अनिल तिवारी-
सूचना निदेशक से मिली पत्रकारों की एक नई मान्यता समिति!
उत्तर प्रदेश के राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों की निर्वाचित समिति, उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददता समिति, जिसका प्रमाण पत्र 31 अगस्त 2026 तक केवल वैद्य है एवं 1 अगस्त 2026 को चुनाव कराए जाने की नैतिकता का सिद्धांत प्रमाण पत्र पर उल्लिखित है उसकी नैतिकता को बचाने के लिये पत्रकारों के एक दल ने सूचना निदेशक से हुई भेंट वार्ता की प्रेस विज्ञप्ति में समिति को एक नया नाम देकर नैतिकता और कलमकारिता का उत्कृष्ट उदाहरण मीडिया जगत के सम्मुख प्रस्तुत किया गया है।
इस नई समिति का नामांकरण, प्रेस विज्ञप्ति में उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के नाम से दिखाया गया है जिसके स्वयंभू अध्यक्ष हेमंत तिवारी की नैतिकता के चर्चे स्वयं मुख्यमंत्री कार्यालय पर किए जाते हैं, स्थानीय पुलिस अभी सूचना इकाई (LIU) द्वारा इनके चाल चरण को लेकर प्रतिकूल रिपोर्ट सूचना निदेशक के सम्मुख प्रस्तुत करने के उपरांत भी इनकी मान्यता का नवीनकरण करने का नैतिक प्रमाण सूचना विभाग द्वारा दिया गया है।
इनको राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त का दर्जा दिया जाना कहीं ना कहीं इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित गोमती नगर में बड़ी कोठी होने के बाद भी सरकारी आवास को जबरिया रूप से कब्जा जमाये रखने में राज्य मुख्यालय की मान्यता आवश्यक है।
इस सरकारी आवास की कुल बकायादारी मात्र 30 लाख रुपया है जो उत्तर प्रदेश में सरकारी बकायेदारी का एक उत्कृष्ट और नैतिक उदाहरण है, सिर्फ यही नहीं विद्युत विभाग के मंत्री के सम्मुख स्वयंभू पत्रकारों के नेता हेमंत तिवारी ने लगभग 8 लाख की बकायेदारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है और उनके आवास का विद्युत विच्छेदन करने की हिम्मत किसी भी ऊर्जा विभाग के अधिकारी में नहीं है, सिर्फ यही नहीं सूचना निदेशक के सम्मुख पत्रकारिता के ऐसे अनेक नैतिक उदाहरण दिए गए जिसमें मुंबई की विलासता भरी जिंदगी और चिरागदिन जैसे ब्रांडेड स्टोर के अपने परिधानों का भी कैटवॉक करके प्रस्तुतीकरण जिस अंदाज में किया गया। उसको देखकर वहां पर मौजूद सूचना निदेशक एवं सभी पत्रकारों का हृदय विशाल रूप से गदगद हो गया और ऐसी पत्रकारिता की मिसाल बन चुके हेमंत तिवारी को अपना नेता बनाये रखने के लिए इस नई समिति के लोगों ने उत्साहपूर्वक निदेशक को एक नया प्रस्तुतिकरण शीघ्र प्रस्तुत किये जाने के लिए पुनः आग्रह किया गया है, फिलहाल चुनावी घोषणा या समिति भंग किये जाने की नैतिक मांग का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।


