कानपुर | जेल के भीतर बैठकर सिंडिकेट चलाने के आरोप में घिरे न्यूज़ चैनल मालिक और विवादित अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर अब शिकंजा कसता दिख रहा है। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद शासन स्तर पर उनके जेल ट्रांसफर की फाइल तेजी से आगे बढ़ रही है।
जानकारी के मुताबिक, जेल में बंद अखिलेश दुबे पिछले कुछ महीनों से बाहर के अपने नेटवर्क को भीतर से ही संचालित कर रहे थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने 18 साथियों के साथ मिलकर जेल के अंदर से ही एक “कंट्रोल रूम” जैसा सिस्टम खड़ा कर लिया था — जिससे धमकी, वसूली और राजनीतिक खेल तक तय होते थे।
‘चरित्र हरण अभियान’ भी बैरक से ही ऑपरेट
सूत्रों का दावा है कि अखिलेश दुबे ने अपने विरोधियों — खासकर पत्रकारों और कुछ राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों — के खिलाफ झूठे मामलों, चरित्र हरण और धमकी का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। खुफिया रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दुबे के इशारे पर सोशल मीडिया और कुछ कथित पत्रकारों के जरिए विरोधियों के खिलाफ झूठी मुहिम चलाई जा रही थी।
कार्डियोलॉजी की सैर और फिर रिपोर्ट तैयार
हाल ही में अखिलेश दुबे को स्वास्थ्य खराब होने के नाम पर जेल से बाहर ले जाकर कार्डियोलॉजी में भर्ती कराया गया था। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट ने उनकी “बीमारी” की पोल खोल दी। रिपोर्ट साफ कहती है — कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। मामला सिर्फ “राहत पाने की चाल” था।
इसके बाद जेल प्रशासन ने पूरा ब्योरा शासन को भेजा और अब कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक रिपोर्ट पहुंच चुकी है।
खुफिया रिपोर्ट में दावा — “ट्रांसफर नहीं हुआ तो अनहोनी तय”
रिपोर्ट में लिखा गया है कि अगर अखिलेश दुबे को जल्द किसी दूसरी जेल में शिफ्ट नहीं किया गया, तो हालात बिगड़ सकते हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, जेल में रहते हुए दुबे कई मोबाइल फोन से सक्रिय पाए गए हैं। कई ऑडियो क्लिप्स और मैसेज भी सामने आए हैं, जिनमें बाहर बैठे उनके लोगों को “काम निपटाने” के निर्देश दिए गए थे। इनपुट है कि खूफिया रिपोर्ट के बाद दुबे को बागपत या बहराइच जेल ट्रांसफर किया जा सकता है।
अब शासन में हलचल, आदेश कभी भी संभव
मिली जानकारी के अनुसार, शासन ने कानपुर जेल प्रशासन से पूरी रिपोर्ट मांगी है। उच्चाधिकारियों की एक टीम भी मामले की निगरानी कर रही है। अगर सबकुछ तय प्लान के मुताबिक हुआ तो आने वाले दिनों में अखिलेश दुबे का ट्रांसफर किसी दूसरी हाई सिक्योरिटी जेल में किया जा सकता है।
सवाल अब सिर्फ एक है — जेल की दीवारों के भीतर से ‘माफिया नेटवर्क’ कैसे चल रहा था? जवाब जल्द मिल सकता है, क्योंकि सरकार अब दिखावे से आगे बढ़कर ‘एक्शन मोड’ में दिखाई दे रही है।
उधर कानपुर के निवर्तमान पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार की विदाई का परवाना आ चुका है। हालांकि, बताया जा रहा है कि वह अभी शहर में ही रहेंगे। पढ़ें-

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