संजय कुमार सिंह
आज के अखबारों से पता चला कि एच-1बी वीजा से संबंधित कल की अमेरिकी खबर वैसी ही थी जैसी खबरें भारत में नोटबंदी या फिर जीएसटी के समय छपनी शुरू हुई थीं। किसी भी खबर का अगले दिन खंडन, नियम बदल जाना या जैसा उन दिनों कहा गया था, गोल पोस्ट बदल जाना अब भारत में आम है। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप लगाये तो चुनाव आयोग ने भी कुछ ऐसा ही किया। तथाकथित फैक्ट चेक, इनकरेक्ट के ठप्पे के बाद कह देना कि दूसरे लोग वोट हटा ही नहीं सकते हैं फिर इससे संबंधित चुनाव आयोग का प्रचार सार्वजनिक होना और अगले दिन चुनाव आयोग की नई विज्ञप्ति – अगर, मगर, लेकिन, किन्तु, परन्तु आदि से भरी हुई। कुल मिलाकर, भारत में खबरों का मजाक बना हुआ है मीडिया की साख खराब कर दी गई है और अब तो लोगों को आदत हो गई होगी लेकिन अमेरिका में भी वही हुआ। कल वाली खबर का आज, खंडन या स्पष्टीकरण है। कल की खबर कई कारणों से महत्वपूर्ण थी। अब उसमें संशोधन है तो वह भी महत्वपूर्ण है और द हिन्दू में लीड है। कहने को कहा जा सकता है कि भारत में जो अमृतकाल में हुआ वह अमेरिका में भी हुआ। फ्रेंड ट्रम्प के राज में हुआ इसलिए फिर पहले पन्ने पर है। अखबारों को रोज पहले पन्ने की कम से कम एक खबर देने का भाजपाई कोटा आज इससे पूरा हो जाता लेकिन प्रधानमंत्री को शायद इसकी उम्मीद नहीं थी और कल इसपर कोई मुद्दा नहीं था इसलिए प्रधानमंत्री को राष्ट्र को संबोधित करना पड़ा। आज उसी की खबर ज्यादातर अखबारों में लीड है।
निश्चित रूप से यह जीएसटी की खबर को जिन्दा रखने और उसका अधिकतम लाभ लेने की कोशिश का हिस्सा है लेकिन दोनों एक ही दिन हो गया। इसके लिए प्रधानमंत्री का भाषण या संबोधन शाम पांच बजे होना, जीएसटी पर होना अटपटा तो है ही। आप जानते हैं कि जीएसटी में सुधार की घोषणा 15 अगस्त को कर दी गई थी। 22 सितंबर से लागू होने की सूचना भी पुरानी थी और इस बीच विज्ञापन से लेकर बधाई और श्रेय सब हो चुका था। फिर भी प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करने का दुर्लभ काम किसी गैर जरूरी विषय पर किया तो इसे हेडलाइन मैनेजमेंट का जुगाड़ ही कहा जायेगा और इसे नवरात्र की शुरुआत तथा त्यौहार पर बचत उत्सव आदि से जोड़कर पूरा हेडलाइन मैनेजमेंट ही किया गया है। कोई जरूरी नहीं था कि अपने ही लागू किये गये जीएसटी में ‘सुधार’ को प्रचारित किया जाता और इसे धर्म विशेष के नवरात्र व त्यौहार से जोड़कर बिना मांगे वोट की उम्मीद की जाती। खासकर घर-घर सिन्दूर भेजने की योजना का प्रचार होने और उसका खंडन करने के बावजूद प्रधानमंत्री निवास में सिन्दूर का पौधा लगाने तथा उसका प्रचार करने वाली खबर भी रही। सबको पता है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सिख थे, उनकी पत्नी सिख थीं और सिख महिलाओं के लिए सिन्दूर का वह महत्व नहीं हैं जैसे हिन्दू महिलाओं के लिए है। 11 साल से प्रधानमंत्री निवास में कोई महिला रह नहीं रही है और आगे वाले के बारे में कुछ पता नहीं है फिर भी प्रधानमंत्री निवास में सिन्दूर का पौधा लगाना पता नहीं कैसी राजनीति थी जो केला या बेल का पेड़ लगाकर नहीं की जा सकती थी। पर मामला हमेशा हेडलाइन मैनेजमेंट का होता है और आज एक साथ ट्रम्प व मोदी – दोनों की खबरें पहले पन्ने पर हैं। इसमें जो खबरें छूट गई आगे उनकी भी चर्चा करूंगा।
