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आज के अखबार बता रहे हैं, ‘बेचारी’ राष्ट्रपति के साथ भाजपा और सरकार ने राजनीति की

संजय कुमार सिंह-

आज नवभारत टाइम्स की लीड है, राष्ट्रपति पर सोनिया के कॉमेंट से विवाद। ‘बेचारी….’ बताने पर भड़की बीजेपी (भाजपा), माफी की मांग। खबर से साफ है कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति को (किसी बात पर) बेचारी कहा है और इससे भाजपा भड़क गई है। मुझे लगता है कि यही राष्ट्रपति को बेचारी साबित करने का उदाहरण है। सोनिया गांधी ने क्या कहा और अगर कुछ आपत्तिजनक कहा तो भाजपा क्यों भड़की और राष्ट्रपति या उनका कार्यालय भी सक्रिय हो गया तो क्या यह सामान्य है जबकि पहले कभी ऐसा हुआ हो, याद नहीं है। दूसरी ओर, पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक कह चुके हैं कि राष्ट्रपति भवन प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर काम करता है। अगर मामला कानूनी कार्रवाई का नहीं, विचार और अभिव्यक्ति का है तो भाजपा को भड़कने की क्या जरूरत है और भड़क भी जाये तो वह खबर कैसे है। आइये, आज देखते हैं अखबार क्या बता रहे हैं। हालांकि, इसमें दिलचस्प यह भी है कि सोनिया गांधी के बयान पर राजनीति करने की भाजपाई कोशिशों को सभी अखबारों ने बराबर महत्व नहीं दिया है। अगर खबर की बात करूं तो अभी जब कुम्भ में मरने वालों की संख्या नहीं बताई गई, हादसे का पूरा विवरण कायदे से नहीं दिया गया और द टेलीग्राफ की लीड है कि 60 घंटे बाद भी लापता लोगों का कोई सुराग नहीं है तथा सरकार ने अभी तक मृतकों की सूची जारी नहीं की है। ऐसे में अमर उजाला में राष्ट्रपति से संबंधित विवाद या राजनीति की यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। दैनिक जागरण ने प्रधानमंत्री के पक्ष को लीड बना दिया है। शीर्षक है, सोनिया ने राष्ट्रपति को बेचारी बताया, मचा राजनीतिक बवाल। उपशीर्षक है, पीएम ने कहा कांग्रेस के शाही परिवार का फिर दिखा अहंकार।

नवोदय टाइम्स का शीर्षक है, पुअर लेडी पर प्योर पॉलिटिक्स। अखबार ने मुख्य शीर्षक के साथ सोनिया गांधी का वह बयान भी छापा है जिसपर बवाल है। इसके अनुसार, भाषण पढ़ते-पढ़ते थक गई थीं राष्ट्रपति ‘बेचारी’ : सोनिया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की फोटो के साथ अखबार ने प्रधानमंत्री का आरोप छापा है (जो असल में मूल खबर है)। इसके साथ हाईलाइट किया हुआ अंश नड्डा का है, सोनिया बिना शर्त माफी मांगें। कुल मिलाकर, एक सामान्य अभिव्यक्ति पर इतनी राजनीति हुई कि प्रियंका गांधी को भी कहना पड़ा कि राष्ट्रपति का बहुत सम्मान करती है मेरी मां। जो भी हो, मुझे नहीं लगता कि सोनिया गांधी को माफी मांगने या उनके किसी बचाव की जरूरत है और यही बात राष्ट्रपति के लिए भी कही जा सकती है। उन्होंने इसे तूल दिया यह अलग मुद्दा है और यही राजनीति है और यही भिन्न अखबारों की खबरों से साफ हो जाता है। आम तौर पर एक ही अखबार पढ़ने वाले पाठक सत्तारूढ़ पार्टी के इस प्रचार (या राजानीति) को नहीं समझते और सत्तारूढ़ दल अपनी प्रभावी स्थिति से अपने प्रचार को ज्यादा पढ़वा लेता है। पर अभी वह मुद्दा नहीं है। कुल मिलाकर, दिल्ली में चुनाव है, सरकार ने वोट मांगने और पाने लायक कोई काम नहीं किया है और पहले की ही तरह अपनी योग्यता बताने की बजाय दूसरों की अयोग्यता बता कर वोट मांगने की राजनीति कर रही है और वह आज साफ दिख रहा है।

