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नेशनल बुक ट्रस्ट का चेयरमैन बनने के बाद भी बलदेव भाई शर्मा नहीं छोड पा रहे हैं अखबार के सम्पादक पद का मोह

नोएडा । नेशनल दुनिया के वरिष्ठ स्थानीय सम्पादक बलदेव भाई शर्मा की कारगुजारियों के कारण इस समय अखबार की स्थिति पहले से ज्यादा खराब हो गयी है। इसके पीछे सबसे बडा कारण यह माना जा रहा है कि बलदेव भाई शर्मा जबसे नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन बने हैं, वह अखबार को बिल्कुल भी समय नहीं दे रहे हैं। अखबार के सम्पादक पद का मोह भी उन्हें इस पद को नहीं छोडने दे रहा है। अखबार के नाम पर उन्हें टीवी पर होने वाली डिबेट के लिए शेखी बघारने और भाजपा सरकार की बटरिंग करने का मौका मिल जाता है।

नोएडा । नेशनल दुनिया के वरिष्ठ स्थानीय सम्पादक बलदेव भाई शर्मा की कारगुजारियों के कारण इस समय अखबार की स्थिति पहले से ज्यादा खराब हो गयी है। इसके पीछे सबसे बडा कारण यह माना जा रहा है कि बलदेव भाई शर्मा जबसे नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन बने हैं, वह अखबार को बिल्कुल भी समय नहीं दे रहे हैं। अखबार के सम्पादक पद का मोह भी उन्हें इस पद को नहीं छोडने दे रहा है। अखबार के नाम पर उन्हें टीवी पर होने वाली डिबेट के लिए शेखी बघारने और भाजपा सरकार की बटरिंग करने का मौका मिल जाता है।

सूत्रों की मानें तो बलदेव भाई और उनके चाटुकारों ने अखबार के मालिक को राज्यसभा सदस्य बनवाने का लालच दिया हुआ है, जिसके कारण अखबार के मालिक ने बलदेव भाई की कारगुजारियों के प्रति अपनी आंखे फेर ली हैं। जिस समय बलदेव नेशनल दुनिया में धोती की लांग टांग कर आये थे, उस समय इस अखबार में इनकी हैसियत एक साधारण कर्मी की थी। धीरे-धीरे इन्होंने अखबार के मालिक शैलेंद्र भदौरिया की महत्वाकांक्षा का आकलन किया। इसके बाद बलदेव भाई ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर तो देखते ही देखते नेशनल दुनिया के सम्पादकीय विभाग के सभी योद्धाओं को बर्फ में लगा दिया और अखबार के वरिष्ठ स्थानीय सम्पादक के पद पर विराजमान हो गये।

नेशनल दुनिया में नम्बर वन की पोजीशन लेने के बाद इन महाशय को टीवी वाले भी डिबेट आदि में बुलाने लगे। टीवी पर इन्होंने भाजपा और सरकार का इतना गुणगान किया कि मोदी सरकार ने इन्हें नेशनल बुक ट्रस्ट का चेयरमैन बना दिया। जबसे इस पद पर बलदेव भाई तैनात हुए हैं, नेशनल दुनिया के नोएडा कार्यालय में इनकी उपस्थिति न के बराबर है। इस कारण अखबार की हालत पहले से ज्यादा खराब हो गयी। अखबार का सम्पादकीय भी कोई और लिखता है। शेखी बघारने के लिए बलदेव अक्सर कहते हैं कि मैं तो सम्पादक पद से मुक्त होना चाहता हूं, लेकिन भदौरिया का प्यार उन्हें इस अखबार को नहीं छोड़ने देता। बलदेव भाई इस समय दो पदों के उत्तरदायित्तव को निभा रहे हैं, लेकिन किसी भी पद पर अभी खरे नहीं उतरे हैं। बलदेव भाई एक समय लोकसभा के सीईओ व संपादक पद का इंटरव्यू भी दे चुके हैं जिसमें वे सफल नहीं हो पाए थे।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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