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सुख-दुख

भोजन पकाते हुए हम सिर्फ़ कोई एक सामान्य सा काम नहीं कर रहे होते हैं, उस वक्त हम….

यशवंत सिंह-

असली आनंद शाकाहार में ही आता है। दही के ये दो आइटम स्वाद और सेहत दोनों पैमाने पर लाजवाब हैं। जिस भोजन के निर्माण में खुद की सक्रिय भागीदारी हो तो वो मुँह में घुलते वक्त आत्मिक सुख देते हैं। जाने क्या आदत है कि आँख खुलते ही फ़्रेश होने के बाद पहला काम कोई एक आइटम अपने हाथ से पकाना होता है। कलरफुल मिक्स वेज पर अपन ने हाथ आज़माया।

भोजन पकाते वक्त अक्सर ये सोच कर सुकून मिलता है कि अगर अपन इंसान की बजाय कोई और जीव होते तो दिन भर क्या करते रहते? जवाब मिलता- भोजन भोजन भोजन! भोजन तलाशते रहते, भोजन खाते रहते, भोजन से भरे पेट को लिए सोते रहते।

तो अपन सही रास्ते पर हैं। भोजन पकाते हुए हम सिर्फ़ कोई एक सामान्य सा काम नहीं कर रहे होते हैं। उस वक्त हम….

-अपने सबसे आदि मानव वाले पुरखों के सबसे मुश्किल मिशन से खुद को कनेक्ट कर उनसे रूहानी तौर पर जुड़ रहे होते हैं…

-सदियों से भोजन पकाने के लिए एकमात्र ज़िम्मेदार के तौर पर मेंटल कंडीशनिंग से निर्मित मजबूर स्त्रियों के दुखते कंधों को थोड़ी सी राहत दे रहे होते हैं…

-जब सब कुछ यहीं रह जाना है तो कीजिए हाय हाय क्यों…पर हाय हाय न करें तो करें क्या… संगीत और स्वाद… इन दो बेहद रचनात्मक फ़ील्ड में हाथ आज़मा सकते हैं… सच मानिए, ये करते वक्त आप सबसे ईमानदार, सबसे सकारात्मक और सबसे आभावान क्षण को जी रहे होते हैं…

-सारी कायनात के प्रति कृतज्ञ हो रहे होते हैं कि एक हम मानवों को जिलाने खिलाने के लिए तूने कितने सारे उपक्रमों का संसार रच दिया है… तब मन करता है कहने को- लव यू ईश्वर भाई! ❤️

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