आप जानते हैं कि संसद के बजट सत्र शुरू हुआ है और कल राष्ट्रपति का भाषण था। बाद में पत्रकारों ने सोनिया गांधी से उनकी राय मांगी और सोनिया गांधी ने अपनी राय दी जिसे प्रधानमंत्री ने लपक लिया और राष्ट्रपति के अपमान से जोड़ दिया। उस समय वहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी थे। राहुल गांधी ने भाषण को बोरिंग कहा। मुझे लगता है कि यह सब सामान्य टिप्पणी है और आलोचना भी है तो राष्ट्रपति का अपमान नहीं है (उस भाषण का है जो उन्हें पढ़ना पड़ा) और लोकतंत्र में राष्ट्रपति के खिलाफ इतना तो कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री की तरह वे भी राजा नहीं हैं। हालांकि अपमान करने वाले के खिलाफ कार्रवाई के लिहाज से उनके अधिकार और उनका पद ज्यादा बड़ा है। मौजूदा राष्ट्रपति के बारे में पूर्व राज्यपाल का कहा याद किया जाना चाहिये कि राष्ट्रपति का कार्यालय भी प्रधानमंत्री कार्यालय से संचालित होता है। ऐसे में आज द टेलीग्राफ की खबर का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, राष्ट्रपति के लिए पुअर थिंग वाली टिप्पणी पर सोनिया ने नाराजगी मोल ली। जेपी यादव ने लिखा है, शुक्रवार को बजट सत्र की हंगामेदार शुरुआत हुई। सोनिया गांधी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए सहानुभूतिपूर्ण शब्द “बेचारी” का इस्तेमाल करने पर भाजपा ने सोनिया पर निशाना साधा। सोनिया गांधी ने कहा कि था कि, राष्ट्रपति को लंबा भाषण पढ़ना था, (वे थकी हुई लगीं और यह बुरी बात है) इसके लिए उन पर “आदिवासी बेटी” का अपमान करने का आरोप लगा। उन्होंने बजट सत्र की शुरुआत में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के लगभग 85 मिनट के संबोधन का जिक्र किया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति का भाषण “उबाऊ” (बोरिंग) और “दोहराव वाला” था, उन्होंने सरकार पर निशाना साधा, जिसने भाषण का अधिकांश भाग तैयार किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी ने कांग्रेस के “शाही परिवार” पर निशाना साधते हुए गांधी की टिप्पणी का इस्तेमाल किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस के “शाही परिवार” ने “बेचारी” शब्द का इस्तेमाल किया। सोनिया ने मुर्मू को “गरीब” और “पुअर थिंग” कहा। जबकि सोनिया गांधी का संदर्भ लंबा भाषण पढ़वाने (या पढ़ने की मजबूरी) से भी रहा हो सकता है। इसलिए इसे सामान्य संदर्भ में ही लिया जाना चाहिये था। लेकिन टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, राष्ट्रपति भवन ने भी कहा कि “कांग्रेस पार्टी के कुछ प्रमुख नेताओं” की टिप्पणियां “खराब संदर्भ, दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह से टालने योग्य” थीं, इससे पहले सोनिया के विदेशी मूल पर कटाक्ष किया गया। खबर के अनुसार एक्स पर एक पोस्ट में, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि सोनिया द्वारा “पुअर थिंग” वाक्यांश का उपयोग कांग्रेस के “अभिजात्यवादी, गरीब विरोधी और आदिवासी विरोधी स्वभाव” को दर्शाता है। उन्होंने “राष्ट्रपति और आदिवासी समुदायों” से “बिना शर्त माफ़ी” माँगने के लिये कहा। दिलचस्प यह है कि राष्ट्रपति भवन ने कहा, “इन नेताओं ने कहा है कि राष्ट्रपति अंत तक बहुत थक गई थीं और वह मुश्किल से बोल पा रही थीं। राष्ट्रपति भवन यह स्पष्ट करना चाहेगा कि सच्चाई से इससे ज़्यादा दूर कुछ भी नहीं हो सकता।” (कोई भी इतना भाषण पढ़ने में थक जायेगा या कम से कम थका हुआ लगेगा)। कुल मिलाकर, यह अंग्रेजी में कही गई बात का हिन्दी के संदर्भ में राजनीतिक लाभ लेने की फूहड़ कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं है।

प्रधानमंत्री ने लक्ष्मी से प्रार्थना की

आज जब ज्यादातर अखबारों में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस राजनीति की खबर को प्रमुखता से छापा गया है तब टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, मैं लक्ष्मी (जी) से प्रार्थना करता हूं कि गरीबों, मध्यम वर्ग पर कृपा करें। प्रधानमंत्री ने बजट के मौके पर धन की देवी से यह अपील की है तो बहुत संभावना है कि भविष्य में बजट दीवाली के दिन पेश किया जाये और रात में लक्ष्मी पूजन के समय पेश किया जाये। वैसे भी, आप जानते हैं कि शेयर बाजार से धन कमाने वालों के लिए दीवाली के दिन शाम को पूजा के समय शेयर बाजार खुलता है और कुछ कायदे कानून का काम होता है। आगे जो सब जब होगा तब होगा लेकिन अगर धन लक्ष्मी जी से ही मांगना है तो नौकरी, व्यवसाय अर्थव्यवस्था को चौपट करने वाली इस सरकार की जरूरत ही क्या है। आम लोगों की कमाई और देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए इस सरकार ने जो सब किया है उसपर किताब लिखी जा सकती है और अब प्रधानमंत्री आम जनता के लिए लक्ष्मी जी से प्रार्थना कर रहे हैं तो निश्चित रूप से यह बड़ी खबर है और जनता को पता होना चाहिये कि भरोसा सरकार का नहीं लक्ष्मी जी का ही है। इस खबर के साथ अखबार ने यह भी छापा है कि प्रधानमंत्री के अनुसार पहली बार संसद सत्र के पहले कोई विदेशी प्रयास नहीं है। पर यहां मुद्दा यह है कि अबकी बार ट्रम्प सरकार ने जिन भारतीयों को वापस भेजने का निर्णय किया है वो तो डॉलर में नहीं कमा पायेंगे और गरीब हो जायेंगे। प्रधानमंत्री इस विदेशी कोशिश को भांप भी नहीं पा रहे हैं। दिलचस्प यह भी है कि कालाधन खत्म करके, स्विस बैंक में रखा धन और 15 लाख भूलकर प्रधानमंत्री अब लक्ष्मी जी की शरण में हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया में राष्ट्रपति से संबंधित राजनीति की खबर लीड के नीचे है।

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