
मुकेश कुमार-
मोदी-अडानी के रिश्तों का भेद एक बार फिर से खुलने के बाद हंगामा मच गया है। ये भंडाफोड़ अमेरिकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट ने किया है। वाशिंगटन पोस्ट ने खुलासा किया है कि मोदी सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई में से 32 हज़ार करोड़ अडानी को देने का प्लान बनाया था। ये रकम LIC के ज़रिए दी जानी थी। पांच सौ करोड़ तो दे भी दिए गए।
ज़ाहिर है कि सरकार फिर से फंस गई है और विपक्ष उस पर टूट पड़ा है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोदी-अडानी मेगास्केम बताते हुए जेपीसी से जाँच करवाने की मांग की है। उसने प्रधानमंत्री मोदी और वित्तमंत्री का इस्तीफ़ा मांग लिया है। राहुल गाँधी ने भी इसे घोर भ्रष्टाचार कहा है।

जैसी की अपेक्षा थी LIC ने रिपोर्ट को “झूठा, आधारहीन और सत्य से पूरी तरह दूर” बताया। कंपनी ने कहा कि सभी निवेश पारदर्शी, नियामक अनुपालन वाले और लाभदायक हैं। अदानी ग्रुप में LIC का निवेश उसके कुल पोर्टफोलियो (₹41 लाख करोड़) का मात्र 1% से कम है, और इससे ₹66,000 करोड़ से अधिक लाभ हुआ है।
अदानी ग्रुप ने भी कुछ इसी तरह से सफाई दी है। उसने दावा किया कि LIC कई कंपनियों (जैसे रिलायंस, HDFC) में निवेश करता है, और कोई सरकारी हस्तक्षेप नहीं हुआ। उन्होंने इसे “गलतफहमी” बताया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
BJP नेता भी चिर परिचित अंदाज़ में सरकार के बचाव में उतरे हैं। उन्होंने और सरकार के समर्थकों ने इसे कांग्रेस की “टूलकिट” का हिस्सा बताया, जो विदेशी मीडिया के जरिए भारत की छवि खराब करने का प्रयास है।
लेकिन असली सवाल ये है कि क्या मोदी सरकार ने एलआईसी के ज़रिए 32 हज़ार करोड़ अडानी की कंपनियों में निवेश की योजना बनाई थी और बनाई थी तो क्या वह निवेश हुआ। दूसरा सवाल ये है कि सरकार अडानी पर इतनी मेहरबान क्यों हुई….क्या इसलिए कि वे प्रधानमंत्री मोदी के मित्र और कृपापात्र हैं….
तीसरा सवाल ये है कि क्या ये जनता के विश्वास और एलआईसी के पॉलिसी धारकों के साथ धोखाधड़ी नहीं है….
कृष्णन अय्यर-
कल से देख रहा हूँ कि “वाशिंगटन पोस्ट” के आर्टिकल को शेयर किया जा रहा है..पब्लिक मेमोरी बहुत कमज़ोर होती है.. अदाणी को LIC का क़र्ज़ मिलने से पहले मैने और दूसरे लोगों ने लिखा था कि अदाणी को LIC से क़र्ज़ मिलेगा.. और 3.9 बिलियन डॉलर या’नि लगभग 35,000 हज़ार करोड़ तो मूंगफली जितना भी नहीं है..भारत का लगभग हर सरकारी बैंक/फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन का अदाणी में कुछ ना कुछ डायरेक्ट/इंडिरेक्ट एक्सपोज़र है
इसके अलावा सरकारी ज़मीन, सरकारी प्रॉपर्टी, सरकारी ठेके, टैक्स छूट, मनी लॉन्ड्रिंग के इल्ज़ाम वग़ैरह को जोड़ेंगे तो वो अमाउंट इतना है कि कई ट्रिलियन डॉलर जाना मुमकिन है..
अदाणी एक “ब्लैक होल” है..ब्लैक होल के अंदर जो कुछ भी जाता है वो कभी वापस बाहर नहीं आता है..और ब्लैक होल की भूख कभी नहीं मिटती है..
मैंने और मुझ जैसे लोगों अदाणी जैसे कई तथाकथित उद्योगपतियों को बनते देखा है और बरबाद होते भी देखा है..मगर अदाणी विश्व में एक ‘अजूबा है क्योंकि इस वक़्त भारत की पूरी सियासत अदाणी के ऑर्बिट में चक्कर लगा रही है..
