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‘सनसनी’ के एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी के पिता पं. गोवर्धन प्रसाद त्रिवेदी का निधन

एबीपी के मशहूर कार्यक्रम ‘सनसनी’ के एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी के पिता पं. गोवर्धन प्रसाद त्रिवेदी का 25 फरवरी को निधन हो गया। उनके त्रयोदशी कार्यक्रम में परिवार से संबंधित लोगों के अलावा मीडिया और फिल्म जगत की भी तमाम हस्तियां पहुंची। शाजी जमां, राजपाल यादव, संजय जोशी, संतोष भारती, अनुराग दर्शन, संजीव दुबे, मनोज रघुवंशी आदि लोगों ने यहां पहुंच कर श्रीवर्धन जी के पिता जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर स्व. जी. पी. त्रिवेदी जी के जीवन परिचय को भी वहां मौजूद लोगों के सामने रखा गया। 82 वर्ष की उम्र में भी वे नियमित दिनचर्या के साथ अपना जीवन जी रहे थे।

एबीपी के मशहूर कार्यक्रम ‘सनसनी’ के एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी के पिता पं. गोवर्धन प्रसाद त्रिवेदी का 25 फरवरी को निधन हो गया। उनके त्रयोदशी कार्यक्रम में परिवार से संबंधित लोगों के अलावा मीडिया और फिल्म जगत की भी तमाम हस्तियां पहुंची। शाजी जमां, राजपाल यादव, संजय जोशी, संतोष भारती, अनुराग दर्शन, संजीव दुबे, मनोज रघुवंशी आदि लोगों ने यहां पहुंच कर श्रीवर्धन जी के पिता जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर स्व. जी. पी. त्रिवेदी जी के जीवन परिचय को भी वहां मौजूद लोगों के सामने रखा गया। 82 वर्ष की उम्र में भी वे नियमित दिनचर्या के साथ अपना जीवन जी रहे थे।

पेशे से लंबे समय तक एक अध्यापक के रूप में काम करने के बाद वे समाज सेवा से जुड़े। उन्होंने जबलपुर और उसके आस पास के गांवों के आदिवासी बच्चों की शिक्षा दीक्षा का अभियान भी चलाया गया। उनके छात्र आज भी उनसे जुड़े हुए थे और वे उनका सतत मार्गदर्शन कर रहे थे। मूलतः अध्यापक होने से पढ़ने लिखने में उनकी स्वभाविक रुचि थी। वे पत्र पत्रिकाओं के लिए समय समय पर लेखन भी करते रहे हैं। श्रीवर्धन त्रिवेदी ने अपने पिता के निधन को जीवन की अपूर्णीय क्षति बताते हुए कहा है कि वे आज भी अपने पिता के मार्गदर्शन में ही जीवन के निर्णय लिया करते थे। मूलतः एक्टर के रूप में अपने करियर की शुरूआत करने वाले श्रीवर्धन पिछले दस सालों से अधिक समय से सनसनी कार्यक्रम के साथ जुड़े हुए हैं।

एक्टिंग के करियर को छोड़कर क्राइम पत्रकारिता का चेहरा बनने तक के सफर में भी उनके पिता ने अहम भूमिका निभाई। श्रीवर्धन जी के अलावा स्व. जी. पी. त्रिवेदी जी के दो और पुत्र एवं चार बेटियां हैं। सभी अपने करियर और जीवन में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। स्व. जी. पी. त्रिवेदी जी का सपना था देश भऱ के बच्चों के लिए संस्कार और विचारों से परिपूर्ण शिक्षा पहुंचाना। श्रीवर्धन त्रिवेदी अपने पिता के इस सपने को पूरा कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देना चाहते हैं। उन्होंने जल्द ही इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए अपने एनजीओ के तहत एक योजना बनाना तय किया है। स्व. जी. पी. त्रिवेदी जी को श्रद्धांजलि एवं नमन.

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