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उत्तर प्रदेश

श्रीकांत त्यागी की मनमानी तीन साल से चल रही थी, बात बढ़ी तो सारा दोष पुलिस के मत्थे मढ़ने की साज़िश रच दी गई! जानिए पूरा खेल

संजय कुमार सिंह-

कौन है श्रीकांत त्यागी का संरक्षक?  

वैसे तो नोएडा के ग्रैंड ओमैक्स में श्रीकांत त्यागी की मनमानी तीन साल से चल रही थी और मामला सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं था पर जब बात बढ़ी तो सारा मामला पुलिस के मत्थे मढ़ दिया गया है। और तो और नोएडा के सांसद जो पढ़े-लिखे डॉक्टर भी हैं गाली देते हुए रिकार्ड हुए हैं। उसे पुलिस सुरक्षा मिली हुई थी और वह पकड़ा नहीं जा सका है इसलिए लोगों का नाराजगी पुलिस से है। दूसरी तरफ, फाइबर की छत हटाने के लिए तीन साल बाद बुलडोजर भेजकर सरकार के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है। घुमा-फिर कर नोएडा पुलिस को बलि का बकरा बना दिया गया है जबकि नेता या अपराधी को संरक्षण ऊपर से मिलता है और पुलिस के लिए काम करना मुश्किल बना दिया जाता है। दूसरी ओर, लोग योगी जी का नाम सूरज-चंदा के साथ जोड़ने लगे हैं।

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई शुरू से ठीक रही है और भले अपराधी को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है पर उसकी गाड़ियां जब्त करने, पत्नी को चेतावनी देने जैसी कार्रवाई की गई है। यह तो कार्यकर्ताओं की हिम्मत है और संरक्षण की उम्मीद कि वे शिकायतकर्ता महिला का पता पूछने चले गए। कार्यर्ताओं को सिर पर चढ़ा लिया जाएगा तो वे यही करेंगे और इसका अनुमान नेताओं को रखना था, पुलिस को नहीं। फिर भी नोएडा के सांसद सार्वजनिक रूप से शर्मिन्दगी महसूस कर रहे थे तो अपने कार्यकर्ताओं पर नहीं, पुलिस से नाराज दिखे। सच यह है कि पुलिस के पास उससे संबंधित मामला आया तो पुलिस ने कार्रवाई की। पहले का मामला ओमैक्स के आरडब्ल्यूए, नोएडा अथॉरिटी से संबंधित रहा होगा। फिर भी अब लोग आह, वाह कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को कैसे सिर चढ़ाया गया है उसपर अलग पोस्ट लिख चुका हूं।

ग्रैंड ओमैक्स मामले में अगर भाजपा कार्कर्ताओं ने हिम्मत दिखाई तो यह उनका मामला है हालांकि, पुलिस ने सात लोगों को गिरप्तार कर लिया है। कम से कम एक की तस्वीर तो शर्मा जी के साथ है ही। पुलिस की लापरवाही तब होती जब कोई पकड़ा नहीं जाता। फिर भी थानाध्यक्ष को निलंबित करके जांच की जा रही है। यही नहीं, पुलिस ने श्रीकांत त्यागी पर 25,000 रुपए का ईनाम घोषित कर दिया है। कुर्की के लिए आवश्यक प्रक्रिया चल ही रही है। नियमानुसार जो हो सकता था वह हो रहा है बुलडोजर भी चल ही गया। ऐसे में सांसद की शिकायत का कोई मतलब नहीं है और हो भी तो यह करतूत उन्हीं के लोगों का है। अगर ईनाम घोषित होने के बाद भी अपराधी पकड़ा नहीं जा रहा है तो उसका साथ देने वाले आपके कार्यकर्ता भी होंगे ही। कार्यकर्ताओं से कहिए पुलिस को बताएं कि त्यागी कहां है और तब पुलिस कार्रवाई न करे तो शिकायत कीजिए। 

अब मुद्दा यह है कि त्यागी को सरकारी सुरक्षा कैसे मिली। तो वह भी कितनी देर रहस्य रहेगा। इंतजार कीजिए उसका भी खुलासा होगा। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा को मानें तो त्यागी को पुलिस सुरक्षा गाजियाबाद से मिली थी और यह तभी हो सकता है जब कोई एक व्यक्ति नोएडा और गाजियाबाद का अधिकारी रहा हो। हाल में एक महिला अधिकारी ऐसे पदों पर रही हैं और उनके दम खम की भी चर्चा खूब रही है। इस तरह श्रीकांत त्यागी ऐसी हस्ती है जिसके खिलाफ नोएडा प्राधिकरण ने कार्रवाई नहीं की, गाजियाबाद पुलिस ने सुरक्षा दी और आरडबल्यूए वाले डरते रहे, पुलिस में नहीं गए। अब सब सक्रिय हैं तो पुलिस भी सक्रिय है लेकिन बदनाम सिर्फ पुलिस को किया जा रहा है। 

आप जानते हैं कि नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु महेश्वरी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवमानना मामले में पेश नहीं होने पर गैर ज़मानती वारंट जारी किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली। अवमानना के मामलों में क्या है उनपर गए बिना मुद्दा यह है कि जो अवमानना मामले में हाईकोर्ट न जाए और गिरफ्तारी से पहले सुप्रीम कोर्ट से राहत प्राप्त कर ले वह कोई साधारण हस्ती तो होगा नहीं और वही नोएडा अथॉरिटी की सीईओ हैं। ऐसे में शक की सुई उनकी ओर भी है। देखते रहिए मामला दिलचस्प लग रहा है।

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