भारत सरकार अदाणी की पॉलिसी का हिस्सा बन चुकी है..और इस का नतीजा इस वक़्त बहुत कम लोग समझ रहे हैं..सुई की नोक पर इतनी बड़ी सल्तनत!!
बग़ैर नाम लिए पूछता हूँ कि भारत में आप जिन लोगों को उद्योगपति के तौर पर जानते थे वो सब ख़ामोश क्यों हैं? उन उद्योगपतियों की ग्रोथ क्या है? वो उद्योगपति दिखाई क्यों नहीं देते?
अदाणी, अंबानी ऐसा कौन सा काम करते हैं और कौन सी बड़ी इंडस्ट्री चलाते है? और दुनिया में अदाणी, अंबानी जैसी इंडस्ट्री चलाने वालों की कमाई कितनी है? इस बात को ख़ुद चेक कीजिए
डेटा, सीमेंट, एयरपोर्ट, पोर्ट, पेट्रोकेमिकल, रिटेल जैसे व्यापारों में कितनी कमाई है ये दुनिया से छुपा हुआ नहीं है..क्योंकि दुनिया भर में यह व्यापार होते हैं..मुझे तो ऐसे किसी दूसरे व्यापारी की इतनी कमाई नहीं दिखती है।।
भारत के साथ जो किया जा रहा है वो दुनिया भर के फाइनेंसियल फ्रॉड के इतिहास में किसी भी देश के साथ नहीं हुआ है..भारत के सारे सिस्टम तबाह किए जा चुके हैं..टोटल फ्री हैंड है..
समझने की आसानी के लिए कहता हूँ कि हालात ऐसे हैं कि RBI तक को रोकड़ बना दिया गया है..अरे RBI वाले मुंशी जी, 3 लाख करोड़ भेजना, जैसा कंट्रोल बनाया जा चुका है
हर फाइनेंसियल फ्रॉड के इतिहास में एक बात कॉमन है : फ्रॉड की चेन फ्रॉड करने वाला ही तोड़ने पर मजबूर हो जाता है..भारत में भी यही बात होना तए है..
भारत में जो चल रहा है वो अदाणी, अंबानी और मोदी की औक़ात के बाहर का खेल है..ये तीनों सिर्फ़ मोहरे हैं..बाक़ी वक़्त आने पर ही मा’लूम होगा..
राज त्रिपाठी-
जब विदेशी बैंक और निवेशक अडानी से भाग रहे थे। क्योंकि Hindenburg रिपोर्ट ने उनके साम्राज्य में गड़बड़ियों और फ्राॅड के पूरे सबूत रख दिए थे। तब हमारे देश में उल्टा मंजर था। सरकार ने “विकास” और “राष्ट्रहित” के नाम पर जनता की जेब खोल दी।
LIC, जो कभी भरोसे की मिसाल थी, आज सत्ता और पूंजी की जुगलबंदी का औजार बन गई है।
आंकड़े बताते हैं कि LIC ने अडानी समूह में लगभग ₹36,474 करोड़ का निवेश किया है। यह राशि भले ही उसके कुल फंड का एक प्रतिशत भी न हो, लेकिन यह वही पैसा है जो करोड़ों लोगों ने अपने बच्चों की पढ़ाई, बीमार माता-पिता के इलाज, और भविष्य की सुरक्षा के लिए जोड़ा था।
यह निवेश उस वक्त हुआ जब विदेशी निवेशक अडानी के शेयरों और बांडों से बाहर निकल रहे थे। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब अडानी पोर्ट्स ने नया बांड जारी किया, तो विदेशी बैंकों ने दूरी बना ली। लेकिन वहीं भारत की LIC ने आगे बढ़कर निवेश किया।
सोचिए, जब दुनिया “रिस्क” कह रही थी, तब दिल्ली से आवाज़ आई “राष्ट्रहित में निवेश है!” क्या जनता का पैसा अब सत्ता के मित्रों की ढाल बनने के लिए है?
LIC, जो कभी “Life Insurance Corporation” थी, अब “Looted Investment for Cronies” जैसी लगने लगी है।
जनता ने बीमा कराया था अपने जीवन का, लेकिन बचाया जा रहा है किसी अरबपति का व्यापार।
भरोसे का बीमा अब राजनीतिक रिश्तों का बीमा बन चुका है। और सबसे मज़ेदार बात जब कोई सवाल पूछे, तो उसे “देशद्रोही” कहकर चुप करा दिया जाता है।
कभी जो संस्था जनता की ढाल थी, आज सत्ता की ढाल बन गई है।
अब वक्त है सवाल पूछने का
हमारा पैसा किसका विकास कर रहा है?
