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गोरखपुर के दो मीडिया हाउसों ने श्रम विभाग के नोटिस का जवाब दिया, दैनिक जागरण कर रहा आनाकानी

: श्रम निरीक्षकों ने किया निरीक्षण, मजीठिया न दिए जाने का हुआ खुलासा : गोरखपुर। आनाकानी काम नहीं आई और अंततः गोरखपुर के दो बडे मीडिया घरानों अमर उजाला और हिंदुस्तान ने श्रम विभाग द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के क्रियान्वयन के संबंध में पांच बिंदुओं पर मांगी गई सूचनाएं दे दी है। दैनिक जागरण में तो श्रम निरीक्षकों ने औचक निरीक्षण कर जरूरी जानकारियां जुटाई। बताया जाता है कि इस दौरान जागरण के कुछ कर्मियों ने प्रबंधन के निर्देशों को धता बताते हुए श्रम निरीक्षकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया और बयान भी दर्ज कराएं। सूत्रों का कहना है कि खुलासा हुआ कि किसी भी संस्थान ने अभी मजीठिया वेजबोर्ड के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। सभी कह रहे हैं कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जब कोई फैसला आएगा तो मुख्यालयों के निर्देश पर अमल किया जाएगा।

: श्रम निरीक्षकों ने किया निरीक्षण, मजीठिया न दिए जाने का हुआ खुलासा : गोरखपुर। आनाकानी काम नहीं आई और अंततः गोरखपुर के दो बडे मीडिया घरानों अमर उजाला और हिंदुस्तान ने श्रम विभाग द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड के क्रियान्वयन के संबंध में पांच बिंदुओं पर मांगी गई सूचनाएं दे दी है। दैनिक जागरण में तो श्रम निरीक्षकों ने औचक निरीक्षण कर जरूरी जानकारियां जुटाई। बताया जाता है कि इस दौरान जागरण के कुछ कर्मियों ने प्रबंधन के निर्देशों को धता बताते हुए श्रम निरीक्षकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया और बयान भी दर्ज कराएं। सूत्रों का कहना है कि खुलासा हुआ कि किसी भी संस्थान ने अभी मजीठिया वेजबोर्ड के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। सभी कह रहे हैं कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जब कोई फैसला आएगा तो मुख्यालयों के निर्देश पर अमल किया जाएगा।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के मई माह में दिए आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार के श्रम विभाग द्वारा नियुक्त निरीक्षकों ने मीडिया संस्थानों की जांच कर पांच बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में चल रहे वाद में प्रस्तुत की जाएगी। इस मामले में श्रम विभाग एक तरह से कोर्ट कमिश्नर की भूमिका में है। मीडिया हाउसों ने पूर्व की भांति कोशिश की थी कि मामला अधिकारी स्तर पर सेटल हो जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश और गोरखपुर जर्नलिस्टस प्रेस के दबाव के चलते उन्होंने मीडिया हाउसों की पेशकश को इंकार कर दिया। श्रम विभाग की नोटिस पर जवाब देने में आनाकानी की गयी लेकिन जब दबाव बढा तो दो मीडिया हाउसों ने मांगी गयी जानकारी दे दी।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उनके जवाब भी टालू ही हैं। संस्थान में काम करने वाले स्ट्रिंगर और अस्थाई कर्मियों की सूची छिपा ली गयी है। इसके अलावा टेक्नो वे व कंचन नाम की कंपनियों से आउटसोर्स दिखाया गया है। उनका मालिक कौन है और स्थानीय स्तर पर उसके काम की देख रेख कौन करता है, इसका पता नहीं चला। बहरहाल श्रम विभाग ने इन दोनों कंपनियों को भी नोटिस किया है। हालांकि लगभग एक पखवारा बीत गया अभी इनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

उधर मीडियाकर्मी अपने बकाया एरियर के लिए प्रपत्र सी भी दाखिल कर रहे हैं। लगभग 25 कर्मियों ने जरिए डाक श्रम अधिकारी के पास आवेदन भेजा है। लब्बोलुआब यह है कि गोरखपुर में मीडिया संस्थानों का झूठ पकडा गया है कि उनके यहां मजीठिया का पालन हो रहा है। हालांकि एक संस्थान ने नौकरी का भय दिखाकर अपने कर्मियों से मजीठिया मिलने के बारे में झूठी स्वीकारोक्ति करा दस्तखत भी ले लिए थे जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। अब यही सूची उक्त संस्थान के गले की हडडी बन गयी है। इस सूची में वे कर्मी भी हैं जिन्हें संस्थान ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

अधिकारियों का कहना है कि मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट और सेलेरी डिटेल के आधार पर आंकलन किया जा रहा है कि उनके वेज मजीठिया के अनुरूप हैं या नहीं। इसी रिपोर्ट को सुप्रीमकोर्ट के लिए प्रेषित किया जाएगा। व्यक्तिगत आवेदनों पर जांच चलती रहेगी। मालूम हो कि गोरखपुर जर्नलिस्टस प्रेस क्लब के अध्यक्ष अशोक चौधरी की अगुआई पत्रकारों की अगुआई में श्रम विभाग को प्रेस क्लब के 310 ऐसे पत्रकारों व गैर पत्रकारों की सूची दी गयी थी जो विभिन्न मीडिया संस्थानों के स्थाई कर्मी हैं और मजीठिया वेज बोर्ड के लाभ से वंचित हैं।

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