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गंभीर मुद्दों से मुँह मोड़कर अडानी की चापलूसी में जुटा मुख्यधारा मीडिया

सादे सूट में दिखना बना ‘ब्रेकिंग न्यूज़’, नवभारत टाइम्स की गिरती पत्रकारिता पर सवाल

देश में बेरोज़गारी, महंगाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी सवाल हाशिये पर हैं, लेकिन नवभारत टाइम्स जैसे अख़बारों के लिए अरबपति उद्योगपति की पत्नी का सादा सूट पहनकर दिख जाना खबर बन गया है। यह उदाहरण बताता है कि मुख्यधारा मीडिया किस तरह जनसरोकार छोड़कर दिखावटी और खोखली पत्रकारिता में फँस चुका है।

नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर प्रकाशित एक तथाकथित लाइफस्टाइल खबर में देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शामिल गौतम अडानी की पत्नी डॉ प्रीति अडानी के सादे सूट पहनने को इस तरह पेश किया गया है जैसे कोई बड़ी उपलब्धि या असाधारण घटना घट गई हो। शीर्षक से लेकर भाषा तक में यही स्थापित करने की कोशिश है कि अपार दौलत और शौहरत के बावजूद सादगी अपने आप में कोई असाधारण खबर है, जबकि यह न तो सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय है और न ही इसका आम पाठक की ज़िंदगी से कोई लेना-देना है।

जिस दौर में मीडिया से सत्ता, पूंजी और व्यवस्था से सवाल पूछने की उम्मीद की जाती है, उसी दौर में एक बड़े अख़बार का स्पेस इस तरह की चापलूसी और सेलिब्रिटी पूजा में खर्च होना गंभीर चिंता का विषय है। यह पत्रकारिता नहीं, बल्कि पीआर कंटेंट है, जिसे खबर का जामा पहनाकर परोसा जा रहा है। सवाल यह नहीं है कि कोई क्या पहनता है या कितना सादा रहता है, सवाल यह है कि क्या यही देश के सबसे बड़े हिंदी अख़बारों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

नवभारत टाइम्स की यह खबर बताती है कि कैसे मुख्यधारा मीडिया ने अपने पाठकों की बौद्धिक अपेक्षाओं को कम करके आँकना शुरू कर दिया है। सादे सूट को सुर्खी बनाकर पेश करना इस बात का सबूत है कि खबरों की कसौटी अब जनहित नहीं, बल्कि क्लिक, ब्रांड और ताकतवर वर्ग की खुशामद बन चुकी है। ऐसी पत्रकारिता न सिर्फ पाठकों का समय बर्बाद करती है, बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता को भी लगातार खोखला करती जा रही है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Avnish

    January 2, 2026 at 5:05 pm

    ये कोई ब्रेकिंग खबर नहीं लाइफ स्टाइल और फैशन से रिलेटेड आर्टिकल है।

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