जियो का जलवा खत्म, कछुवा स्पीड प्रदाता मुकेश अंबानी पर नकेल कौन कसे?

Ashwini Kumar Srivastava : तकरीबन साल भर पहले मुकेश अम्बानी के झांसे में मैं भी आ गया था और न सिर्फ अपने मोबाइल में बल्कि घर में भी जियो फाई इस्तेमाल करने लगा था। लेकिन वह दिन है और आज का दिन, तबसे मैं लगातार इंटरनेट की कछुवा स्पीड और डाटा बेहद तेज रफ्तार से हवा होने यानी खत्म होने की पहेली नहीं सुलझा पाया हूँ।
Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

नीता अंबानी की अय्याशियां!

Ashwini Kumar Srivastava : 315 करोड़ रुपये का मोबाइल…3 लाख रुपये की चाय…40 लाख का पर्स….पूंजीवाद का असली और घिनौना रूप अगर देखना है तो इस खबर को पढ़िए। इनका बस चलता तो ऊपरवाले से यह धूप और हवा भी ब्रांडेड खरीदते ताकि करोड़ों-अरबों खर्च करके यह महज इतना दिखा सकें कि ये धरती के बाकी इंसानों से अलग हैं। सरकार की मेहरबानियों से जनता की गाढ़ी कमाई को अपनी कंपनियों के जरिये चूस कर और फिर पानी की तरह बहाकर ये पूंजीपति बेहिसाब अय्याशियां करते हैं…वह भी उस देश और समाज में, जहां एक टाइम का खाना-पानी, कपड़े और सर पर छत के लिए न जाने कितने लोग रोज अपनी जान गंवा रहे हैं…

कितने बच्चे शिक्षा के लिए तरस रहे हैं तो कितने गरीब स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। ऐसे संवेदनहीन और अय्याश पूंजीपतियों को भी सरकार तमाम रियायतें देकर, हजारों-लाखों करोड़ के इनके कर्ज माफकर, इनके साथ गलबहियां और सांठगांठ कर असमान पूंजी वितरण का यह वीभत्स तमाशा जनता को दिखा रही है। काश कि ऐसा हो पाता कि हर कंपनी के मालिक, निदेशक या उच्च अधिकारियों की निजी तनख्वाह या पूंजी पर किसी तरह की लिमिट लगाई जा सकती ताकि बेहिसाब और अकूत सम्पति का मालिक बनकर उसे इस कदर वाहियात तरीकों से लुटाने की बजाय उसे तनख्वाह या मुनाफे के रूप में कर्मचारियों, शेयर धारकों तक समान रूप से बांटा जा सकता। कुछ नहीं हो सके तो कम से कम किसी चैरिटी संस्थान तक ही यह धन पहुंचाया जा सकता ताकि जरूरतमंद और गरीब ही इस अकूत संपदा और लूट की रकम से अपना जीवन तो बचा सकें।

पूंजीवाद का बस चले तो पूंजीपतियों के जरिये वह धूप, हवा और हरियाली भी ब्रांड में बदल दे। वैसे भी भारत में पूंजीवाद से अब बचा ही क्या है? इंसान की चमड़ी, खून या कोई भी अंग-प्रत्यंग हो, प्रकृति में कल कल बहता पानी हो ..सब अब बिक्री के लिए उपलब्ध है…बाजार में अलग अलग ब्रांड इस सृष्टि के कतरे कतरे को ज्यादा से ज्यादा दाम में बेचने की होड़ में हैं। जिनके पास पैसा है, वह प्रकृति के दिये हुए मुफ्त उपहारों को भी महँगे दामों में खरीद कर अय्याशियां कर रहे हैं…जिनके पास नहीं है, वह या तो घुटन भरी जिंदगी जी रहे हैं…या जरूरी सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ दे रहे हैं। नीता अंबानी की तरह कोई दिनभर में करोड़ों की चाय पी या पिला रहा है तो कोई इस लिए दम तोड़ दे रहा है कि उसके पास दवाई खरीदने के पैसे नहीं हैं…पूंजी का असमान वितरण होना अवश्यम्भावी है इसलिए यह तो नहीं कहा जा सकता कि सबके पैसे या सम्पति छीन कर गरीबों में बांट दो…लेकिन सरकार इतना तो कर ही सकती है कि निजी पूंजी या वेतन पर पदों के हिसाब से निजी क्षेत्र में भी कोई लिमिट तय कर दे।

