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भाजपा शासित गोवा में हिंदी में बात करने पर पिटे पत्रकार ने सुबूत के तौर पर घटना की रिकार्डिंग पेश की

यह राष्ट्रीय शर्म की खबर है. जो भाजपा हिंदी भाषा को लेकर जाने क्या क्या दावे करती फिरती है, उसी के राज में हिंदी भाषा में बात करने पर एक पत्रकार पीट दिया गया. जी हां. वाकया पणजी का है. गोवा में यह शर्मनाक वाकया पत्रकार मुकेश कुमार के साथ हुआ. गोवा के एक स्थानीय चैनल में काम करने वाले मुकेश कुमार को राजभाषा हिंदी में बात करना महंगा पड़ गया. हिंदी में बात करने पर गोवा पुलिस ने उनके साथ मारपीट की.

यह राष्ट्रीय शर्म की खबर है. जो भाजपा हिंदी भाषा को लेकर जाने क्या क्या दावे करती फिरती है, उसी के राज में हिंदी भाषा में बात करने पर एक पत्रकार पीट दिया गया. जी हां. वाकया पणजी का है. गोवा में यह शर्मनाक वाकया पत्रकार मुकेश कुमार के साथ हुआ. गोवा के एक स्थानीय चैनल में काम करने वाले मुकेश कुमार को राजभाषा हिंदी में बात करना महंगा पड़ गया. हिंदी में बात करने पर गोवा पुलिस ने उनके साथ मारपीट की.

मुकेश कुमार ने अपने साथ हुई इस घटना की रिकॉर्डिंग भी की है. पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि इंस्पेक्टर पीके वस्त और सब-इंस्पेक्टर विक्रम नाइक ने हिंदी में बात करने की वजह से उन्हें मारा. मुकेश ने बताया कि शनिवार रात को वह शहर के माला इलाके में मोबाइल पर अपनी पत्नी से हिंदी में बात कर रहे थे. इतने में 4-5 लोग वहां आकर उनके साथ धक्का-मुक्की करने लगे. इस पर उन्होंने पुलिस को फोन किया. मुकेश के मुताबिक पुलिस आरोपियों के साथ उन्हें भी थाने ले आई.

उन्होंने बताया कि पुलिस आरोपियों से बेहद नरमी से बात कर रही थी जबकि उन्हें प्रताड़ित कर रही थी. उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान ही इंस्पेक्टर ने उन्हें थप्पड़ मार दिया. मुकेश का आरोप है कि इस बारे में शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने एफआइआर दर्ज नहीं की, जबकि उन्होंने सुबूत के तौर पर विडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को मुहैया करा दी है. पणजी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर राजेंद्र प्रभुदेसाई ने शिकायत मिलने की बात कबूली है. उन्होंने बताया कि आगे की कार्रवाई के लिए शिकायत नॉर्दन गोवा के एसपी के पास भेजी गई है.

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