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उत्तर प्रदेश

पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे रोकने का कानून बनाने पर कब विचार करेगी सरकार?

दागी और अपराधी पत्रकारों पर हो एक्शन लेकिन उनका क्या जिनकी खबर से दुखी पुलिस ही फर्जी मुकदमा दर्ज कराती है?

Man in a white button-down shirt with a pen in the chest pocket, standing outdoors with greenery in the background.

सुधीर सिंह-

उत्तर प्रदेश सरकार का सूचना निदेशालय अब दागी और आपराधिक प्रवृति के पत्रकारों पर एक्शन की तैयारी में है। होना भी चाहिए। पत्रकारिता की सुचिता और निष्पक्ष चरित्र में अपराधियों का प्रवेश भयावह है। लेकिन पत्रकारिता की सुचिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सबसे आवश्यक है पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाना। क्यों कि निष्पक्ष पत्रकारिता में सबसे बड़ी बाधा सरकार के भ्रष्ट अफसर, अपराधी प्रवृति के बाहुबली जनप्रतिनिधि और धन पशु है।

जब पत्रकार कोई खबर चलाता है तो खबर जिसके विरुद्ध चलती है, वह रंजिश रखने लगता है। चाहे वह भ्रष्ट अफसर हो या बाहुबली जन प्रतिनिधि या माफिया। और खबर के बाद जब कुकर्मों की पोल खुलती है और सरकार ही एक्शन लेती है तो ये लोग खबरों को दबाने के लिए पत्रकारों के विरुद्ध फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का कुचक्र रचते है। ऐसा ही साल 2019 में मेरे साथ हुआ। जब भारत समाचार टीवी पर पुलिस की मिलीभगत से गोकशी की खबर का खुलासा हुआ, तो आजमगढ़ के पुलिस कप्तान नाराज हो गए।

दोषी पुलिस कर्मियों पर एक्शन की बजाय मेरे ही विरुद्ध साजिशन ताबड़तोड़ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया। फिर मामला राष्ट्रीय लेवल पर सुर्खियों में आया और लखनऊ में प्रदेश के मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के प्रतिनिधि मंडल ने अपर मुख्य सचिव गृह और सूचना अवनीश अवस्थी से मुलाकात कर प्रकरण की जांच की मांग की।

वहीं, भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने भी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से जांच कराई। शासन की जांच में पुलिस कर्मी गोकशी कांड में दोषी करार दिए गए। और दूसरी जांच रिपोर्ट में मेरे विरुद्ध दर्ज मुकदमे पुलिस के पूर्वाग्रह से ग्रसित हो कर फर्जी दर्ज कराए पाए गए। फिर दोषी पुलिस कर्मियों पर एक्शन भी हुआ। और मेरे ऊपर दर्ज सभी मुकदमे समाप्त किए गए।

अब बड़ा सवाल क्या पुलिस के द्वारा दर्ज सभी मुकदमे सत्य ही होते है? या फर्जी मुकदमे दर्ज होने के बाद जो परेशानी समय की बर्बादी और मानसिक तकलीफ होती है उसकी भरपाई कैसे होगी या मीडिया की निष्पक्षता और सुचिता को बचाने के लिए सरकार कोई कानून बनाएगी।

अन्यथा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर भ्रष्ट अफसर, बाहुबली माफिया, जनप्रतिनिधि मुकदमे दर्ज कराने कुचक्र रचते रहेंगे और पत्रकारिता की सुचिता, निष्पक्षता हमेशा प्रभावित होती रहेगी।

सुधीर समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के आजमगढ़ संवाददाता है।

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