लखनऊ के पत्रकार और उद्यमी अश्विनी कुमार श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मुकेश अंबानी ने अपनी मैग्जीन ‘फोर्ब्स इंडिया’ के जरिए कह दिया- ”मोदी पर भारत की 73% जनता भरोसा करती है”

Dilip Mandal : देश के हर अख़बार और वेबसाइट ने छापा, हर चैनल ने दिखाया कि नरेंद्र मोदी पर भारत की 73% जनता भरोसा करती है। नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय राजनेता है। यह ‘खबर’ चूंकि हर जगह छपी और हर चैनल ने दिखाई, जिनमें मोदीभक्त और तथाकथित प्रगतिशील चैनल और साइट भी हैं, तो आपके लिए भी शक करने का कोई कारण नहीं रहा होगा. हर कोई बोल और दिखा रहा है, तो शक कौन करता है? अब आइए इस ख़बर का एक्सरे निकालते हैं।

सभी जगह यह ख़बर फ़ोर्ब्स इंडिया पत्रिका के हवाले से छपी है। फ़ोर्ब्स इंडिया पत्रिका की मालिक कंपनी का नाम नेटवर्क 18 है। नेटवर्क 18 का 100% स्वामित्व इंडियन मीडिया ट्रस्ट के पास है। इस ट्रस्ट का 100% स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के पास है। जो कि आप जानते हैं कि मुकेश अंबानी की कंपनी है, जिनका नरेंद्र मोदी से याराना न मोदी छिपाते हैं, न अंबानी।

बहरहाल फ़ोर्ब्स इंडिया ने यह रिपोर्ट OECD यानी ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट की 282 पेज की एक रिपोर्ट से उठाई है। रिपोर्ट का नाम है – गवर्नमेंट एट ए ग्लांस 2017.

इस रिपोर्ट के पेज 214 में लिखा गया है कि सरकार पर विश्वास का यह आँकड़ा कहाँ से आया है।

यह आँकड़ा गैलप वर्ल्ड पोल से आया है। इसी रिपोर्ट में लिखा है कि इसके लिए पोल कंपनी हर देश के 1,000 लोगों से बात करती है. य़ह एक देश में अधिकतम 2,000 लोगों से बात करती है. ऐसे देश चीन और रूस हैं. जहां टेलीफोन उपलब्ध है, वहां यह सर्वे टेलीफोन पर होता है. इस तरह के पोल में शामिल 1,000 लोग किन शहरो के कौन लोग होंगे यह आप समझ सकते हैं। तो आप अब समझ गए होंगे कि मोदी को सबसे विश्वसनीय बताने वाली ख़बर कैसे बनी।

नोट – ऐसी एक एनालिसिस के मैं 30,000 रुपए तक लेता हूँ। आप मुफ़्त में इसे पढ़ रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मुकेश अंबानी अपने छोटे भाई अनिल अंबानी के कारोबार को लील गए!

तकनीक के तेवर रिश्तों को तहस नहस कर रहे हैं। मुकेश अंबाजी और अनिल अंबानी को ही देख लीजिए। दोनों भाई हैं। सगे भाई। धीरूभाई अंबानी के स्वर्ग सिधारते ही रिश्तों में दूरियां आ गई थी, और दोनों मन से बहुत दूर हो गए। फिर मोबाइल फोन के जिस धंधे में अनिल अंबानी थे, उसी मोबाइल की दुनिया में कदम रखते ही मुकेश अंबानी ऐसा भूचाल ले आए कि उनके स्मार्टफोन और फ्री डेटा से अनिल अंबानी की दुनिया न केवल हिलने लगी, बल्कि गश खाकर धराशायी हो गई। इन दिनों अनिल अंबानी की नींद उड़ी हुई है। वे धंधा समेटने की फिराक में है। वैसे भी वे कोई मुनाफे का धंधा नहीं कर रहे हैं। भारी कर्ज का बोझ उनके सर पर है और बहुत आसानी से इससे उबरने की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं है।

