अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता हार रहे हैं। जनता ने आम आदमी पार्टी (AAP) को नकार दिया। 2025 दिल्ली चुनाव में जीत का सेहरा भाजपा के सिर पर होना तय है। विभिन्न न्यूज चैनलों में अभी 11:57 बजे तक भाजपा 46 और आप को 24 सीटों पर बढ़त बताई/दिखाई जा रही है। उधर दूसरी तरफ इंटरनेट पर इन नतीजों के बाद अलग ही बातें छिड़ी हैं। लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस केजरीवाल की इस हालत की जिम्मेदार है। कांग्रेस आप के लिए वोटकटुआ बन गई। नरेंद्र मोदी, कांग्रेस, केजरी, सिसोदिया और चुनाव नतीजों पर लोगों की क्या कुछ प्रतिक्रियाएं हैं- पढ़ें…
उमाशंकर सिंह-
राजनीतिक फ़लसफ़ा सबके लिए समान होना चाहिए
आप किसी राज्य में वोटकटुआ बनोगे तो कोई दूसरे राज्य में अपना हाथ दिखा आपके लिए वोट कटुआ बन सकता है।
फिर दर्द कैसा! शिकायत कैसी!
अपूर्व भारद्वाज-
कांग्रेस जिन 15 सीटों पर 15% वोट ला रही है, वहां AAP हार रही है। मादीपुर, संगम विहार, कस्तूरबा नगर, बादली और नांगलोई जाट पर कांग्रेस 20% से ज्यादा वोट ला रही है।
गुजरात में AAP ने कांग्रेस के साथ जो किया, वही दिल्ली में कांग्रेस ने AAP के साथ कर दिया। हिसाब बराबर!
अजीत सिंह राठी-
दिल्ली विधानसभा चुनाव के रुझानों को देखकर लगता है कि कांग्रेस ने हरियाणा का प्रतिशोध दिल्ली में लिया।
आम आदमी पार्टी ने जो सलूक कांग्रेस के साथ हरियाणा में किया, वही सलूक कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ दिल्ली में किया। इसे टिट फॉर टैट भी कह सकते है।
बाकी इंतज़ार कीजिए परिणाम की अंतिम तालिका का।
आदेश रावल-
दिल्ली में बीजेपी का वनवास ख़त्म होता दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन बार देश जीता लेकिन अभी तक दिल्ली नहीं जीत पाए थे।
आगे चलकर यह कहा जाएगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल में 26 साल बाद बीजेपी की सरकार बनाने में कामयाब हुए थे।
भले हवन में कांग्रेस ने भी आहुति दी हो…
हर्ष कुमार-
जब सरकार जाती है तो जनता मंत्रियों को नकारती है। आतिशी, मनोष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, सत्येंद्र जैन, केजरीवाल सब हार रहे हैं।
मैंने कहा था कि केवल गोपाल (बाबरपुर) राय जीतेंगे। अब तक वे बड़े अंतर (9017) से आगे हैं। मैंने कहा था कपिल मिश्रा की बड़ी जीत होगी, 13243 से आगे हैं।
अशोक कुमार पांडेय-
आम आदमी पार्टी का विधानसभा का वोटर लोकसभा में भाजपा को वोट देता था, इस बार लगता है विधानसभा में भी उसने भाजपा को ही वोट देने का फ़ैसला किया।
अगर यही ट्रेंड रिजल्ट में बदले तो आम आदमी पार्टी की राजनीति खत्म होने की तरफ़ बढ़ जाएगी। हालाँकि एक घंटे इंतज़ार करना चाहिए।
पहले भी कहा था, कांग्रेस अगर तीन महीने पहले जागती तो कुछ सफलता पा सकती थी। उसका वोटर उसकी तरफ़ लौटता बशर्ते उसे जीत का भरोसा होता।
नरेंद्र नाथ मिश्रा-
पिछले दिनों कांग्रेस प्रेसिडेंट खरगे और राहुल गांधी ने लंबा-लंबा दावा किया कि अब संगठन पर बड़ा काम होगा। तुरंत होगा।और इसके तुरंत बाद पार्टी ने उन राज्यों में भी संगठन समाप्त कर दिया जहाँ पहले से मौजूद थी। फिर पार्टी सो गई।
आज की तारीख़ में कांग्रेस का हिमाचल प्रदेश उड़ीसा उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कोई औपचारिक संगठन नहीं है। हरियाणा में कोई विपक्ष का नेता नहीं है। बाक़ी राज्य में भी यही हाल है।
पार्टी को लगता है कि चुनाव से 7 दिन पहले कैंपेन कर पार्टी को मज़बूत करेंगे तो शायद यह मुग़ालता है।
2024 आम चुनाव के बाद बीजेपी ने गलती से सीखी। फिर कई कदम उठाए। कांग्रेस ऐसे मोड में आई जहाँ लगा कि अब उसे कुछ करने की जरूरत नहीं है। अगर कुछ महीने ऐसे ही और सोई रही तो पार्टी के लिए आगे की राह और दिक्कत वाली हो जाएगी।
जिस आम आदमी पार्टी ने आज तक विपक्ष में रहना नहीं सीखा/देखा हो, पार्टी बनने के बाद शुरू से सत्ता में ही रही हो, उनके लिए यहाँ से आगे किस तरह राजनीति जाएगी वह बहुत ही दिलचस्प होगा।
कितने वर्कर/नेता टिकेंगे? विपक्ष की राह बहुत कठिन होती है। संघर्ष का रास्ता होता है। देश की तमाम राजनीतिक दल इस कठिन दौर से निकली है।
अब केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को इस रास्ते से निकलना होगा। और केजरीवाल को ख़ुद में भी बहुत बदलाव लाना होगा।
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