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साहित्य

रेखा पर राणा यशवंत की कविता

Rana Yashwant : रेखा पर कई दफा कविता लिखने की सोची, लेकिन कैनवास इतना बड़ा है कि हर बार रहने दिया। आज कुछ ऐसा हुआ कि बात बनती सी गयी और रेखा रच गयी।

Rana Yashwant : रेखा पर कई दफा कविता लिखने की सोची, लेकिन कैनवास इतना बड़ा है कि हर बार रहने दिया। आज कुछ ऐसा हुआ कि बात बनती सी गयी और रेखा रच गयी।

रेखा

भोर का तारा-
गहरी रात में उतरती संतरी सुबह
कोहरे की नशीली महक
आदि और अंत के बीच खड़ा
दमकता लपकता प्रकाशपुंज.

एक अबूझ पहेली-
अनाम रिश्ता ढोता सिंदूर
दूर तक पसरा अकेलापन
अचानक से टपके कुछ बेनाम आंसू
और नरगिसी हंसी में लिपटे कुछ धूप से सवाल.

एक सरगम –
संदल का लहराता जंगल
दर्द दबाए गुनगुनाता दरिया
नीले आसमान को थपकियां देती रात
उमराव के अंजुमन का अधूरा तराना.

एक अदाकारा-
चांद से बेहतर ज़मीं की तामीर
इश्क को सलाम भेजती नज़र
लौ सी लपकती देह की लहराती कलाइयां
और चूड़ियों के बाज़ार का सबसे चमकदार रंग

एक अफसाना-
बंद दरवाज़ों के बाहर ठहरी राह
तिलिस्म में लिपटे दरो-दीवार
महफिलों में अदब से झुकती जवां सुरीली रात
और दूर आसमान में भटकते चांद का अमिताभ.

इंडिया न्यूज चैनल के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत के फेसबुक वॉल से.

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1 Comment

1 Comment

  1. umesh shukla

    October 15, 2014 at 11:26 am

    bahut sundar rachana.

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