अमेरिका ने एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाकर जो किया उससे बड़ा काम यह हुआ कि खबर पहले दिन स्पष्ट नहीं थी और दूसरे दिन अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस को स्पष्ट करना पड़ा कि नया वीजा शुल्क केवल नये आवेदकों पर लागू होगा। नवोदय टाइम्स में अमेरिका की यह खबर आज लीड है। शीर्षक तो सामान्य है, नया शुल्क सिर्फ नवे आवेदकों पर। लेकिन फ्लैग शीर्षक है, एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को लेकर ट्रम्प प्रशासन ने फैसला उल्ट-पलट किया। जाहिर है, खबर वहीं की है, संशोधन वहीं से हुआ है यहां समझने, बताने, छापने में कोई भ्रम नहीं था। द टेलीग्राफ में भी अमेरिकी वीजा शुल्क से संबंधित खबर का संशोधन लीड है लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘जीएसटी उत्सव’ की खबर सिंगल कॉलम में है जिसे उन्होंने बचत उत्सव कहकर ज्यादा बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। सिंगल कॉलम की इस खबर का शीर्षक यह भी बताता है कि महामानव एच-1बी से होने वाले नुकसान पर चुप्पी साधे हैं। अमर उजाला में पूरा पहला पन्ना (आधे पन्ने से ज्यादा के विज्ञापन को छोड़कर) प्रधानमंत्री के राष्ट्र को संबोधन और जीएसटी की खबरों से भरा हुआ है। अमर उजाला की सेकेंड लीड का शीर्षक है, आम आदमी को मिले राहत इसकी होगी कड़ी निगरानी। मुझे नहीं लगता है कि इसकी जरूरत होनी चाहिये और यह सरकारी व्यवस्था के बारे में अच्छा संदेश देती है। कायदे से सरकार ने दरें कम कर दी हैं तो उसे लागू हो जाना चाहिये। इसमें निगरानी की जरूरत होनी ही नहीं चाहिये और उपभोक्ताओं को लूटने की गुंजाइश ही नहीं रहती तो माना जा सकता था नए समय के सुधार लागू हो गये हैं। इससे पहले भी जीएसटी को नई व्यवस्था कहकर लागू किया गया था। इसकी खूब तारीफ की गई थी लेकिन जीएसटी चोरी के कई मामले पकड़े गये हैं।
आप जानते हैं कि जीएसटी से संबंधित फैसले जीएसटी कौंसिल लेती है और जीएसटी कौंसिल की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करती हैं। सदस्यों में सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। और गैर भाजपाई राज्यों के गैर भाजपाई वित्त मंत्रियों वाली समिति प्रधानमंत्री के मन की बात करे यह जरूरी नहीं है। वैसे भी जीएसटी में सुधार और टैक्स कम करने का फैसला जीएसटी कौंसिल का होगा। लेकिन प्रधानमंत्री इसका श्रेय ले रहे हैं। राष्ट्र के नाम संबोधन से इसकी विशेष व्यवसथा की गई है। इसके बावजूद सरकारी अखबारों की खबरें वैसी ही हैं। देशबन्धु ने, स्वदेशी के मंत्र से ही मिलेगी समृद्धि शीर्षक लीड के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फोटो के साथ एक खबर छापी है। इसका शीर्षक है, फैसला राज्यों का, क्रेडिट ले रहा केंद्र। यह खबर तो दूसरे अखबारों में नहीं ही है, केंद्र को क्रेडिट भी पूरा दिया गया है। उदाहरण के लिए इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा – प्रधानमंत्री ने कहा, नवरात्रि के साथ ही जीएसटी बचत उत्सव शुरू हो रहा है, लोगों के लिए डबल बोनान्जा। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, जीएसटी 2.0 की शुरुआत आज से, मोदी ने 2.5 लाख करोड़ रुपये के बजट उत्सव की तारीफ की।
