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शेयर मार्केट से पैसा कैसे कमाएं!

यशवंत सिंह-

आज कुछ ज्ञान देने के मूड में हूं. बहुत दिनों से पक रहा था अंदर. अब रेडी हो गया है. ज्ञान शेयर मार्केट से संबंधित है.

बहुत सारी बुरी चीजें खुलेआम और कानूनी तरीके से संचालित की जाती हैं. जैसे शराब की दुकानें. शराब दिल दिमाग शरीर सेहत सबके लिए नुकसान की चीज है. 99 फीसदी लोग मजे के लिए शुरुआत करते हैं और बाद में लती हो जाते हैं. पैसा वक्त परिवार करियर सब चौपट कर लेते हैं. पर सरकारें शराब की दुकानें जबर्दस्त तरीके से खोलती जाती हैं. उन्हें भरपूर रेवेन्यू मिलता है. आदमी मरे जिए उनकी बला से. तो अंतत: सही चीज यही है कि शराब की दुकान न ही खुले… और अगर सरकारें शराब बेच रही हैं तो फिर सबसे ज्यादा जरूरी है कि किसी कीमत पर उसे खरीदा न जाए और हाथ न लगाया जाए.

शेयर मार्केट भी एक ऐसी ही बुराई है. ये भी एक एडिक्शन है. ये लती बनाता है. आपको आता जाता कुछ नहीं लेकिन दिन भर शेयरों के खरीद बेच के काम में लगे रहते हैं क्योंकि अब सब कुछ बेहद आसान है. स्मार्ट फोन में उंगली ही तो हिलाना है. शेयर खरीद गए. शेयर बिक गए. प्राफिट हुआ या न हुआ, आपने अच्छा खासा टैक्स सरकार और ब्रोकर को दे दिया.

ये एक खतरनाक एडिक्शन है. शेयर मार्केट के 99 फीसदी खिलाड़ी लुटने के लिए होते हैं. जैसे लोग लाटरी खेलते थे पहले, उसी तरह अब शेयर मार्केट खेला जाता है. सारा पैसा खत्म हो जाएगा तो भी इसका लती नया पैसा कहीं से मैनेज कर लाएगा और फिर खेलने में जुट जाएगा… वो हर बार एक नए तरीके से जीतने के लिए दांव लगाता है लेकिन हार जाता है… वो सिर्फ पैसा ही नहीं हारता, सुख चैन नींद सेहत शांति सब कुछ हारता है… चला था झुनझुनवाला बनने, बन गया झुनझुना…

इसलिए जो बिलकुल नहीं जानते शेयर मार्केट की दुनिया को, इस गणित को, वो इधर रुख न करें. सिर्फ शौकिया या खेल खेल में मजे लेने के लिए भी लोग आते हैं और फिर लगातार हारते जाते हैं और हारी हुई रकम को निकालने के चक्कर में उससे ज्यादा हार जाते हैं….

आज ज्ञान देने का ये जो टापिक चुना हूं उसके पीछे एक बड़ी वजह उन ढेरों संदेशों का मिलना है जिसमें लोगों ने पैसे बनाने के लिए शेयर मार्केट की टिप्स मांगे हैं… गाइ़डेंस डिमांड की है…

तो कहना चाहूंगा कि भई मैं कोई ट्रेंड या जानकार नहीं हूं. घर फूंक तमाशा देखने का आदी रहा हूं इसलिए हर उस कर्म कुकर्म को करने की कोशिश करता हूं जो अब तक नहीं किया हूं… इसी सिलसिले में शेयर मार्केट की तरफ भी आया… चार पांच महीनों में कुछ चीजें समझ में आ गईं…

जैसे ये कि इंट्रा डे नहीं खेलना चाहिए. ये न सिर्फ आपका पूरा डे टाइम का वक्त खाता है बल्कि लगातार मोबाइल लैपटाप पर अटेंशन देकर बैठने देखने से आंखें भी खराब होने लगती हैं…. इसके अलावा आपका जो मूल काम है, वो अच्छा खासा प्रभावित होता है… तो इन्हीं वजहों से मैंने इंट्राडे से तौबा कर लिया….

उन कुछ शेयरों में निवेश किया हूं जो नए हैं और बॉटम पर हैं. ये अक्सर भागते गिरते रहते हैं. पर इन पर यकीन ये रहता है कि मैंने एकदम बाटम से खरीदा है इसलिए ये कितना भी गिरेंगे तो बाटम पर न पहुंचेंगे या बाटम पर पहुंच भी गए तो मेरा कोई नुकसान न करेंगे… तो इस भाव से निवेश किया हूं… कुछ अन्य शेयरों में, जो कई महीनों से लगातार गिरे और करेक्शन मोड खत्म कर लगातार मजबूत बेस बनाए हुए हैं, उनमें पैसे लगाकर दो चार दस दिन के लिए छोड़ देता हूं. जब भी वे राकेट बनते हैं, उनका ब्रेकआउट होता है, प्राफिट बुक कर निकल लेता हूं.