मुकेश अंबानी अपने रिलायंस जियो के जरिए मोबाइल की दुनिया में तूफान खड़ा किए हुए है, तो अनिल अंबानी के रिलायंस कम्यूनिकेशन (आरकॉम) की नैया उस तूफान में हिचकोले खा रही है। वैसे, यह कहने को हर कोई आजाद है कि मुकेश अंबानी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। भाई द्वारा भाई की मदद करने के विषय पर बहुत साल पहले एक फिल्म आई थी, नाम था – भाई हो तो ऐसा। लेकिन लेकिन इस उल्टी गंगा को देखकर यही तथ्य अब सवाल की मुद्रा में हमारे देश में पूछा जा रहा है कि – भाई हो तो ऐसा ऐसा ? मुकेश अंबानी के जियो के आते ही तीन महीने में ही अनिल की कंपनी को कुल एक हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। जी हां, एक हजार करोड़। हमारे हिंदुस्तान की सवा सौ करोड़ जनता में से एक सौ चौबीस करोड़ लोगों को अगर यह पूछा जाए कि एक करोड़ में कितने शून्य होते हैं, तो वे बता भी नहीं पाएंगे। मगर, यहां तो मामला एक हजार करोड़ के नुकसान का है।

रिलायंस जियो की लांचिंग से हालांकि सभी टेलिकॉम आपरेटर की कमाई को जबरदस्त झटका लगा है। लेकिन अनिल अंबानी के आरकॉम पर जियो ने कुछ ज्यादा ही करारी चोट की है। मुकेश अंबानी के मोबाइल फोन और इंटरनेट की कदम रखते ही अनिल अंबानी की हालत खराब है। अनिल परेशान हैं। आरकॉम के आंकड़ों को देखकर डरावनी तस्वीर सामने आ रही है। बड़ी संख्या में इनिल अंबानी के ग्राहक आरकॉम छोड़कर जियो सहित दूसरे ऑपरेटरों की सर्विस ले रहे हैं। हालांकि एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया कुछ हद तक अपने ग्राहकों को सहेजने में सफल रहे हैं। लेकिन आरकॉम को अपने डेटा ग्राहकों के मामले में भी बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। एक साल पहले आरकॉम के पास 38.9 मिलियन ग्राहक थे। लेकिन 2017 की आखिरी तिमाही में उसके पास सिर्फ 28.3 मिलियन ग्राहक बचे हैं। मतलब, करीब 10 मिलियन ग्राहक उन्हें छोड़ गए हैं।

देश के बड़े कर्जदारों में अनिल अंबानी का नाम लगातार शिखर की ओर बढ़ रहा हैं। वे लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं और हालात यह हैं कि जिनकी उनकी सकल संपत्ति है, उससे ज्यादा उन पर कर्ज है। अनिल अंबानी की रिलायंस को उधार देने वालों की नींद उड़ी हुई है और इस कंपनी में जिन्होंने निवेश किया है, वे भी परेशान हैं। मार्च 2017 के जाते जाते अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम कुल 45 हजार 733 करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले आ गई है। अनिल अंबानी की आरकॉम का भविष्य कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है। बीते साल की आखरी तिमाही के नतीजों में कंपनी में रेवेन्यू तो बड़ी मात्रा में घटी ही है, आरकॉम के नेट प्रॉफिट में भी बहुत बड़ी गिरावट आई है। आंकड़ों पर नजर डालें, तो सन 2017 में जनवरी – मार्च की तिमाही में कंपनी को कुल 948 करोड़ रुपये का घाटा झेलना पड़ा है। मतलब करीब एक हजार करोड़ का घाटा। मतलब साफ है कि आनेवाले दिनों में अनिल अंबानी की तरफ से कोई बड़ी खबर सुनने को मिल सकती है। 

छोटे भाई अनिल अंबानी कर्जे के इस बोझ को कम करने का मन बना चुके हैं। इसके लिए वे अपना मोबाइल टॉवर का कारोबार बेचने की तैयारी में हैं। आरकॉम के मोबाइल टॉवर कारोबार की कुल कीमत करीब 25 हजार करोड़ रुपये मानी जा रही है। ब्रूकफील्ड नाम की कंपनी इसके लिए तैयार भी है। अनिल अंबानी आश्वस्त हैं कि इसके अलावा थोड़ी बहुत रकम उन्हें अपनी कंपनी के एयरसेल के साथ मर्जर से भी मिल ही जाएगी। सो, वे इस संकट से पार पा लेंगे। लेकिन फिर भी रिलायंस को उधार देने वालों की नींद उड़ी हुई है और अनिल अंबानी की कंपनी में निवेश करनेवालों को अपने भविष्य पर संकट दिख रहा है।

