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सुलभ श्रीवास्तव की हत्या की खबर पढ़कर मुझे सबसे पहले जगेंद्र सिंह की याद आई!

कृष्ण कांत-

यूपी के पत्रकार जगेंद्र सिंह याद हैं? शुलभ श्रीवास्तव की हत्या की खबर पढ़कर मुझे सबसे पहले जगेंद्र सिंह की याद आई. शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया था. ये महान काम एक कोतवाल ने किया था.

(पहली तस्वीर जगेंद्र सिंह की है, दूसरी सुलभ श्रीवास्तव की.)

बात जून 2015 की है. जगेंद्र ने अपने फेसबुक पर लिखा था कि उनकी जान को अखिलेश सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा से खतरा है. जगेंद्र के इस डर जताने को लेकर सरकार ने कुछ नहीं किया गया. जो किया, मंत्रीजी ने किया. उन्होंने कोतवाल को आदेश दिया. वफादार कोतवाल ने जगेंद्र सिंह को पेट्रोल डालकर जला दिया. जगेंद्र सिंह बयान देकर मर गए.

उस समय इस हत्या के खिलाफ मैंने अपने तमाम पत्रकार साथियों के साथ जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था. मुझे नहीं मालूम कि उस मामले में किसी आरोपी को सजा हुई या नहीं.

पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जलाने से पहले उनपर मंत्री जी की ओर से कई हमले करवाए गए थे. मंत्री जी पहुंचे हुए आदमी थे. उनपर जमीन कब्जाने, अवैध खनन करने, स्मैक-सट्टा कारोबार करने वालों को संरक्षण देने, चकबंदी में हस्तक्षेप करके फर्जी दस्तावेज लगाकर अपने गुर्गों को जमीनें दिलाने जैसे संगीन आरोप थे. पत्रकार जगेंद्र सिंह ने मंत्री जी के इन कारनामो का पर्दाफाश किया, मंत्री जी ने उन्हें निपटा दिया.

एक कानून बनाने वाले और एक कानून के रखवाले ने मिलकर भ्रष्टाचार की रिर्पोटिंग के लिए पत्रकार को जिंदा फूंक दिया था.

तबसे अब तक क्या बदला? प्रतापगढ़ में वही घटना फिर दोहराई गई है. सुलभ श्रीवास्तव ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर अपनी हत्या की आशंका जताई कि शराब माफ़िया के खिलाफ खबर लिखने के कारण उन्हें धमकियां मिल रही हैं. माफिया से उनकी जान को खतरा है. दो दिन से उनका पीछा किया जा रहा था. प्रशासन ने कुछ नहीं किया. सुलभ श्रीवास्तव की संदिग्ध हालत में लाश बरामद हुई है.

पहले पुलिस ने कहा कि एक्सीडेंट हुआ है. पत्रकार की बाइक हैंडपंप व बिजली के पोल से टकराई थी. अब पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है. हो सकता है कि कल को कह दें कि खंभे और हैंडपंप ने मिलकर पत्रकार की हत्या की है. शराब माफिया तो यूपी के संत हैं. यूपी में कुछ भी मुमकिन है!

दोष माफिया और नेता के गठजोड़ का नहीं है. हमारी जनता को भी सच कहने वाले पत्रकार नहीं चाहिए. हमें भगवान राम के नाम पर मूर्ख बनाने वाले और भगवान की जन्मभूमि बेचकर खा जाने वाले ठग बहुत पसंद आते हैं. हमें सच के सिपाहियों से नफरत होती है, हमें हमको लूटने वाले बहुत प्रिय हैं.

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