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इसे अखबारों की नालायकी मानें या अंकिव बसोया की ताकत?

आप पढ़ चुके हैं कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समर्थन से इसी साल सितंबर के मध्य में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के अध्यक्ष अंकिव बसोया की फर्जी डिग्री के मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई तो अलग थी ही अखबारों की रिपोर्टिंग भी अलग रही। मजबूरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बसोया की सदस्यता निलंबित की और उससे इस्तीफा देने को कहा। पर दावा ऐसा किया जैसे यही आदर्श व्यवहार हो और “जांच होने तक” उसे अभाविप की गतिविधियों से अलग रहने के लिए कहा गया है। जबकि सच्चाई यह थी कि उसका प्रमाणपत्र फर्जी होने की पुष्टि हो चुकी थी सिर्फ औपचारिकता रह गई थी (यह सबको पता था) और 20 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में तारीख थी तो कोई प्रतिकूल फैसला ही आना था। इससे बचने के लिए की गई कार्रवाई को अभाविप ने तो आदर्श कार्रवाई के रूप में पेश किया ही ज्यादातर अखबारों ने लगभग वैसे ही छाप दिया।

आज हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में सूचना के साथ (मेट्रो पन्ने पर) खबर छापी है जो कल नहीं छपी थी। पांच कॉलम में छपी खबर के शीर्षक का अनुवाद कुछ इस तरह होगा, “दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस्तीफा देने से एक दिन पहले ही बसोया का दाखिला रद्द कर दिया था”। दो कॉलम में उपशीर्षक है, “विवाद : डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिष्ट स्टडीज को 13 नवंबर को इस बात की पक्की सूचना मिल गई थी कि डूसू के पूर्व प्रेसिडेंट की डिग्री फर्जी थी।” यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यह सूचना भी सार्वजनिक थी कि 12 की शाम डिग्री फर्जी होने की पुष्टि होनी थी। दिल्ली विश्वविद्यालय ने दिल्ली हाईकोर्ट में 12 तारीख को यह बात कही थी और इसी आधार पर अदालत ने 20 नवंबर की तारीख रखी थी औऱ यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी भी थी। इसके बावजूद कल ज्यादातर अखबारों में इसका उल्लेख नहीं था और खबर ऐसे छपी थी जैसे इस्तीफा देना और देने के लिए कहना कोई महान कार्य हो।

दैनिक भास्कर ने कल इस खबर को लीड बनाया था। आज भी पहले पेज पर है डबल कॉलम में है लेकिन शीर्षक में यह बात इतनी साफ-साफ या प्रमुखता से नहीं लिखी है जितनी है। भास्कर का फ्लैग शीर्षक है, “फर्जी डिग्री मामले में हुई कार्रवाई”। मुख्य शीर्षक है, “डीयू ने अंकिव बसोया का एडमिशन कैंसल किया, पुलिस को लिखा लेटर”। खास बात यह है कि 12 राज्यों में 66 संस्करण वाले इस अखबार ने अपने दिल्ली संस्करण में दिल्ली विश्वविद्यालय के इस महत्वपूर्ण मामले में एजेंसी की खबर छापी है। अब इसे अखबार की चूक कहा जाए या एजेंसी का (नाम नहीं है) आप तय कीजिए। खासकर इस दावे के आलोक में कि, आप पढ़ रहे हैं देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर वन अखबार। अखबार में इस मामले से संबंधित ‘भास्कर न्यूज’ की कुछ खबरें अंदर के पन्ने पर हैं।

यह तो हुआ फॉलो अप, एक ही खबर लगातार दो दिन बोर करेगी इसलिए इसपर आज इतना ही। आज की रिपोर्ट थोड़ी देर में।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। : [email protected]

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1 Comment

1 Comment

  1. rajeev bhrigu

    November 17, 2018 at 12:34 pm

    प्रिय संजय जी,
    अगर भास्कर हर रोज पढ़ते हैं तो आज दोबारा अखबार उठाकर पढ़िए। क्या आपने आज तक भास्कर में किसी एजेंसी का नाम पढ़ा है। कभी मिले तो मुझे भी बताइएगा।

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