और हमारी चुप्पी किसकी ताकत बन रही है?
ये है एलआईसी का पक्ष-

“बाहरी दबाव” में अदानी के कारोबार में निवेश की वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट को एलआईसी ने ग़लत बताते हुए कहा है कि निवेश का फ़ैसला “स्वतंत्र रूप से” बोर्ड द्वारा लिया गया है.
सच जो भी हो, इस प्रकरण से यह बात याद आती है कि अमेरिका और भारत जैसे देशों में कुछ खरबपति सरकारों को अपने प्रभाव में ले सकते हैं, लेकिन चीन में कोई खरबपति पोलिट ब्यूरो को प्रभावित करने की बात सपने में भी नहीं सोच सकता है.
“इलेक्ट एंड रिग्रेट” ब्राण्ड वाले लोकतंत्रों में लोग पार्टी बदल सकते हैं. पॉलिसी नहीं. चीन में लोग पॉलिसी बदल सकते हैं, पार्टी नहीं.
क्रोनी कैपिटलिज़्म ने कैपिटलिज़्म को बर्बाद किया है और लिबरल डेमोक्रेसी को भी.
-प्रकाश के रे
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Arvind Kumar Purohit
October 27, 2025 at 5:10 pm
Other Western companies have recently announced investment of dollars 25000 carors in Adani,deep state which earlier attacked Adani through Hindenburg Adani had some setback but bounced back,then came attack through Newyork Attorney,a political appointee with connections with DS,here again they failed, Adani started getting funds from overseas,this latest hit job in Washington Post, written by known Modi Adani haters
Still Western investors are nor in mood to stop
Basically Deep State is attacking Modi through Adani and wants Indian economy to hit,so that Indian independence can be controlled
Rakesh Singh
October 27, 2025 at 7:41 pm
आगए विदेशी एजेंडा लेकर पत्रकार महोदय तुम जैसे पत्रकार अपने फायदे के लिए कुछ भी लिखते हो अडानी अम्बानी ने अपना व्यापार किस सरकार के समय में शुरू किया था तब तो बीजेपी की सरकार नहीं थी उस समय तो आप के पसंद की सरकार थी जरा कॉंग्रेस से भी पूछा करो की य़ह उस समय कैसे इतना पैसा बनाया था
Prof.(Dr.)S.A.Pandey,LL.M,Ph.D
October 27, 2025 at 8:09 pm
Any news published in foreign newspaper is sacrosanct for some people who are toiling hard to destabilize the government despite the fact that LIC has come out with facts to prove them wrong.Such group of persons are mongering rumer only on the basis of shear speculation speculation which shows their frustration. For them Rag of western Whites is precious than Indian Silk.
Lofty and unsubstantiated
statements are mischievous
in nature and are often made with ulterior motive.
Tera baap
October 27, 2025 at 8:11 pm
Dear bhadas and bhosadi ke kuch data bhi match Kiya kar bhosadi ke . Kya idhar ka udhar aur udhar ka idhar bina matalab ke ma chuda Raha hai
Rajesh kumar keshari
October 27, 2025 at 8:11 pm
Washington post kaun hai likhne wala wo ameriki deep state ka part hai paisa dekar deep state article print karwae ja rahe hai bihar election hai lekin ye modi hai chodega kisi ko nahi
चौधरी साहब
October 27, 2025 at 8:36 pm
Bhed midia और hindanbarg तथा raul बाबा soros jo kahe vo hi saty hai beddas midea
Peter Dias
October 27, 2025 at 9:12 pm
Washington post says …… for a minute, just think, what has Washington post to do with an Indian company! 0.
This news holds as much truth as 3 pages of report in NewYork times stating Delhi public schools are best and probably one of the best in the world, during Khujriwal’s times. This is CONgress and foreign funding (china + US deep state)trying to damage Modi + Indias image.
I would like Washington post to do the same report on American companies duch as Nvidia Corp and Testa. And Tell us how much state or central government employees pension funds are invested in these companies! Making chutia of public is a CONgress’s game. It won’t surprise me if the this particular media reporting this is also paid by CONgress!!
Rahul Ranjan
October 27, 2025 at 10:22 pm
Adani is capable that why he get tender
And american post or one more from America itself they also spread false information to bhartiya so pls stop your chutiyapa .
Our country is in safe hand ….you take care of yourself
Ravi
October 27, 2025 at 10:40 pm
Chutiya lekh