पैसे हैं तो शेयर मार्केट में कुछ न कुछ खरीदता बेचता रहूंगा, बिला वजह, ये घटिया तरीका है. कितना अच्छा हो कि आपके पास पैसे हों और आप कई दिन से कुछ न खरीद रहे हों और अचानक एक दिन दिखा कि एक शेयर बीस से तीस फीसदी गिर गया, फौरन लपक कर एकदम बाटम से उठा लिया. याद करिए दैनिक भास्कर पर छापा. डीबी कार्प का शेयर धड़ाम हो गया था. रिलांयस अमेजन विवाद में कोर्ट के फैसले के बाद एफरिटेल का शेयर बहुत गिर गया था एक ही दिन. तो ऐसे कई मौके आते हैं जब शेयर बेहिसाब गिरते हैं, तो वो एक समझदार निवेशक के लिए निवेश का मौका होता है.

मूर्ख या भेड़चाल या आम जनता की मानसिकता भागते हुए शेयरों में पैसा लगाने की होती है. जो शेयर रोज रोज भाग रहा हो उसी में लगाकर पैसा कमाने की मानसिकता बहुत कामन है. पर ये खतरनाक और घटिया तरीका है. मेरे एक मित्र ने राकेट बने आईआरसीटीसी के शेयर खरीदने के लिए मुझसे सुझाव मांगा. मैंने कहा ये सही समय नहीं है. बहुत भाग रहा रोज रोज. वे अगले दिन मुझे गुस्से से बताए कि आज पूरे पांच सौ अंक उपर गया है आईआरसीटीसी, अगर मैं खरीद लिया होता तो काफी फायदा हुआ होता, आपने नुकसान करा दिया. मैंने उनसे कहा कि मेरा सिद्धांत है भागते घोड़ों के साथ मत भागो, बाकी आपकी मर्जी, आप खरीद लिए होते, अगर इतनी ही प्रबल इच्छा थी तो.

दो दिन बाद यानि बीते कल और आज में आईआरसीटीसी पंद्रह से बीस परसेंट गिरा पड़ा है. कोई बायर नहीं मिल रहा है. जो लोग दो तीन दिन पहले लिए होंगे उनका तो पैसा बर्बाद हो गया. रिकवर करने में लंबा वक्त लग सकता है.

जो लोग भारी मात्रा में शेयर में पैसे लगाए हैं उनसे कहना चाहूंगा कि मोदी राज में शेयर मार्केट का धंधा अब तक ठीक ठाक चला, बहुत बड़ा क्रैश नहीं आया, लेकिन इसकी आशंका व्यक्ति की जाने लगी है. आर्थिक मोर्चे पर हर ओर निराशा के बादल हैं. कभी भी पलीता लग सकता है और आल टाइम हाई शेयर बाजार कई कई दिनों तक लगातार गिरता रह सकता है. इसलिए दिवाली तक अपने अपने पैसे शेयर बाजार से निकाल सकते हैं. उतना ही रखें जितने के जाने से बहुत दर्द न हो. हालांकि एक दूसरा पक्ष ये भी कहता है कि मोदी-शाह कुछ करें न करें, शेयर मार्केट न गिरने देंगे क्योंकि उनके लिए विकास का मतलब है शेयर बाजार के घोड़े को लगातार भगाए रखना…

तो देख लीजिए, आप अपने हिसाब से फैसले लीजिए, जो उचित लगे.

आखिरी बात. मैंने कई कई तरीकों से इस मार्केट के खेल को समझने के बाद आखिरकार ये समझा कि सबसे बड़ा खेल सही शेयर सेलेक्ट करना होता है. उसके बाद उस शेयर को उसके बाटम में खरीदना होता है. जितना गिरता जाए, उतना लेते जाओ ताकि एवरेज सही बना रहे. और फिर इसमें लगाकर साल दो साल के लिए भूल जाएं. बहुत ठीकठाक रिटर्न मिलेगा. ये कौआ बंदर छाप खेल कि रोज रोज लगाओ बेचो, बहुत घटिया और चीप होता है. ये बस एक रोग है, एक एडिक्शन है. इससे मुक्ति ले लेनी चाहिए. मैंने ले लिया है. मेरा काम अब सही शेयर में सही रेट पर पैसे लगाकर भूल जाना हो गया है. दस से बीस परसेंट तक लाभ मिलने के पहले बेचने की सोचना ही नहीं है.

बाकी बातें बाद में. कोई सवाल हो तो जरूर पूछें. [email protected] पर मेल करें.

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1 Comment

1 Comment

  1. sanjeev kumar

    October 23, 2021 at 1:34 pm

    IPO ka fanda bhi batayen

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