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मुकेश अंबानी अपने छोटे भाई अनिल अंबानी के कारोबार को लील गए!

तकनीक के तेवर रिश्तों को तहस नहस कर रहे हैं। मुकेश अंबाजी और अनिल अंबानी को ही देख लीजिए। दोनों भाई हैं। सगे भाई। धीरूभाई अंबानी के स्वर्ग सिधारते ही रिश्तों में दूरियां आ गई थी, और दोनों मन से बहुत दूर हो गए। फिर मोबाइल फोन के जिस धंधे में अनिल अंबानी थे, उसी मोबाइल की दुनिया में कदम रखते ही मुकेश अंबानी ऐसा भूचाल ले आए कि उनके स्मार्टफोन और फ्री डेटा से अनिल अंबानी की दुनिया न केवल हिलने लगी, बल्कि गश खाकर धराशायी हो गई। इन दिनों अनिल अंबानी की नींद उड़ी हुई है। वे धंधा समेटने की फिराक में है। वैसे भी वे कोई मुनाफे का धंधा नहीं कर रहे हैं। भारी कर्ज का बोझ उनके सर पर है और बहुत आसानी से इससे उबरने की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं है।

तकनीक के तेवर रिश्तों को तहस नहस कर रहे हैं। मुकेश अंबाजी और अनिल अंबानी को ही देख लीजिए। दोनों भाई हैं। सगे भाई। धीरूभाई अंबानी के स्वर्ग सिधारते ही रिश्तों में दूरियां आ गई थी, और दोनों मन से बहुत दूर हो गए। फिर मोबाइल फोन के जिस धंधे में अनिल अंबानी थे, उसी मोबाइल की दुनिया में कदम रखते ही मुकेश अंबानी ऐसा भूचाल ले आए कि उनके स्मार्टफोन और फ्री डेटा से अनिल अंबानी की दुनिया न केवल हिलने लगी, बल्कि गश खाकर धराशायी हो गई। इन दिनों अनिल अंबानी की नींद उड़ी हुई है। वे धंधा समेटने की फिराक में है। वैसे भी वे कोई मुनाफे का धंधा नहीं कर रहे हैं। भारी कर्ज का बोझ उनके सर पर है और बहुत आसानी से इससे उबरने की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं है।

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मुकेश अंबानी अपने रिलायंस जियो के जरिए मोबाइल की दुनिया में तूफान खड़ा किए हुए है, तो अनिल अंबानी के रिलायंस कम्यूनिकेशन (आरकॉम) की नैया उस तूफान में हिचकोले खा रही है। वैसे, यह कहने को हर कोई आजाद है कि मुकेश अंबानी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। भाई द्वारा भाई की मदद करने के विषय पर बहुत साल पहले एक फिल्म आई थी, नाम था – भाई हो तो ऐसा। लेकिन लेकिन इस उल्टी गंगा को देखकर यही तथ्य अब सवाल की मुद्रा में हमारे देश में पूछा जा रहा है कि – भाई हो तो ऐसा ऐसा ? मुकेश अंबानी के जियो के आते ही तीन महीने में ही अनिल की कंपनी को कुल एक हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। जी हां, एक हजार करोड़। हमारे हिंदुस्तान की सवा सौ करोड़ जनता में से एक सौ चौबीस करोड़ लोगों को अगर यह पूछा जाए कि एक करोड़ में कितने शून्य होते हैं, तो वे बता भी नहीं पाएंगे। मगर, यहां तो मामला एक हजार करोड़ के नुकसान का है।

रिलायंस जियो की लांचिंग से हालांकि सभी टेलिकॉम आपरेटर की कमाई को जबरदस्त झटका लगा है। लेकिन अनिल अंबानी के आरकॉम पर जियो ने कुछ ज्यादा ही करारी चोट की है। मुकेश अंबानी के मोबाइल फोन और इंटरनेट की कदम रखते ही अनिल अंबानी की हालत खराब है। अनिल परेशान हैं। आरकॉम के आंकड़ों को देखकर डरावनी तस्वीर सामने आ रही है। बड़ी संख्या में इनिल अंबानी के ग्राहक आरकॉम छोड़कर जियो सहित दूसरे ऑपरेटरों की सर्विस ले रहे हैं। हालांकि एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया कुछ हद तक अपने ग्राहकों को सहेजने में सफल रहे हैं। लेकिन आरकॉम को अपने डेटा ग्राहकों के मामले में भी बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। एक साल पहले आरकॉम के पास 38.9 मिलियन ग्राहक थे। लेकिन 2017 की आखिरी तिमाही में उसके पास सिर्फ 28.3 मिलियन ग्राहक बचे हैं। मतलब, करीब 10 मिलियन ग्राहक उन्हें छोड़ गए हैं।

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देश के बड़े कर्जदारों में अनिल अंबानी का नाम लगातार शिखर की ओर बढ़ रहा हैं। वे लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं और हालात यह हैं कि जिनकी उनकी सकल संपत्ति है, उससे ज्यादा उन पर कर्ज है। अनिल अंबानी की रिलायंस को उधार देने वालों की नींद उड़ी हुई है और इस कंपनी में जिन्होंने निवेश किया है, वे भी परेशान हैं। मार्च 2017 के जाते जाते अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम कुल 45 हजार 733 करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले आ गई है। अनिल अंबानी की आरकॉम का भविष्य कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है। बीते साल की आखरी तिमाही के नतीजों में कंपनी में रेवेन्यू तो बड़ी मात्रा में घटी ही है, आरकॉम के नेट प्रॉफिट में भी बहुत बड़ी गिरावट आई है। आंकड़ों पर नजर डालें, तो सन 2017 में जनवरी – मार्च की तिमाही में कंपनी को कुल 948 करोड़ रुपये का घाटा झेलना पड़ा है। मतलब करीब एक हजार करोड़ का घाटा। मतलब साफ है कि आनेवाले दिनों में अनिल अंबानी की तरफ से कोई बड़ी खबर सुनने को मिल सकती है। 

छोटे भाई अनिल अंबानी कर्जे के इस बोझ को कम करने का मन बना चुके हैं। इसके लिए वे अपना मोबाइल टॉवर का कारोबार बेचने की तैयारी में हैं। आरकॉम के मोबाइल टॉवर कारोबार की कुल कीमत करीब 25 हजार करोड़ रुपये मानी जा रही है। ब्रूकफील्ड नाम की कंपनी इसके लिए तैयार भी है। अनिल अंबानी आश्वस्त हैं कि इसके अलावा थोड़ी बहुत रकम उन्हें अपनी कंपनी के एयरसेल के साथ मर्जर से भी मिल ही जाएगी। सो, वे इस संकट से पार पा लेंगे। लेकिन फिर भी रिलायंस को उधार देने वालों की नींद उड़ी हुई है और अनिल अंबानी की कंपनी में निवेश करनेवालों को अपने भविष्य पर संकट दिख रहा है।

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बीते एक साल के दौरान शेयर मार्केट में रिलायंस कंम्यूनिकेशन के शेयर लगभद 40 फीसदी टूट चुके हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में उनके शेयर काफी नीचे उतर गए हैं। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर भी कंपनी का शेयर 20 फीसदी से अधिक कमजोर हुए। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो की आक्रामक मार्केटिंग और बेहद कम कीमत रखने की नीति के कारण छोटे भाई अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। यह सब इसलिए हैं क्योंकि धंधे में कोई किसी का भाई नहीं होता।

लेखक निरंजन परिहार मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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