Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबारों में अकेले इंडियन एक्सप्रेस ने कश्मीर मामले में अमित शाह के बयान को लीड बनाया है

संजय कुमार सिंह

आज जब ज्यादातर अखबारों की लीड मणिपुर में फिर से हिंसा भड़कने की खबर है तो इंडियन एक्सप्रेस में अमित शाह का यह बयान लीड का शीर्षक है, सिर्फ केंद्र यानी मोदी जम्मू और कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दे सकते हैं और वह भी चुनावों के बाद उपय़ुक्त समय पर। इससे पहले राहुल गांधी ने रामबान की रैली में कहा था – जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाकर रहेंगे। जागरण डॉट कॉम की खबर के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा है कि हम इस जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाना सुनिश्चित करेंगे, भले ही भाजपा चाहे या नहीं। हम इंडिया गठबंधन के बैनर तले सरकार पर राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए दबाव डालेंगे। मुझे लगता है कि इसमें कुछ भी अस्पष्ट नहीं है और राहुल गांधी ने जो कहा है वह बिल्कुल स्पष्ट है। दूसरी ओर, यह भी तथ्य है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के दौरान राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। उसके बाद वह राज्य में पांच साल चुनाव नहीं करा पाई, लोकसभा चुनाव  में घाटी में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा और अब जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विधानसभा चुनाव हो रहे हैं तो भाजपा की राज्य इकाई में विरोध साफ दिख रहा है।

आजतक डॉट इन की एक खबर के अनुसार, राहुल गांधी ने न सिर्फ राज्य का दर्जा वापस करने के लिए कहा है बल्कि पहली ही रैली में जम्मू-कश्मीर का चुनावी एजेंडा सेट कर दिया था। रामबन की रैली में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे, बेरोजगारी, बिजली समस्या और देश में फैली नफरत पर बात की। राहुल गांधी ने कहा, “भारत के इतिहास में पहली बार राज्य का दर्जा छीना गया है। एक राज्य को खत्म कर दिया गया और लोगों के अधिकार छीन लिए गए।” उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश में बीजेपी और आरएसएस के लोग नफरत और हिंसा फैला रहे हैं। उनका काम नफरत फैलाने का है और हमारा काम मोहब्बत फैलाने का है। वो तोड़ते हैं और हम जोड़ते हैं। नफरत को मोहब्बत से ही हराया जा सकता है। अंत में मोहब्बत की ही जीत होती है। पहले नरेंद्र मोदी छाती फैलाकर आते थे और अब झुककर आते हैं। हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार किसी राज्य का स्टेटहुड छीना गया है।

इससे भाजपा का परेशान होना स्वाभाविक है और अब लगता है अमित शाह मोर्चे पर हैं। यह भाजपा का आंतरिक मामला है, चुनाव प्रचार कोई भी करे, किसी तरह करे या किस चीज को मुद्दा बनाती है यह सब उसका मामला है। लेकिन हिन्दी मीडिया में ‘पलटवार’ की खबरें हैं। आजतक डॉट इन की खबर के अनुसार, जम्मू की रैली में अमितशाह ने पूछा, क्या राहुल गांधी के पास स्टेटहुड लौटाने का पावर है? इससे आप समझ सकते हैं कि भाजपा कैसे फंसी हुई है और चुनाव लड़ने, जीतने के लिए उसके हाथ में क्या है। जो है उसका उपयोग किया जा रहा है और इंडियन एक्सप्रेस ने आज इस खबर को लीड बना कर उसका भरपूर प्रचार किय़ा है। खबर में आगे कहा गया है, ‘राहुल गांधी कहते हैं कि वे जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देंगे। क्या उनके पास ऐसा करने की शक्ति है? मैंने संसद में कहा है कि चुनाव के बाद उचित समय पर राज्य का दर्ज वापस कर दिया जायेगा। इंडियन एक्सप्रेस की लीड का उपशीर्षक है, राहुल और फारुक पर निशाना साधा और कहा, एक झंडा, एक संविधान के तहत पहल विधानसभा चुनाव।

इंडियन एक्सप्रेस ने आज एक्सप्रेस एक्सप्लेन्ड, द बैलट बैटल में भी इस बारे में बताया है। इसके अनुसार, जम्मू और कश्मीर के लिए विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों में लोगों की आकर्षक भागीदारी के बाद होने वाले है (तब यह भी कहा गया था भाजपा के खिलाफ भागीदारी ज्यादा है और बाद में पता चला कि भाजपा घाटी में चुनाव ही नहीं लड़ रही थी)। मई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य का विशेष दर्जा खत्म करने के निर्णय को कायम रखने के अपने फैसले की समीक्षा के लिए आई याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इससे पहले केंद्र ने कहा था कि वह उपयुक्त समय पर राज्य का दर्जा बहाल कर देगी। आप जानते हैं कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद हटाने और विशेष दर्जा खत्म करके राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद केंद्र सरकार ने पांच साल लगभग कुछ नहीं किया। लोक सभा चुनाव समय पर हुए अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विधान सभा चुनाव हो रहे हैं और भाजपा जनता की मांग, अपेक्षाओं, नाराजगी आदि के कारण फंसी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने भले हस्तक्षेप नहीं किया पर भाजपा सब समझ रही है, आश्वासन दिया है पर काम नहीं कर पाई।