बीते एक साल के दौरान शेयर मार्केट में रिलायंस कंम्यूनिकेशन के शेयर लगभद 40 फीसदी टूट चुके हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में उनके शेयर काफी नीचे उतर गए हैं। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज पर भी कंपनी का शेयर 20 फीसदी से अधिक कमजोर हुए। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो की आक्रामक मार्केटिंग और बेहद कम कीमत रखने की नीति के कारण छोटे भाई अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। यह सब इसलिए हैं क्योंकि धंधे में कोई किसी का भाई नहीं होता।

लेखक निरंजन परिहार मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

देश के सभी बड़े न्यूज चैनलों में अंबानी का पैसा लगा है!

Pushya Mitra : एनडीटीवी वाले मामले से और कुछ हुआ हो या न हो, मगर यह जरूर पता चल गया कि देश के टॉप टेन चैनलों में से शायद ही कोई बचा हो जिसमें अम्बानी का ठीक ठाक पैसा न लगा हो (NDTV में भी प्रणव-राधिका के तमाम शेयर अंबानी के पास गिरवी हैं)। इस हिसाब से राष्ट्रवादी हो, बहुराष्ट्रवादी हो या साम्यवादी हो। तकरीबन हर न्यूज़ चैनल अंततः अम्बानी न्यूज़ ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई चीख कर बातें करता है तो कोई मृदुल स्वर में। कोई राष्ट्रवादियों को शेयरिंग कंटेंट उपलब्ध कराता है तो कोई उदारवादियों को।

इस लिहाज से अखबार अभी बचे हुए हैं। दो चार बड़े अखबार ही होंगे जिनमें अम्बानी का पैसा लगा होगा। बाकी अंबानी के विज्ञापन के लिए ही मुंह जोहते रहते हैं। अखबार वाले विज्ञापन पर बिकते हैं, जबकि tv वाले परमानेंटली बिके हुए हैं, किसी रोज अंबानी इन पर कब्जा कर सकता है। अगर विज्ञापन न मिले तो अखबार वाले किसी भी रोज राजस्थान पत्रिका की तरह सीना तानकर खड़े हो सकते हैं। मगर tv वालों को छापे के दिन का इंतजार करना पड़ता है। और हां, ये सरकार के खिलाफ तो खड़े हो सकते हैं मगर अंबानी के खिलाफ खड़ा होना मुश्किल होता है। रस्मी खबरें चला देना अलग बात है।

हां, बीबीसी और स्क्रॉल डॉट इन की बात अलग है। इन दो मीडिया हाउस को आमदनी से कोई लेना देना नहीं है। इन्हें सिर्फ खर्च करना है। और खर्च करने के लिये इनके पास इफरात पैसा है। लिहाजा इनको न अम्बानी की गरज है और न ही davp-prda की। क्रांति करने के लिए ऐसी आदर्श स्थिति तो चाहिए ही होती है। बीबीसी का पैसा कहां से आता है, यह तो मालूम है। बस स्क्रॉल का सोर्स ऑफ इनकम नहीं मालूम। लगता है कोई जादुई चिराग है इनके पास।

प्रभात खबर अखबार में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पुष्य मित्र के उपरोक्त एफबी स्टटेस पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं…

Alok Kumar द वायर भी

Pushya Mitra वायर वाले तो कहते हैं, चार दोस्तों ने 1-1 लाख मिलाकर शुरू किया था।

Alok Kumar विप्रो का पैसा लगा है.. अजीम जी समेत कई घरानों ने मीडिया के लिए खास तौर पर फंड जेनरेट किए हैं.. स्टार्ट अप स्कीम के तहत भी कुछ घराने पैसा दे रहे हैं.. आइडिया दीजिए पैसा लीजिए.. खोलिए दुकान..

Pushya Mitra और स्क्रॉल में?

