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आज के अखबार : ट्रम्प की धमकी से इरान का गुस्सा बढ़ा तो मोदी की छवि बनाने के लिए ‘सबसे लंबा शासन’!

संजय कुमार सिंह-

खाड़ी युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है, एलपीजी का संकट बना हुआ है, भारत पर प्रभाव की समीक्षा के लिए सरकार ने बैठक की है। अमर उजाला में लीड तो युद्ध ही है, नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी पर हर हाल में कसें शिकांजा। मुझे लगता है कि सरकार का डर हो तो किसी को कालाबाजारी करने की हिम्मत ही नहीं होगी और मौके पर ऐसा कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन सरकार ऐसी है कि इंडिगो संकट के समय विमान सेवा कंपनियों ने जब यात्रियों को पूरी तरह लूट लिया तो अधिकतम किराए की सीमा तय हुई। कल छपा था और आज देशबन्धु ने पहले पन्ने पर छापा है, घरेलू उड़ानों का किराया बढ़ा सकेंगी एयरलाइंस। पता नहीं इसका संबंध युद्ध से है या नहीं और विमान किराया बढ़ाकर कमाने के लिहाज से यह कैसा समय है। यात्रियों के हित में आदर्श है या नहीं लेकिन सरकारी फैसलों का समय तो संदिग्ध रहता ही है। तब प्रतिबंध देर से लगा था यह तो तय है, हटाना जरूरी हो तो अभी समय कितना सही है मैं नहीं जानता लेकिन उड़ानों की दिक्कत तो है और तब सरकार ने यह फैसला ले लिया है। कल टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का हिन्दी अनुवाद मैंने लिखा था, ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात-चीत में नरेन्द्र मोदी ने संरचनाओं पर हमले की आलोचना की, कहा पानी के जहाज का रास्ता खुला रहना चाहिए। आज की खबरों से लग रहा है कि नरेन्द्र मोदी ने जो कहा वह सब कुछ नहीं हुआ या उसका उल्टा ही हुआ है। भले ट्रम्प के अल्टीमेटम के कारण हो। अखबारों की खासियत है कि इसका उल्लेख नहीं है। प्रधानमंत्री की तारीफ के लिए आज सबसे लंबा शासन जुमला है। शुरुआत कल हो गई थी आज प्रचार है कि सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड के अनुसार, सरकार ने ईंधन, उर्वरक की सुरक्षा के लिए कदम उठाए। आज जब ज्यादातर अखबारों में इरान को ट्रम्प की धमकी और उसका जवाब या उसपर प्रतिक्रिया लीड है तो प्रधानमंत्री की रिकार्ड बनाना भी खबर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर सिंगल कॉलम से लेकर दि एशियन एज में दो कॉलम का बॉक्स और नवोदय टाइम्स में तीन कॉलम के टॉप बॉक्स तक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, द हिन्दू और इंडियन एक्सप्रेस जैसे कुछ अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। वैसे, द टेलीग्राफ की खबर का शीर्षक है – मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री मोदी के लिए कार्यकाल का रिकार्ड। 

प्रधानमंत्री के रूप में रिकार्ड बनाने पर भी प्रचार किया गया था। अब सबसे लंबे समय तक सरकार का प्रमुख रहने के लिए प्रचार चल रहा है। जेपी यादव ने द टेलीग्राफ में लिखा है, भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर बिताए कार्यकाल को जोड़कर उन्हें भारत का “सबसे लंबे समय तक सरकार का मुखिया” बताया। इस बात की तारीफ़ करने के लिए पार्टी के बड़े नेता एक-दूसरे से होड़ में रहे। भाजपा ने कहा कि मोदी के 8,931 दिन, पवन कुमार चामलिंग के पिछले रिकॉर्ड 8,930 दिनों से ज़्यादा हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने इतने दिन पूरी तरह सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में बिताए थे। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के संस्थापक ने 1994 से 2019 तक लगातार पाँच कार्यकाल तक इस पहाड़ी राज्य की सरकार का नेतृत्व किया था। चामलिंग से पहले, यह रिकॉर्ड ज्योति बसु के नाम था, जो जून 1977 से नवंबर 2000 के बीच 8,539 दिनों तक बंगाल के मुख्यमंत्री रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी खुद इस विषय पर चुप रहे और पेट्रोलियम, बिजली तथा उर्वरक की स्थिति की समीक्षा के लिए वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की। अधिकारियों ने बताया कि वह पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट के खतरे के बीच उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। सबसे लंबे कार्यकाल के प्रचार की शुरुआत भाजपा ने सोशल मीडिया पर की थी जो आज अखबारों में भी है। कल अखबारों में यह प्रचार था कि प्रधानमंत्री खाड़ी के देशों के नेताओं को फोन कर रहे हैं और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

