टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अदाणी से संबंधित एक खबर शेयर कर लिखा है – निवेशकों ने अदाणी निवेशक जीक्यूजी से 1.5 अरब डॉलर निकाले, जिससे प्रदर्शन नकारात्मक होने का खतरा है. बहुत याराना लगता है!
दरअसल, भारतीय बिजनेस समूह अदाणी से विदेशी निवेशकों ने हाथ खींच लिए हैं. इस कड़ी में जीक्यूजी पार्टनर्स के राजीव जैन ने पहली बार गौतम अदाणी की कंपनी में निवेश किए गए अपने 10 अरब डॉलर के दांव को लेकर बैकफुट पर हैं.
निवेशकों ने यह फैसला अमेरिकी आरोप के बाद लिया है. जिसके बाद मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अदाणी समूह को लगभग 1.5 बिलियन डॉलर का झटका लगा है. वहीं, ब्रोकर द्वारा कंपनी को तटस्थ करने और स्टॉक पर अपना मूल्य लक्ष्य 30 प्रतिशत घटाकर 2.30 डॉलर करने के बाद सोमवार को मनी मैनेजर के शेयर 14 प्रतिशत गिरकर 2.02 डॉलर पर आ गए.
फाइनेंशियल रिव्यू नामक वेबसाइट ने यूबीएस के हवाले से लिखा है कि निवेशकों ने अमेरिका से आई खबर के बाद दो दिनों में जीक्यूजी के फंड से 600 मिलियन डॉलर निकाल लिए हैं, जो पहली बार 21 नवंबर को सामने आया था, और उसने नवंबर के बाकी दिनों 500 मिलियन डॉलर और निकालने की घोषणा की थी.

उधर फोर्ट लॉडरडेल स्थित एक फर्म को गौतम अदाणी द्वारा स्थापित पोर्ट टू पावर समूह में अपने 10 बिलियन डॉलर निवेश पर बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि यह निवेश उसी 265 मिलियन डॉलर रिश्वत का हिस्सा है, जिसे लेकर हाल ही में अमेरिका ने आरोप लगाया था.
रिपोर्ट के अनुसार, यूबीएस के विश्लेषक श्रेयस पटेल ने ग्राहकों को लिखे एक नोट में चेतावनी देते हुए कहा, निकट भविष्य में नकारात्मक खबरों के बाद आने वाले एक साल में अदाणी का प्रदर्शन ट्रैक रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा. आगे यह और भी नकारात्मक हो सकता है.
यह भी बताया जा रहा है कि, जीक्यूजी के शेयरों में इस साल 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई, लेकिन अडानी रिश्वतखोरी के आरोपों का खुलासा होने के बाद से उनमें 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है.