दूसरी ओर, ऐसा लग रहा है कि नरेन्द्र मोदी ने तय कर रखा है वोट के लिए कुछ भी करेंगे। जीएसटी की छूट के बदले वोट पाने की कोशिशों की हद कर दी। 11 साल तक जैसे तैसे सरकार चलाने, किसी की नहीं सुनने और मन की बात के सैकड़ों एपिसोड के बाद अब जब रोजगार नहीं है, धंधा-दुकान चौपट हो रहा है तो बचत उत्सव की सलाह। इस उत्सव की शुरुआत – नवरात्र में करने का मतलब यही है कि नजर हिन्दुओं के वोट पर है। इसके लिए घोषणा तो 15 अगस्त को हो गई थी फिर टैक्स की भारी दर घोषणा करके 21 सितंबर तक लूटते रहे। यही नहीं, अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि स्टेक होल्डर्स से चर्चा कर लागू किया। लेकिन जीएसटी 100 झंझट मेरी किताब है। एक देश, एक टैक्स का नारा – तो लगता रहा, दावा भी किया गया लेकिन सच्चाई यह है कि नगर निगम के टौक्स और टोल टैक्स अब भी अलग-अलग हैं। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यहा दावा किया कि पहले की टैक्स व्यवस्था बहुत खराब थी और उन्होंने तमाम स्टेक होल्डर्स से चर्चा करके नई व्यवस्था लागू की। जाहिर है यह भी एक टैक्स सुधार था और पहले वाले से बेहतर था। अब वाले पहले वाले से बेहतर और यह भी कहा कि टैक्स रिपऑर्म अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है।
इस तरह, 2017 से पहले की टैक्स व्यवस्था खराब थी। खुद जो किया वह अच्छा और महान कार्य था। अब उससे भी अच्छी टैक्स व्यवस्था लाये हैं और यह अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है आगे की सरकार सुधार लाये तो वह प्रक्रिया होगी। यह अलग बात है कि नए और बेहतर तथा अब सुधार बताये जा रहे जीएसटी में खामियां बताई गई थीं। कोई सुनवाई नहीं हुई। गब्बर सिंह टैक्स कहा और माना जाता रहा। आपको याद होगा, दक्षिण भारत के एक रेस्त्रां मालिक ने वित्त मंत्री से शिकायत की थी कि ब्रेड, मक्खन लगी ब्रेड और सिर्फ मक्कन पर टैक्स की दरें अलग हैं इसलिए इसे संभावना मुश्किल है। बाद में वे माफी मांगते भी दिखे और दिखाये गये थे। मकसद साफ है। ऐसी टैक्स प्रणाली है जीएसटी लेकिन प्रधानमंत्री उसकी तारीफ करने और उससे वोट बटोरने का कोई मौका नहीं चूकना चाहते हैं। अखबारों और मीडिया ने भी उन्हें आत्मप्रचार का पूरा मौका दिया है। व्यापारी अपने पैसे लगाकर प्रधानमंत्री का सहयोग और प्रचार कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी के नाम पर पिछले आठ साल में 55 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई है। इसमें रेलवे, डाक विभाग और बैंकों को भी जीएसटी वसूल कर सरकार के पास जमा करना होता है लेकिन सरकार उसमें सुधार के दावे कर रही है। और 2.5 लाख करोड़ की बचत पर उत्सव मनाने की सलाह दे रही है। यही नहीं अब नागरिक देवो भवोः भी आ गया है लेकिन वोटर वही रहेगा जो कमल पर मोहर लगायेगा। बाकी को चोरी से निकाला जाये या एसआईआर के जरिये। आप जानते हैं कि ऐसे मोदी अपनी देसी डिग्री नहीं दिखाने का आदेश कोर्ट से प्राप्त कर चुके हैं और स्वदेशी का प्रचार कर रहे हैं। स्वदेशी अपनाने की सलाह दे रहे हैं। शपथपूर्वक यह घोषणा करने के बाद कि पत्नी की आय, आय का स्रोत या उनके पास उपलब्ध धन आदि की कोई जानकारी नहीं है। इसलिये वे आत्म निर्भर होने की बात कर रहे हैं तो उसका भी महत्व है।
दि एशियन एज की आज की लीड का शीर्षक है प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जीएसटी सुधार और स्वदेशी पर जोर विकास को गति देगा। सेकेंड लीड अमेरिकी एच-1बी वीजा की खबर है और इसके अनुसार, ऐसे वीजा वाले भारतीयों को तुरंत अमेरिका भागने की जरूत नहीं है। यह कल छपी खबर से बिल्कुल अलग या उलट है। भारत सरकार से संबंधित खबरों के मामले में तो ऐसा होता रहा है लेकिन अब यह अमेरिका की खबर के साथ भी ऐसा हो चुका। हेडलाइन मैनेजमेंट वाली एक खबर आज फिर दि एशियन एज में पहले पन्ने पर है। इस खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री की मां को फिर गाली दी