Arvind Das The wire को IPSMF ने फंड किया है औरों ने भी किया है…हेल्थ बीट वगैरह के लिए वे हेल्थ सेक्टर से जुड़े संस्थानों से भी सहयोग लेते हैं…यहाँ देखिएगा…http://ipsmf.org/ एनडीटीवी में अंबानी का पैसा लगा है, यह तो पुरानी ख़बर है. Caravan ने इस पर कवर स्टोरी की थी: http://www.caravanmagazine.in/reportage/the-tempest-prannoy-radhika-roy-ndtv

Pushya Mitra आपको सोर्स मालूम है क्या अरविंद जी? कैसे कोई पोर्टल लाखों की सैलरी बांटता है और विज्ञापन नहीं लेता है। Ipsfm की आमदनी का स्रोत क्या है?

Arvind Das जाहिर है, केवल विज्ञापन से तो अखबार भी नहीं चलता. छोटे-मोटे वेबसाइट के बारे में पता नहीं, हो सकता है राजनीतिक पार्टियों का सहयोग हो, चिट फंड कंपनियों का सहयोग हो, ब्लिडरों का सहयोग हो…लेकिन वायर या स्क्रॉल या क्विंट या कैच के बारे में जानकारी पाना मुश्किल नहीं…

Arvind Das IPSFM के वेबसाइट पर donor की पूरी लिस्ट लगी है: DONORS.. The Foundation has received donations from the following (names in alphabetical order): The Foundation has received donations and significant commitments of donations from over a dozen individuals and charitable organizations. Donors wish to have no say in funding decisions taken by the Foundation, and have entrusted the Trustees to run the IPS Media Foundation as an independent entity with the help of an operating team.
1. Mr. Aamir Khan
2. Azim Premji Philanthropic Initiatives Private Limited
3. Mr. Cyrus Guzder
4. Ms. Kiran Mazumdar-Shaw
5. Lal Family Foundation
6. Manipal Education and Medical Group India Pvt Ltd
7. Piramal Enterprises Limited
8. Pirojsha Godrej Foundation
9. Quality Investment Pvt. Ltd.
10. Ms. Rohini Nilekani
11. Rohinton and Anu Aga Family Discretionary No. 2 Trust
12. Sri Nataraja Trust
13. Tejaskiran Pharmachem Ind. P. Ltd.
14. Unimed Technologies Ltd.
15. Viditi Investment Pvt. Ltd.

Pushya Mitra स्क्रॉल के बारे में मैं सचमुच जानना चाहता हूँ।

Arvind Das मैंने भी कभी गौर नहीं किया, कोशिश करता हूँ या आलोक जी बताए मेहनत से बच जाऊँगा

Pushya Mitra यह फार्मूला अच्छा है। वैसे क्या ये लोग कंटेंट पर भी कंट्रोल करते हैं?

Arvind Das पता नहीं, पर कुछ ना कुछ तो इनका say रहता ही होगा…ज्यादा कंट्रोल नहीं करते होंगे, ऐसा मुझे लगता है…

Arvind Das In India, Omidyar has invested in Scroll.in and Newslaundry.com. Madhukar admits that he’s often asked why Omidyar invested in a left-of-centre media product, Scroll.in. “When we invested in Scroll, it was just an idea. All we were promised was a compelling editorial product. We have also invested in Newslaundry and don’t know where to place it really. The genesis of our investment is agnostic of ideology,” he says. ये देखिएगा… http://www.livemint.com/Opinion/CUrOd5ytWmYd3qREoDqgdK/The-ideology-behind-media-investments.html

Diwakar Ghosh Share Ambani k pass girbi hai ka kya saboot hai aap k pass ?koi documents ho to bataeye ,nahi to mana jayega ki aap bhi …,

Pushya Mitra अरे सर। इंडियन एक्सप्रेस में खबर छपी है, पढ़ लीजिये। बांकी मानने को तो जो मानना है मान सकते हैं। आप सर्च कीजिये। मिल जाएगा। नहीं तो मेरे पुराने पोस्ट पर लिंक है। सोर्स ऑफ इनफार्मेशन सीमित नहीं रखिये।

Vikas Kushwaha Kha se aata hai bbc ka paisa??

