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‘नेशनल दुनिया’ में बड़े पैमाने पर छंटनी, अखबार बंद होने की चर्चा

शैलेंद्र भदौरिया ने ‘नेशनल दुनिया’ नाम से जो अखबार निकाला था, उसका अंतकाल नजदीक आया दिख रहा है. कई संस्करण पहले ही बंद हो चुके हैं. अब नेशनल एडिशन भी बंद होने की चर्चा है. एनसीआर से करीब तीन दर्जन से ज्यादा मीडियाकर्मियों को निकाले जाने की खबर है. भड़ास के पास आई एक सूचना में कहा गया है: ”officially national duniya newspaper is closed now. when employees demanded salaries of four months, shailendra bhadauria told that all had been f..ked off.”

शैलेंद्र भदौरिया ने ‘नेशनल दुनिया’ नाम से जो अखबार निकाला था, उसका अंतकाल नजदीक आया दिख रहा है. कई संस्करण पहले ही बंद हो चुके हैं. अब नेशनल एडिशन भी बंद होने की चर्चा है. एनसीआर से करीब तीन दर्जन से ज्यादा मीडियाकर्मियों को निकाले जाने की खबर है. भड़ास के पास आई एक सूचना में कहा गया है: ”officially national duniya newspaper is closed now. when employees demanded salaries of four months, shailendra bhadauria told that all had been f..ked off.”

बताया जा रहा है कि गाजियाबाद समेत नोएडा और पूरे एनसआर से तीन दर्जन से ज्यादा लोगों की छंटनी कर दी गई है. नेशनल दुनिया के कई एडिशन बंद किए जाने और बकाया न देने संबंधी कई सारे केस प्रबंधन के खिलाफ चल रहे हैं और कई किस्म की सरकारी जांच भी चल रही है. मेरठ में नेशनल दुनिया पर टैक्सी वालों का लाखों बकाया है. ऑफिस का किराया पिछले 5 महीने से नहीं दिया गया है. यहां के कई मीडियाकर्मी प्रबंधन के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. माना जा रहा है कि नेशनल दुनिया अब अंतिम सांसें ले रहा है.

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