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सियासत

इस सरकार के औजार के तौर पर दलाल मीडिया भी अब बहुत कारगर नहीं रहा!

ओमप्रकाश-

इस सरकार के औजार के तौर पर दलाल मीडिया भी अब बहुत कारगर नहीं रहा, इसलिए कल बेरोजगारों के आंदोलन पर खुद रेलवे मंत्री को मुलायम अंदाज में सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा। ऐसा इस सरकार में संभवतः पहली बार हुआ क्योंकि अब तक मंत्री आते थे तो सीधे हमला करने, देशद्रोही करार देने के लिए।

गोदी मीडिया इतना अधिक दुष्प्रचार कर चुका है कि विरोधियों को ही नहीं हिमायतियों को भी मालूम पड़ गया है कि झूठ ही बोला जा रहा है। कट्टर हिमायती होने के लिए भी बहुत से लोगों को झूठ पूरा खालिस झूठ नहीं लगना चाहिए। धैर्यपूर्वक तार्किक तथ्यात्मक एवं अथक प्रयास से शासक वर्ग के फासिस्ट दुष्प्रचार की काट मुमकिन है।


पटना से प्रयागराज तक कूटे गए छात्र 80 में हैं कि 20 में?

विश्व दीपक-

सावरकर, सुभाष और हिंदुत्व का मुद्दा हमारा आपका नहीं है. इसे एनजीओ वालों के लिए, टीवी वालों के लिए और किताब कुंजी बेचने वालों के लिए छोड़ दीजिए. अस्मितावादी बहस (identity issues) की पिच पर खेलेंगे तो पीटे जाएंगे.

यह एक ट्रैप है. इसमें उन लोगों को तो कतई नहीं फंसना चाहिए जो वास्तव में कोई राजनीतिक परिवर्तन देखना/करना चाहते हैं.

निगाह घुमाइए और लिस्ट बनाइए. अस्मितावादी बहसों के ड्राइवर, कंडक्टर में से ज्यादातर फ्रॉड निकलेंगे. ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यह ऐसा खेल है जिसे बिना किसी मेहनत के, बिना किसी खतरे के आसानी से खेला जा सकता. प्लस, इसमें लाभ ही लाभ है.

हमारा, आपका या उन सबका, जो सच सत्ता-रेखा के दूसरी ओर मौजूद हैं उनका मुद्दा इस वीडियो में कैद है.

बिहार में छात्रों ने प्रदर्शन किया तो पुलिस ने गोले बरसाए. छात्रों ने भी गुस्से में ट्रेन फूंक दी. उधर, प्रयागराज में भी पुलिस ने लॉज घुसकर पीटा है.

दोनों राज्यों में “डबल इंजन” की सरकार है. युवाओं ने अब उस इंजन में ही आग लगा दी.

बता रहा हूं हताशा धीरे-धीरे संघनित हो रही है. बेरोज़गारी बहुत बड़ा मुद्दा है. लोगों के पास पैसा बिल्कुल नहीं हैं. काम नहीं है. जिन्हें कम से कम 25 हज़ार मिलना चाहिए वो सब किसी तरह से 10 हज़ार में काम चला रहे. मोबाइल में घुसे रहने के बाद भी युवाओं का वक्त नहीं बीत रहा.

किसानों में भी जबरदस्त हताशा और आक्रोश है. इस ठंड में उसे रात भर जानवर हांकना पड़ता है लेकिन वह आक्रोश कोई राजनीतिक रूप नहीं ले पा रहा. बीच में श्रीरामजी और हिंदुत्व की फांस आ जाती है बार-बार. इस फांस को मिटाइए. बाकी काम आपने आप हो जाएगा.

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