Pushya Mitra ब्रिटेन की सरकार से। यह तो वहां के विदेश मंत्रालय का उपक्रम है।

अभिषेक मिश्रा राजस्थान पत्रिका तो राजस्थान की मुख्यमंत्री की तस्वीर और नाम छापने से परहेज करता हैI

Pushya Mitra क्योंकि विज्ञापन बन्द हो गया था।

अभिषेक मिश्रा जी और सिलसिला आज भी जारी है, लेकिन जनता सब समझती है वहां की, लिहाजा संपादकीय नीति का विरोध भी कर रही हैI

नबीन चंद्रकला कुमार अम्बानी के पास गिरवी नही है कुछ शेअर अम्बानी के पास भी है । जिसने केस किया था उसके पास भी 1-2 % शेअर है । गिरवी आईसीआईसीआई के पास था

Pushya Mitra नवीन भाई। ठीक से पता कीजिये। अम्बानी ने 403 करोड़ का लोन इस शर्त पर दिया है कि 99.99 फीसदी शेयर गिरवी रहेंगे।

नबीन चंद्रकला कुमार अभी तक ऐसा कुछ फर्म नही आया है शगुफा चल रहा है । तरह तरह के न्युज आ रहे है ।

Pushya Mitra अगर आपका सोर्स सिर्फ Ndtv होगा तो सब शिगूफा लगेगा। कभी कभी इंडियन एक्सप्रेस भी पढ़ना चाहिये।

नबीन चंद्रकला कुमार ना भाई जी इंडियन एक्सप्रेस न्यु इंडियन एक्सप्रेस मय पढते है। एनडीटीवी की खबर हम इस मामले में खाली आईसीआईसीआई वाला लेटर पढे है और कुछ नहीं। चलिये इसपे भी क्लेरिफिकेसन जल्दिये आ जायेगा। सच बाहर होगा।

इसे भी पढ़ें….

xxx

xxx

xxx

xxx

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

राजदीप सरदेसाई को अपमानित कर मुकेश अंबानी ने पूरे चौथे खंभे की औकात बता दी (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : देश के सबसे धनी आदमी मुकेश अंबानी का देश के सबसे वरिष्ठ पत्रकारों में से एक राजदीप सरदेसाई ने इंटरव्यू किया. राजदीप बातचीत की शुरुआत मुकेश को देश के सबसे प्रभावशाली / ताकतवर शख्स के रूप में बताते हुए करते हैं और इस पर प्रतिक्रिया मांगते हैं तो इसका जवाब मुकेश अंबानी बहुत घटिया और अहंकारी तरीके से देता है. मुकेश अंबानी का जवाब और उसका अहंकार देख सुन कर एक समझदार आदमी सिर्फ स्तब्ध ही हो सकता है.

इन बनियों की नजर में पत्रकार और मीडिया की औकात कुछ नहीं होती है, क्योंकि ये पूंजी के बल पर मीडिया मालिकों को ही खरीद लेते हैं या फिर पूरे मीडिया हाउस का अधिग्रहण कर लेते हैं. ऐसे में जाहिर है ये किसी की परवाह क्यों करें, खासकर पत्रकार की. लेकिन ये इतने भद्दे, घृणित, जाहिल, असंस्कारी और उद्दंड हो सकते हैं, इसका अंदाजा कतई नहीं था. इस वीडियो में इंटरव्यू का वो वाला हिस्सा भी है जिसमें राजदीप सरदेसाई को मुकेश अंबानी नीचा दिखाने के लिए ‘मैं आपको सीरियसली नहीं लेता हूं’ टाइप की बात कहता है. वीडियो के शुरू और लास्ट में मेरा थोड़ा-सा भाषण है, क्योंकि वीडियो देखकर मन में भड़ास इकट्ठी हो गई तो सोचा एक नया वीडियो बनाकर इसे निकाल ही दूं.

ध्यान रखें, जो जब बुरा करे, उसे खूब गरियाइए, दौड़ा दौड़ा कर गरियाइए, लेकिन इस वीडियो में तो सिर्फ और सिर्फ मुकेश अंबानी की नीचता व अहंकार दिख रहा है. हां, राजदीप जरूर अपनी शालीनता और पेशे की गरिमा बनाए रखते हैं और बिलकुल रिएक्ट नहीं करते हैं. सच में राजदीप सरदेसाई को सैल्यूट करने का मन करता है. मुकेश अंबानी ने अपनी नीचता इस इंटरव्यू के जरिए दिखा दी है.

