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सियासत

जमातियों को पकड़वाने पर इनाम घोषित करने वाले हिन्दू युवा वाहिनी के नेता और मां-बहन की कोरोना से मौत

जो बोओगे, वही काटोगे… जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से निपटने की तैयारी में जुटी थी भगवा गैंग घूम घूमकर कोरोना महामारी का इस्लामीकरण करके नफ़रत फैलाने में लगी हुई थी. अस्पताल के बजाय राम मंदिर बनवाने पर जोर कसे हुए थी. लेकिन जब कोरोना ने पकड़ा तो मंदिर काम न आया.

हिन्दू युवा वाहिनी के बस्ती जिला प्रभारी अज्जू हिंदुस्तानी ने 18 अप्रैल 2020 को बयान देकर जमाती और रोहिंग्या पर कोरोना फैलाने का आरोप लगाते हुए. जमातियों को पकड़वाने पर हिन्दू युवा वाहिनी की ओर से 11000₹, का ईनाम घोषित किया था.

कुछ दिन पहले अज्जू हिंदुस्तानी और उनकी बहन कोरोना पॉज़िटिव पाए गए और 30 जुलाई को कोरोना से अज्जू और उनकी बहन दोनो की मौत हो गई थी. सिलसिला यहीं नही रुका और कल कोरोना वायरस से पीड़ित इनकी मां का भी निधन हो गया.

तो कहने का लब्बोलुआब ये कि जो बोया गया है अब उसे काटने का वक्त आ गया है.

पत्रकार सुशील मानव की एफबी वॉल से।


उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हिन्दू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष थे अजय श्रीवास्तव। यह योगी आदित्यनाथ का बनाया संगठन है। अजय को अज्जू हिंदुस्तानी के नाम से जाना जाता था। इन्होंने घोषणा की थी कि जमाती पकड़वाने वाले को हिन्दू युवा वाहिनी 11,000 रुपये ईनाम देगी क्योंकि साजिश के तहत जमाती और रोहिंग्या कोरोना फैला रहे हैं।
साथ ही इन्होंने यज्ञ भी कराए थे और इनको भरोसा था कि इससे कोरोना भाग जाएगा।

जमातियों ने देश में कोरोना फैला दिया, यह बाकायदा केंद्र सरकार द्वारा प्रचारित था, जिसे बड़े कायदे से अंजाम दिया गया था। मुसलमानों के खिलाफ घृणा इस कदर फैलाई गई कि भाजपा के बंगलौर के युवा सांसद ने निहायत बेहूदा ट्वीट किया।

तब्लीगी मामला और देशबन्दी के पहले सरकार ने कोरोना को मजाक में लिया। ढाई महीने में कम से कम 20 लाख लोग भारत आए जो सम्भावित कोरोना कूरियर थे। प्रधानमंत्री ने खुद ट्रम्प के स्वागत में जलसा कराया। लेकिन आरएसएस भाजपा को बीमारी तक को भी साम्प्रदायिक रंग दे देने और दंगा करा देने में महारत है। उसने किया। आखिरकार भारत का उदार कहा जाने वाला कथित तबका भी कहने लगा कि साले जाहिल तब्लीगीयों ने कोरोना फैला दिया।

यह घृणा इस हद तक फैली की संयुक्त अरब अमीरात का राजपरिवार भी इसमें कूद पड़ा और उसने विरोध जताया। फिर सरकार को सफाई देनी पड़ी। लेकिन नफरत इतनी फैल चुकी थी कि खाड़ी देशों में रहने वालों पर बन आई, वो खदेड़े जा रहे हैं। ध्यान रहे कि विदेश में रहने वाले भारतीयों में 70% लोग खाड़ी देशों यानी मुस्लिम कंट्रीज में रोजी रोटी कमाते है।

मेरे पास आंकड़े नहीं हैं कि कोरोना संक्रमित कितने लोग हिन्दू हैं कितने मुस्लिम हैं। लेकिन यह करीब सभी लोगों ने सुना होगा कि “तब्लीगी ने कोरोना फैलाया। इंदौर में मुस्लिमों ने कोरोना फैलाया। तब्लीगी बिरयानी खाने को मांगते हैं। डॉक्टरों नर्सों को परेशान करते हैं। अश्लील इशारे करते हैं।”

बीमार पड़ने वालों के नाम सुनकर अब नहीं लगता कि कोरोना मुस्लिमो में ज्यादा फैला है। तमाम हिंदूवादी इसलिए भी खुश थे कि सरकार के मुताबिक यह हाई इन्फेक्टेबल डिजीज है और मीयां साफ हो जाएंगे, क्योंकि जमाती अपने समाज में खूब कोरोना फैला देंगे। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। भाजपा के हिन्दू नेता कोरोना लेकर अस्पताल जा रहे हैं।

अज्जू हिंदुस्तानी की कोरोना से मौत हो गई। कुछ दिन बाद उनकी बहन मर गई। उसके बाद उनकी माँ कोरोना से मर गई। परिवार के और लोग भी कोरोना से संक्रमित है। अज्जू अच्छे इंसान थे, मेरे एक मित्र के मित्र थे। उनके दिमाग में मुस्लिमों को लेकर जहर जरूर भरा हुआ था।

कम से कम अब से मॉन लीजिए कि कोरोना बीमारी है। इसे कुछ सौ जमाती ही नहीं, हर रोज 5 फ्लाइट से चीन, 2 फ्लाइट से इटली आने जाने वाले लेकर आ रहे थे और वो हिन्दू थे। हालांकि भाजपा अब हिन्दू मुस्लिम दंगे का नया आइडिया सोच रही होगी और तब्लीगी आप भूल चुके होंगे।

पत्रकार सत्येंद्र पीएस की एफबी वॉल से।


कोरोना की बीमारी मज़ाक़ करने या राजनीति करने के लिये नहीं है । तबलीगी जमात पर ठीकरा फोड़ने वाले जी न्यूज़ समेत तमाम चैनलों के तमाम कर्मचारियों/ पत्रकारों को कोरोना प्रभावित होने पर हाँफते काँपते पाया गया!

अब हिंदू युवा वाहिनी के एक नेता खुद इसके शिकार हुए जो शुरुआती महीनों में जमात के लोगों को गिरफ़्तार करवाने पर ग्यारह हज़ार रुपये के इनाम इकराम बाँट रहे थे । उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के अजय कुमार श्रीवास्तव उर्फ अज़्जू हिंदुस्तानी नामक हिंदू युवा वाहिनी के नेता की माँ बहन और उनका खुद कोरोना की महामारी के चलते निधन हो जाने की खबर आई है।

काश कि वे तबलीगी जमात की जगह बेहतर अस्पताल चलाने पर इनाम रखते!

अज्जू हिंदुस्तानी ने अप्रैल महीने में जमातियों को पकड़वाने वालों को ग्यारह हज़ार रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी।

पत्रकार शीतल पी सिंह की एफबी वॉल से.

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