नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। अमेरिका की सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने न्यूयॉर्क की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को साफ-साफ बताया है कि मोदी सरकार ने अब तक गौतम अडानी और सागर अडानी को सम्मन और शिकायत की कॉपी नहीं दी है—जबकि इसके लिए औपचारिक अनुरोध पांच महीने पहले किया गया था।
11 अगस्त 2025 को मैजिस्ट्रेट जज जेम्स आर. चो को भेजी गई रिपोर्ट में SEC ने कहा है कि उसने भारत के क़ानून और न्याय मंत्रालय (Ministry of Law & Justice) से हेग सर्विस कन्वेंशन के तहत सम्मन सर्व करने में मदद मांगी थी। लेकिन भारतीय अधिकारियों ने अब तक यह सेवा पूरी नहीं की।
मामला क्या है?
SEC ने 20 नवंबर 2024 को अडानी ग्रुप पर अमेरिकी सिक्योरिटी कानून तोड़ने, झूठी और भ्रामक जानकारी देने और 2021 की डेट ऑफरिंग में गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था। चूंकि आरोपी भारत में हैं, इसलिए उन्हें नोटिस भेजने के लिए हेग कन्वेंशन का रास्ता अपनाया गया।
पांच महीने से फंसी सर्विस, संकेत क्या हैं?
SEC ने अपनी रिपोर्ट में दोहराया कि सम्मन और शिकायत की कॉपी सीधे अडानी और उनके वकीलों को भी भेजी गई, लेकिन भारत सरकार के जरिए औपचारिक सर्विस अब तक नहीं हो सकी।

अमेरिकी दस्तावेज़ों में सीधे-सीधे नाम नहीं लिया गया, लेकिन कानूनी हलकों में सवाल उठ रहा है कि यह देरी सरकार की ‘मर्जी’ की कमी का सबूत है—क्योंकि गौतम अडानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी माने जाते हैं।
शीतल पी सिंह-
मोदीजी ने दो तीन दिन पहले बिना नाम लिये कहा था कि वो अपना निजी नुक़सान उठाने की कीमत पर भी किसानों का नुक़सान नहीं होने देंगे। वे दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत पर लगाये गये टैरिफ़ पर प्रतिक्रिया दे रहे थे!
तब से उनके निजी नुक़सान पर अटकलें लग रही थीं। दरअसल उनके डियर फरेंड डोलांड ने जबसे उलटबाँसी शुरू की है तब से मोदीजी दांये-बांये से उसका प्रतिकार करवा रहे हैं और खुद सामने आने से लगातार बच रहे हैं। लेकिन अब इस मामले की वजहों की कम से कम एक मोटी परत सामने आ गई है।
अमेरिकी सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन ने अमरीकी अदालत को लिखित जवाब में बताया है कि उसने गौतम अड़ानी और उनके भांजे के खिलाफ जो सम्मन जारी किए थे वे भारत सरकार ने बीते छह महीने में तामील नहीं कराये हैं।
मोदीजी के आलोचक यह बात कहते रहे हैं कि अड़ानी के मामले में वे देशहित दांव पर लगा सकते हैं! इस सूचना से यह साबित हो रहा है! भले ही हमारी टैक्सटाइल निर्यात की बधिया बैठ जाए और भले ही हमारे दवा उद्योग की बड़ी कंपनियों का निर्यात बाधित हो जाए लेकिन अड़ानी को बचाने के लिए जो बन पड़ेगा वह किया जाएगा!
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