वीडियो देखने के लिए लिंक नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=FArsyPA4fHs

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं…

उरूज बानो Is vedio me volume bahut kam h sir..dono ki batcheet samjh nhi aa rahi

Dushayant Shaarma यशवन्त जी, जो जिस लायक होगा उसी हिसाब से डील होगी. सीधी सी बात है मुकेश अंबानी खरीददार है और राजदीप बिकायु है, अब आप इन दोनों से और क्या उम्मीद कर सकते हैं. इस लिए आप जैसे हैं वैसे ही मस्त रहिये

Yashwant Singh मुकेश अंबानी ने तो मोदी जी को भी खरीद लिया है, जियो का विज्ञापन करते हैं, मतलब मोदी जी भी बिकाऊ हैं?

Yashwant Singh आपको पता होना चाहिए कि आईबीएन7 और सीएनएन आईबीएन जब बिक गया था तो राजदीप वगैरह ही थे जो अंबानी के दबाव को खारिज करके खबरें दिखाते थे जिसके कारण उन्हें चैनल से निकाल दिया गया. किसी को यूं ही बिकाऊ नहीं कहना चाहिए वरना भक्तों दासों की कैटगरी में आएंगे. अंबानी देश के बड़े उद्योगपति हैं, उन्हें देश के एक बड़े पत्रकार का सम्मान करना चाहिए था, भारतीय संस्कार यह सिखाता है. वैसे भी जो पेड़ जितना फलदार होता है, उतना झुकता भी है.

Dushayant Shaarma थोड़ा असहमत हूँ भाई, सिर्फ मोदी का विरोध करने से कोई न्यूट्रल पत्रकार कैसे हो सकता है. पत्रकार वो है जो अच्छी बातों की तारीफ करे और गलत बात का विरोध करे. लेकिन राजदीप उन पत्रकारों की श्रेणी में है जो सिर्फ मोदी विरोध को असली पत्रकारिता समझते हैं. माफ़ कीजियेगा मैं आपसे इस मामले में असहमत हूँ

Manmohan Bhalla जब चैनल न्यूज़ की जगह व्यूज़ दिखाने लगें तो वास्तविकता की सार्थकता लुप्त होने लगती है ।।।।।  लेकिन दुर्भाग्य से यही सब आज की पत्रकारिता का स्वरूप बन चुका है

सुबोध खंडेलवाल पूरे इंटरव्यू में मुझे कही भी मुकेश अंबानी अहंकारी नजर नहीं आए उलटा राजदीप अति उत्साही दिखते रहे। यदि कोई किसी पत्रकार को सीरियसली नहीं लेता तो इसमें मीडिया के अपमान की बात कहाँ से आ गई? आपने एक सवाल किया सामने वाले ने इसका जवाब दिया। अब उसका जवाब कैसा हो क्या ये भी सवाल पूछने वाला तय करेगा यशवंत भाई? और वैसे भी राजदीप का सिर्फ ब्रांड बड़ा है उनका वैचारिक स्तर देखना हो तो राज ठाकरे के इंटरव्यू देख लीजिए। दो साल पहले पूछे गए सवाल दो साल बाद दोहरा रहे थे। दोनों इंटरव्यू में राज ठाकरे गरियाते रहे और राजदीप मिमियाते रहे

Yashwant Singh हम मीडिया के आदमी हैं और मुकेश अंबानी जैसा अगर हमारे किसी साथी का अपमान करेगा तो उसकी ऐसी की तैसी.

सुबोध खंडेलवाल गुरु महाराज आप जिस पत्रकार के अपमान की बात कर रहे हो पहले उससे तो पूछ लो उसे अपमान लगा या सम्मान लगा? और अपमान लगा तो खुद अपनी बौद्धिकता से उस पूंजीपति को वही जवाब क्यों नहीं दिया ?

