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अजीत डोभाल के बेटे ने कारवां पत्रिका, इसके रिपोर्टर और कांग्रेस नेता के खिलाफ मानहानि का केस किया, देखें वीडियो

कारवां पत्रिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल की टैक्स हेवन देशों में कंपनियां खोलने से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसे लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उन देशों से आए एफडीआई पर सवाल उठाए थे. इसके बाद अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल ने कारवां पत्रिका और जयराम रमेश के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस किया है.

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल मंगलवार को इस मामले में सुनवाई करेंगे. जयराम रमेश और कारवां पत्रिका के अलावा इस पत्रिका के रिपोर्टर कौशल श्रॉफ को भी मानहानि केस में आरोपी बनाया गया है. कारवां पत्रिका की वेबसाइट पर प्रकाशित कौशल श्रॉफ की इस रिपोर्ट में बताया गया था कि ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से प्राप्‍त व्यापार दस्तावेजों से पता चला है कि विवेक डोभाल केमैन आइलैंड में हेज फंड (निवेश निधि) चलाते हैं. यह हेज फंड 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी की घोषणा के महज 13 दिन बाद पंजीकृत किया गया था. केमैन आइलैंड टैक्स हेवन के रूप में जाना जाता है.

इस प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की टिप्पणी यूं है…

मानहानि का मामला तो कोर्ट देखेगी खबर पर मेरा कहना है कि जयराम रमेश ने मांग की थी कि भारतीय रिजर्व बैंक अजीत डोभाल की उस सिफारिश को पूरी करे जिसमें उन्होंने टैक्स हैवन वाली कंपनियों पर सख्ती करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अब जब कारवां की यह रिपोर्ट आई है तो रिजर्व बैंक को एफडीआई में एक साल में आए 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा की डीटेल सार्वजनिक करना चाहिए और रिजर्व बैंक में एस गुरुमूर्ति हैं जो उस सिफारिश पर दूसरे हस्ताक्षरकर्ता हैं। इसलिए जयराम रमेश को लपेटना या तो राजनीति है या कारवां की रिपोर्ट पर बोलने वालों को डराने की कोशिश। यह चोर की दाढ़ी में तिनका भी हो सकता है। विकीपीडिया के मुताबिक अजीत डोवाल ने 2009 और 2011 में, “इंडियन ब्लैक मनी अब्रोड इन सीक्रेट बैंक्स एंड टैक्स हैवेन्स” पर रिपोर्ट लिखी है। उनके बेटे पर टैक्स हैवेन में फर्म होने का आरोप है। क्या नैतिकता का तकाजा नहीं है कि वे खुद इस पर बोलें। अगर वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नहीं होते तो अलग बात थी। क्या रिजर्व बैंक के डायरेक्टर बनाए गए एस गुरुमूर्ति को इसपर नहीं बोलना चाहिए। क्या एएनआई को इसपर खबरें नहीं करनी चाहिए? क्या एडिटर्स गिल्ड को बताना पड़ेगा कि एएनआई कौन सी खबरें कर सकता है। या यह संपादकीय स्वतंत्रता का मामला है। विकीपीडिया पर अजीत डोभाल का पन्ना खोलिए। संदर्भों में 22 नंबर पर “इंडियन ब्लैक मनी अब्रोड इन सीक्रेट बैंक्स एंड टैक्स हैवेन्स” पर अजीत डोभाल और एस गुरुमूर्ति की रिपोर्ट की पीडीएफ कॉपी है। वहीं से डाउनलोड कर सकते हैं। फिर देखिए अजीत डोभाल के बेटे ने क्या केस किया है और क्या मानहानि का मामला है। वैसे, रिजर्व बैंक को नाम उजागर करने में क्या दिक्कत हो सकती है। सरकार इस बारे में क्यों नहीं बताती? पता है, वित्त मंत्री छुट्टी पर हैं। ये कैसी विडंबना है कि प्रधानमंत्री छुट्टी नहीं लेते। वित्त मंत्री बीमार हैं और एमजे अकबर इस्तीफा देने के बाद भी प्रवासी भारतीयों के बीच बांटे जाने वाले बुकलेट के कवर पर मुस्कुरा रहे हैं। ईमानदारी और पारदर्शिता का भर्ता बनाना इसी को कहते हैं। चुनाव से पहले केमैन आईलैंड की खबरों पर रोक लग जाए और रविशंकर जी के शब्दों में एक छक्का और हो जाएगा।

-Sanjay Kumar Singh

पूरे प्रकरण को जानने-समझने के लिए इसे भी पढ़ें….

कैरवां मैग्जीन का खुलासा- डोभाल के बेटे की कंपनी टैक्स हेवन में!

द कारवां की स्टोरी ने अजित डोभाल के राष्ट्रवाद को नंगा कर दिया है!

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2 Comments

2 Comments

  1. Ashok jain

    January 21, 2019 at 2:44 pm

    मोदी समर्थक जितने भी भ्रष्टाचार कालाधन वाले लोग हैं वह किसी भी रिपोर्ट पर सबसे पहले करोड़ों रुपए की मानहानि का खेल खेलते हैं ताकि दूसरे कोई लोग उस पार सवाल ना कर सके यह मानहानि के मुकदमे डराने धमकाने के लिए ही होते हैं

  2. Dev Busht

    January 21, 2019 at 4:10 pm

    My respected sir you are the heero of the India media,
    I want to, say electronic media our all news chanel are always flesh fake news, but my favorite Media is only BHADAAS FOR MEDIA..

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