के तत्कालीन बीएसए उपासना रानी वर्मा पहले ही स्पष्ट रूप से लिख चुकी थीं कि फर्म के विरुद्ध मुकदमा दर्ज है और जांच भी पूरी नहीं हुई थी। बाद में इसी विवेचना पर गंभीर सवाल उठने के बाद डीआईजी वैभव कृष्ण ने दोनों विवेचकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की। ऐसे में यह प्रकरण इस बात की निष्पक्ष जांच की मांग करता है कि क्या सरकारी अभिलेखों में उपलब्ध तथ्यों की अनदेखी की गई थी और यदि हाँ, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।