गई है। बिहार में प्रधानमंत्री की मां को फिर गाली दी गई। राजद ने कहा गया है कि वीडियो फर्जी है। आप जानते हैं कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में 2016 में कुछ आपत्तिजनक हुआ था। उस वीडियो के लिए कन्हैया कुमार को गिरफ्तार किया गया। पर मामला अभी तक निपटा नहीं है और यह तय नहीं हुआ है कि वीडियो सही है या कुछ खेल किया गया है। चुनावी राज्य बिहार में प्रधानमंत्री की मां को पहले भी गाली दी गई थी। खबर आई थी कि गाली देने वाले को पकड़ लिया गया है। उसके बाद क्या हुआ पता नहीं पर अब नये वीडियो का मामला आ गया है। बिहार में भाजपा की सरकार है पर गालीबाज को पकड़े जाने के बाद खबर नहीं आना और दोबारा गाली देने का वीडियो अपने आप में गंभीर है। हालांकि इस आरोप को भाजपा (और प्रधानमंत्री) ने गंभीरता से नहीं लिया कि वे सोशल मीडिया पर गालीबाजों को फॉलो करते हैं।
स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और कौशल विकास का ढोंग
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार कौशल मंत्रालय ने एक खास चुने हुए अफसर को एनएसडीसी का मुखिया बनाया था और उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। इससे एनएसडीसी का तो जो हो रहा है वह हो ही रहा है मंत्रालय को शक है कि संबंधित अफसर सरकारी पैसे लेकर फरार हो जायेगा। मंत्रालय ने इस संबंध में पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाये हैं। अफसर पर आरोप है कि अधिकारी ने मनमानी की और बिना अधिकर नियुक्ति की व सेवा विस्तार दिये। मुझे लगता है कि इस सरकार में ऐसे मामलों की संख्या पहले की सरकारों के मुकाबले काफी ज्यादा है। वह भी तब जब अब ऐसे मामलों की खबरें नहीं छपती हैं जबकि पहले ऐसी खबरों के दस्तावेज लोग अखबारों के दफ्तर में रीसेप्शन पर छोड़ जाते थे और संपादक को फोन करके बताते थे कि रीसेप्शन पर फलां मामले की खबर के लिए फाइल छोड़ आया हूं। अरुण शौरी ने इंडियन एक्सप्रेस का संपादक रहते हुए यह खुलासा किया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया में आज एक तरफ प्रधानमंत्री और दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति की खबरें लीड हैं। तकनीकी तौर पर एक पहली लीड और दूसरी सकेंड लीड कही जायेगी। हिन्दुस्तान टाइम्स ने बचत उत्सव की सरकारी खबर को तो लीड बनाया है और देशबन्धु की तरह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को साथ में छापा है। यहां तो यह सिंगल कॉलम में है जबकि देशबन्धु में जनसत्ता वाले तीन कॉलम यानी सामान्य चार कॉलम में है। शीर्षक है, 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, बचत उत्सव (गहरे जख्म देने के बाद) बैंड एड लगाने की तरह है। द हिन्दू ने एच-1बी वीजा पर अमेरिकी खबर के भूल सुधार के साथ आज विपक्ष के इस आरोप को भी दो कॉलम में जगह दी है कि प्रधानमंत्री को अमेरिका के मामले में अपना स्टैन्ड दृढ़ रखना चाहिये। विपक्ष ने कहा है कि अमेरिका ने टैरिफ और युद्ध विराम की घोषणा करके भारत की बांह मरोड़ने का तरीका अपनाया है। एच-1बी वीजा के मामले में भारत को खुश करने वाली एक खबर नवोदय टाइम्स में है। इस खबर का शीर्षक है, अमेरिका को होगा भारत से ज्यादा नुकसान। इसके साथ यह भी बताया गया है कि भारत से ही रिमोट वर्क बढ़ेगा। कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसी खबरों से ट्रम्प की मनमानी या फ्रेंड की करतूत पर ध्यान कम जायेगा।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