टेलीग्राफ ने इस खबर के साथ पहले पन्ने पर छपी एक खबर से बताया है कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन भाजपा उम्मीदवारों को लेकर असंतोष के बीच पश्चिम बंगाल राज्य भाजपा नेतृत्व से मिलेंगे। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी देश सेवा के नाम पर चुनाव जीतने का ही काम करते रहे हैं और अब यह कहा जा सकता है कि उन्हें यही काम आता है और कैसे चुनाव जीतते हैं वह अब सार्वजनिक हो चुका है। इसमें यह तथ्य है कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नियमानुसार महाभियोग का नोटिस दिया है। फिर भी वे पश्चिम बंगाल समेत दूसरे राज्यों में चुनाव करवा रहे हैं। जबकि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित कानून पर सुनवाई से अलग हो गए हैं और कहा है कि केस ऐसी बेंच को सौंपा जाए जिसके जज चीफ जस्टिस बनने की कतार में न हों। आप जानते हैं कि एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय तक सुनवाई चलती रही। मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से सुप्रीम कोर्ट में तरह-तरह के दावे किए गए जबकि उनकी नियुक्ति से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। 

ऐसे आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट में और मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उस एसआईआर का बचाव किया जिसके जरिए चुनाव आयोग यह सुनिश्चित कर रहा था कि मतदाता सूची में विदेशी (असल में घुसपैठिये) न रहें। घुसपैठियों का पता नहीं क्या हुआ आज इंडियन एक्सप्रेस में खबर है कि दिल्ली पुलिस के डाटा के अनुसार, पिछले नौ महीनों में (दिल्ली के चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार और भाजपा की सरकार बनने के बाद) 1589 अवैध बांग्लादेशियों को वापस भेजा गया है। खबर के अनुसार यह नवंबर 2024 से मई 2025 के सात महीनों के मुकाबले भारी वृद्धि है। तब 720 अवैध बांग्लादेशी प्रवसी ही पकड़े गए थे जिन्हें वापस बांग्लादेश भेजा गया था। यही नहीं, बंगाल में एसआईआर के तहत बांग्लादेशियों की पहचान की बजाय लॉजिकल डिसक्रिपेंसी की जांच होने लगी और चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची तैयार करने का समय निकलने के बाद भी अभी लाखों लोगों का फैसला होना है। इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी इस आशय की खबर के अनुसार जिन आवेदनों पर विचार होना है उन्हें मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया तो ट्रिब्यूनल में जाना पड़ेगा। इस तरह यह प्रक्रिया चुनाव खत्म होने के बाद भी जारी रह सकती है। देशबन्धु में खबर है कि पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची आज जारी होगी। आप जानते हैं कि पहले इसमें राज्य के न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया और बाद में पड़ोसी राज्यों के न्यायिक अधिकारियों की भी सेवा लेने की अनुमति दी गई।    

बंगाल में चुनाव जीतने के लिए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार और भाजपा जो कर रही है उसका विवरण आज दि एशियन एज में भी है। इसके अनुसार, पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा के मुस्लिम नेताओं की चुनावी ड्यूटी नहीं लगी है। जानकारों का कहना है कि ऐसा जानबूझकर किया गया है ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो सके। कहने की जरूरत नहीं है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा येन केन प्रकारेण चुनाव तो जीत लेती है लेकिन जनता की सेवा पर संदेह है। आज टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार, दिल्ली में बिजली की दर बढ़ सकती है क्योंकि 38 हजार 500 करोड़ रुपए की रिकवरी की योजना पर काम चल रहा है। यह पैसा 2007 से बताया जा रहा है और सात साल में चरणों में वसूलने की योजना है। लागू हो जाए तो दिल्ली की जनता को डबल इंजन सरकार का उपहार होगा। पर यह खबर किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं दिखी। टाइम्स ऑफ इंडिया में आज डबल इंजन वाले असम की खबर सेकेंड लीड है। इसके अनुसार, उल्फा उग्रवादियों ने असम के पुलिस कैम्प पर हमला बोला, चार कर्मी जख्मी हुए। राज्य में 9 अप्रैल को चुनाव है और तीन हफ्ते से भी कम समय रह गया है। द हिन्दू ने हाईलाइट कर बताया है कि मुख्यमंत्री ने हमले की निन्दा की और कार्रवाई का भरोसा दिलाया। कुल मिलाकर, आज के अखबारों में मूल खबर यही है, “अमेरिका ने सीधी बात की होर्मुज को खोलें”। द टेलीग्राफ ने फ्लैग शीर्षक से कहा है, ट्रम्प ने इरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया; तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। अखबार ने इसके साथ प्रधानमंत्री के रिकार्ड बनाने की खबर दी है जिसका जिक्र ऊपर है। युद्ध से संबंधित एक महत्वपूर्ण खबर यह भी है कि ईरान ने इजराइल के परमाणु ठिकाने पर भी हमला किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, ‘अमेरिकी अल्टीमेटम इरान ने हमला बढ़ाया : होर्मुज को पूरी तरह बंद कर देगा”। लगभग यही शीर्षक द हिन्दू की लीड का है। इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक भी मिलता जुलता है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि होर्मुज से संबंधित अल्टीमेटम के बाद ईरान ने प्रमुख संरचनाओं को निशाना बनाने की धमकी दी है। देशबन्धु ने इसे बहुत स्पष्ट लिखा है, ट्रम्प की धमकी पर ईरान हुआ हमलावर, कहा – होर्मुज पर हमारा ही नियंत्रण। 

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादाअख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

 

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