ऐसे में राहुल गांधी के भाषण, आश्वासन का मतलब है और भाजपा का उससे परेशान होना स्वाभाविक है। अखबार उसे बता नहीं रहे हैं। जहां तक भाजपा शासित राज्यों की बात है, मणिपुर का मामला साफ है। तमाम राज्यों के मुख्यमंत्री बदले गये पर मणिपुर के नहीं। अब जब ताजी हिंसा में मरने वालों की संख्या अच्छी-खासी है तो उन्होंने सत्तारूढ़ दल के विधायकों और राज्यपाल से मुलाकात की है। इंडियन एक्सप्रेस में यह लीड के बराबर में टॉप पर दो कॉलम की खबर है। गाड़ियों की फोटो के साथ यह यकीन दिलाया गया है कि मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिलने गये। हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, द टेलीग्राफ समेत कई अखबारों ने लिखा है कि मरने वाले छह हैं। अमर उजाला में भी यही शीर्षक है हालांकि मरने वालों की संख्या पांच ही बताई गई है। नवोदय टाइम्स में शीर्षक है, मणिपुर में भड़की हिंसा। उपशीर्षक में मरने वालों की संख्या चार बताई गई है।  

अमित शाह की खबर आज हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है। शीर्षक है, “शाह ने जम्मू व कश्मीर में कहा : सिर्फ केद्र राज्य का दर्जा बहाल कर सकता है।” जाहिर है, केंद्र सरकार ने जो किया उसे वापस लेना पड़ रहा है या पड़ेगा। ऐसा ही उसकी कई मनमानियों के मामले में है और इनमें नोटबंदी से लेकर, जीएसटी, लॉक डाउन ही नहीं अनुच्छेद 370 वापस लेना और कश्मीर में चुनाव नहीं लड़ ना (या खराब स्थिति होना) बताता है कि वहां प्रचारक और प्रचार तंत्र कामयाब नहीं रहे या उनकी सेवा नहीं मिली। नीतियां और कार्रवाइयां जनहितैषी नहीं हैं सो अलग। ऐसे में चुनावी स्थिति बनाने के लिए कश्मीर में शांति के बिना पाक से बात नहीं जैसे बयान दिये जा रहे हैं। यह अलग बात है कि सामान्य तौर पर यही होना चाहिये पर भाजपा ने नोटबंदी से आतंकवाद खत्म करने का दावा किया था। हाल में एक नेताजी दावा कर रहे थे कि भाजपा शासन में आतंकवादी वारदातें नहीं होती हैं और आज यह खबर। अगर वारदातें नहीं होती हैं तो वार्ता के लिए कैसी शांति चाहिये? 

यही नहीं, इंडियन एक्सप्रेस में एक खबर का शीर्षक है, पाकिस्तान सेना के प्रमुख ने 1999 के कारगिल युद्ध में पहली बार सेना की भूमिका स्वीकार की। मुझे नहीं पता कि इस स्वीकारोक्ति में नया क्या है और स्वीकार नहीं किये जाने का क्या मतलब था। पर इतने समय बाद इस स्वीकारोक्ति का मतलब समझना भी आसान नहीं है। आसानी से जो समझ में आ रहा था वह पहले पन्ने पर खबर छपने से कनफूजिया दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि कुछ बड़ा मामला होगा तभी इतनी पुरानी खबर आज पहले पन्ने पर छपी है। जो भी हो, आज एक खबर यह भी है कि पूजा खेदकर को आईएएस से निकाल दिया गया। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है, यूपीएससी के उम्मीदवारी रद्द करने के बाद सरकार ने आईएएस से बर्खास्त किया। पर मुद्दा यह है कि चुनाव कैसे हो गया था। फर्जी सर्टिफिकेट के मामलों में क्या कार्रवाई हुई। क्या सिस्टम में ऐसी गड़बड़ी पकड़ने की कोई व्यवस्था नहीं है। उसे ठीक करने के लिए कुछ किया गया या नहीं। औऱ किया गया तो क्या।   आज कश्मीर में भाजपा का प्रचार करने वाली खबरें इंडियन एक्सप्रेस में हैं तो भाजपा का हाल बताने वाली दो खबरें हिन्दुस्तान टाइम्स में हैं। पहली का शीर्षक है, मोदी-युनूस मुलाकात पर अभी तक कोई निर्णय नहीं। इस खबर के अनुसार बांग्लादेश ने अपनी अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद युनूस और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच मुलाकात के लिए आग्रह भेजा है पर इसकी संभावना नहीं है क्योंकि युनूस की बातें भारत सरकार को पसंद नहीं आई हैं। दूसरी खबर कोलकाता के आरजी कर अस्पताल की है। वहां सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक की मौत हो गई क्योंकि जूनियर डॉक्टर अभी भी हड़ताल पर हैं। तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस मौत के लिए जनियर डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराया है जो अपने सहयोगी की मौत के बाद विरोध कर रहे हैं। हालांकि, चिकित्सकों ने इससे इनकार किया है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन