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आज के अखबार (दो) : आकृति चौधरी के खिलाफ NSA हटाने के आदेश को चुनौती देने का मतलब नहीं बताते

Hindi newspaper front page featuring a man giving a speech, with three red-bordered article excerpts about student notices and government actions

अमर उजाला की खबर – लाल घेरा मैंने बनाया है, अखबार में ऐसे नहीं है। 

संजय कुमार सिंह

सामान्य जानकारी के अनुसार इस समय गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम (आईएएस) हैं। सबको पता है कि मेधा रूपम मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन पर एक अलग मामले में पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। आकृति चौधरी नाम की छात्रा पर एनएसए लगाने का यह मामला पहले से चर्चा में है और उसके बाद नोएडा के ही मामले में सीजेआई की सख्ती खबर के लिहाज से और महत्वपूर्ण हो जाती है। एक युवा आईएएस अफसर के मामले में हाईकोर्ट का आदेश और सीजेआई की सख्ती भविष्य की सरकारों में जिलाधिकारी का करियर खराब हो सकने के लिए पर्याप्त आधार है। सरकार की ओर से बचाने की कोशिशें सामान्य हैं। जो कुछ भी ऐसी कोशिश का भाग लगे वह खबर है।

आजतक (aajtak.in) की खबर के अनुसार, छात्र-एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। संवाददाता संजय शर्मा ने अपनी खबर में लिखा है, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को सरकार के इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। इसके बाद यूपी सरकार की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ औपचारिक अपील दाखिल किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

गौरतलब है कि मेधा रूपम के खिलाफ फैसला देने वाले जजों में एक जस्टिस अतुल श्रीधरन वही हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से राहत न मिलने के बावजूद राज्य सरकार ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए औपचारिक अभियोजन स्वीकृति देने से मना कर दिया है। संबंधित जज का तबादला हो ही गया है और उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट आना पड़ा उसकी भी कहानी है। जज से संबंधित अन्य मामलों में पूर्व उपराष्ट्रपति की नौकरी जा चुकी है।

इसके चलते जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस एसएन यादव से जुड़े मामलों में अंतिम महाभियोग या आपराधिक जांच का बिंदु तार्किक परिणति तक नहीं पहुंच सका। सीबीआई के जज बृजगोपाल हरकिशन लोया की संदिग्ध मौत की जांच नहीं होने देने के लिए किए गए राजनीतिक उपायों पर तो किताब बन सकती है। दूसरी ओर, इस सरकार ने अपनी जरूरत के अनुकूल कार्रवाई के लिए कानून बनाए हैं, संशोधन किया है। जहां तक लोकसेवकों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति का सवाल है संजीव भट्ट से लेकर अरविन्द केजरीवाल और हेमंत जैसे मुख्यमंत्रियों के उदाहरण हैं। वहीं, उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की खबर नहीं है जिनकी वजह से सोनम वांगचुक को छह महीने जेल में रहना पड़ा।

ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार सरकार मेधा रूपम को बचाने की कोशिश क्यों करेगी समझना मुश्किल नहीं है। क्या-क्या करेगी वह और चाहे जो हो, खबर तो होगी ही। सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती और उसका असर क्या होगा – भविष्य बताएगा लेकिन आज खबर ही नहीं होना अपनी जगह महत्वपूर्ण और दिलचस्प है। कहने की जरूरत नहीं है कि मोदी सरकार ने न सिर्फ राजनीति बदली है, पत्रकारिता और प्रचार का तरीका भी बदला है। अनुकूल खबरों के लिए सरकारी पैसों से प्रचार का रिकार्ड बनाने के ही कारण आज कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के 100 दिन पूरे होने पर दिल्ली के अखबारों में पहले पन्ने पर पूरा विज्ञापन है। ज्यादातर मीडिया संस्थान जब आंख बंद कर भाजपा का समर्थन कर रहे हैं तो उन्हें खरीदने की कोशिश सरकारी पैसे से ही हो सकती है।

आज एक विशेष पुछल्ला

आज जिन अखबारों में छात्र को धमकाने के लिए नोटिस भेजने पर सीजेआई की नाराजगी पहले पन्ने की खबर नहीं है वे हैं : दैनिक भास्कर, नवोदय टाइम्स और दि एशियन एज। इन तीनों अखबारों के पहले पन्ने की खबरों के कुछ शीर्षक से आप समझ सकते हैं कि इसे क्यों छोड़ा गया होगा या यह क्यों छूट गया होगा। 

1) नवोदय टाइम्स

– कच्चा तेल100 डॉलर पार, शेयर बाजार धड़ाम

– भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी श्रीलंका की जमीन : राष्ट्रपति दिसानायके

– वंदेमातरम् पर कांग्रेस की आपत्ति अराजकतावादी सोच : नबीन

– मंत्रिमंडल ने 10783 करोड़ की तीन रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी

– (दिल्ली नगर) निगम ने 34 अवैध निर्माण तोड़े, 17 किए सील

– मलेशिया के जंगलों से 4 हजार किलोमीटर दूर ओडिशा आए ओरंगुटान के 5 बच्चे

– मां के पैर छूकर माफी मांगो।   

2. दैनिक भास्कर

– कश्मीरी पंडित शाम से पहले ही घरों में कैद; दफ्तर नहीं जा रहे हैं

– जम्मू कश्मीर आतंकियों ने फिर भेजी चिट्ठी, कश्मीरी पंडितों ने मांगी सुरक्षा

– पहली बार सीमा पार डिजिटल सेवा आसान करेंगे ब्रिक्स देश

– साझा सिद्धांतों पर अमल हुआ तो भारत को मिल जाएंगे ब्रिक्स के 10 नए बाजार

– 10 अंकों के डिजिपि्न से होगी हर जगह की सटीक पहचान

– भारतीय कंपनी कॉग्निजेंट के अमेरिका में 3510 वीजा रोके

– सत्य निकेतन हादसा : ठेकेदार और पीजी संचालक गिरफ्तार

– पति पत्नी के बीच आप्राकृतिक संबंध अपराध नहीं तो वैवाहिक दुष्कर्म जुर्म कैसे : सुप्रीम कोर्ट

– दावा – सत्ता और वर्चस्व के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं मस्क: कहते हैं, महिलाओं का काम सिर्फ बच्चे पैदान करना। 

3. दि एशियन एज

– दिल्ली में 1200 पीजी का सर्वेक्षण, बड़ी कार्रवाई की शुरुआत 

– रात्रिभोज, परिवार के साथ फोटो लेकिन ‘दिल्ली घोषणा’ पर स्पष्टता नहीं  (दो दिन के ब्रिक्स सम्मेलन के बारे में)

– प्रधानमंत्री के पद पर रहने के 25 साल पूरे होने को भाजपा उनके जन्मदिन पर जन-संपर्क अभियान के रूप में मनाएगी

– पंजाब में पार्टी की जीत के लिए कांग्रेस कैप्टन (अमरिन्दर सिंह) से उम्मीद लगाए है

– अमेरिका ने कहा कि उसने ईरान के पांच तेल टैंकर नष्ट कर दिए; तेहरान ने जोर्डन के आधार पर हमला किया। 

मैंने यहां सिर्फ उन खबरों की चर्चा की है जो एक कॉलम से ज्यादा में हैं। सिंगल कॉलम की चर्चा नहीं है क्योंकि खबर सिंगल कॉलम में भी होती तो मैं बाकी खबरों की चर्चा नहीं करता। आज खबरों की सूची पेश करने का मकसद यह बताना भी है कि आपके अखबार ने इन खबरों को या इनमें से कुछ को छोड़ दिया है और पहले पन्ने पर नहीं रखा है। मेरा मानना है कि सीजेआई की नाराजगी भाजपा की राजनीति पर मुख्य न्यायाधीश की प्रतिक्रिया है। इसका असर देश की राजनीति और भविष्य पर होगा। इसलिए यह सबके जानने लायक खबर है जबकि प्रधानमंत्री के जन्म दिन पर भाजपा क्या करेगी यह भाजपा का मामला है। इसीतरह कांग्रेस पंजाब जीतने के लिए क्या कर रही है वह कांग्रेस और पंजाब की जनता का मामला है।

पहले पन्ने पर ऐसी खबरें होनी चाहिए जिनकी पठनीयता ज्यादा है और सबके काम की हों। जहां तक प्रधानमंत्री के जन्म दिन पर उनकी छवि बनाने या उन्हें महान नेता के रूप में स्थापित करने का मामला है यह पार्टी की जरूरत नहीं है। पार्टी ऐसा कर रही है तो देश भर में दफ्तर बनाने का कर्ज चुका रही होगी और खबर इसपर होनी चाहिए। यह वैसे ही है कि सोनिया गांधी का प्रधानमंत्री बनना तय होने पर भाजपा के विरोध करने का कोई मतलब नहीं था और किया तो मनमोहन सिंह की योग्यता, क्षमता या उम्मीदवारी के बारे में बोलने की जरूरत नहीं थी।

वह विजयी दल (कांग्रेस) का निर्णय था, अंतिम समय में दबाव में लिया गया होगा। लेकिन भाजपा को इससे भी समस्या रही कि वे सोनियां गांधी के निर्देश पर काम करते थे। करते रहे हों या नहीं, भाजपा का मुद्दा नहीं होना चाहिए था और था तो अब मीडिया का मुद्दा होना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी किसके निर्देश पर काम करते हैं या सिर्फ पार्टी ऑफिस बनवाने के लिए ही काम करते हैं। कंप्रोमाइज्ड और एप्सटीन फाइल के बाद ये सब जरूरी खबरें होतीं लेकिन नहीं हैं। (समाप्त)

इससे पहले का हिस्सा, आज के अखबार : मेधा रूपम के मामले में खबर, पकती खबर और बनने वाली खबरों में दिलचस्पी नहीं दिखी

लिंक यह रहा – https://www.bhadas4media.com/medha-rupam-ke-mamle-mein-khabar-pakti-khabar/

लेखक संजय कुमार सिंह से [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।

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