Yashwant Singh सुबोध खंडेलवाल ha ha ha, बात तो सही कही आपने

अविनाश विद्रोही यशवंत भाई एक बात बताओ अम्बानी क्यों न बतमीजी करे देश का सबसे शक्तिशाली यानी प्रधान मंत्री तक उस से पूछ कर फैंसला लेता है लगभग 18 चैनल के करीब उसके अपने है और बाकियों पर उसके विज्ञापन ,किस की इतनी ओकात है आज के समय में जो मुकेश अंबानी के खिलाफ एक भी खबर चलाए या उसके विरुद्ध आवाज़ बुलंद करे ,अहंकार आना स्वाभविक है ।

Prafulla Nayak इसके लिए ऑफर किसका था।
अम्बानी का या पत्रकार का।
इस पर ही पूरा किस्सा निर्भर है
कि इंटरव्यू देने अम्बानी गये थे या इसके लिए पत्रकार साहब कई महीनों से प्रयासरत थे।
वैसे यह भी याद होगा पीएम् मोदी की पहली यूएस यात्रा के दौरान इनके क्या सवाल थे और जनता का क्या मूड था।
वो वीडियो भी यू ट्यूब पर है।

Yashwant Singh हम मीडिया के आदमी हैं और मुकेश अंबानी जैसा अगर हमारे किसी साथी का अपमान करेगा तो उसकी ऐसी की तैसी.

Prafulla Nayak पर जवाब अधूरा है बॉस

Yashwant Singh स्टैंड लेना सीखिए. वीडियो देखिए. मुकेश अंबानी की हरकत निंदनीय है. बाकी अपने घर का झगड़ा हम लोग लड़ते सुलझाते रहेंगे. अंबानी की साकानाकामाका.

Prafulla Nayak गये यह थे
या या यह इन्हें बुलाया गया था?
स्टैंड अपनी जगह है।
साइड में।

Yashwant Singh गांड़ मराने गए थे. बस. अगर वीडियो देख के समझ नहीं आ रहा कि एक पत्रकार इंटरव्यू ले रहा तो आपसे बतियाना बेकार. बाई द वे, आप पत्रकार हो या नहीं? अगर नहीं हो तो आपको नहीं समझ आएगा.

Prafulla Nayak कौन गया था
अपनी लाल कराने बॉस।
नाराज़ मत होइए।

Yashwant Singh अप्रासंगिक सवाल. पत्रकार एसाइनमेंट पर ही जाता है. आपको अगर बेसिक समझ नहीं है तो क्या बात की जाए.

Prafulla Nayak साहब, हम अनपढ़
आप ज्ञानी
लेकिन बेसिक आप बता नहीं रहे हैं।
One वे।
यातायात।

Ankit Mathur भाई साहब नब्बे प्रतिशत मीडिया हाउस के मालिकाना हक प्राप्त करने के पष्चात अगर एक अदना से पत्रकार को दिये गये साक्षातकार में अहंकार झलका देता है अम्बानी तो क्या गलत करता है! आखिर मालिक है!

Suneet Upadhyay फेसबुक पर अम्बानी की ऐसी तैसी लिखने वालों को भी कौन सीरियस लेता है 🙂

Pawan Kumar Upreti इसमें अंबानी की क्या गलती है यशवंत भाई, जनता के बीच में चौड़ा होकर घूमने वाले पत्रकार नेताओं के तलवे चाटते फिरेंगे, दलाली करेंगे, सिर्फ अपना हित सोचेंगे, चाहे पत्रकारिता में बाकी मर रहे हों, ऐसे में वे अपने संपादक और मालिकानों की गालियां सुनने को अभिशप्त रहेंगे, जैसा लगभग सभी मीडिया संस्थानों में हो रहा है।

Yashwant Singh हम मीडिया के आदमी हैं और मुकेश अंबानी जैसा अगर हमारे किसी साथी का अपमान करेगा तो उसकी ऐसी की तैसी.

Awadhesh Mishra में आपकी बात से बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ यशवंत भाई .. ये आपके बिचार हो सकते है .

सुबोध खंडेलवाल यशवंत भाई ये वो ही राजदीप है जिन्होंने यूपीए सरकार के समय आईबीएन चैनल में कैश फॉर वोट का स्टिंग आपरेशन करके ऐनवक्त पर स्टोरी ड्रॉप कर दी थी। क्यों की थी ये आप भी जानते हो, समझते हो। फिर भी याद दिलाता हूँ यूपीए सरकार ने लेफ्ट की समर्थन वापसी के बाद कुछ भाजपा सांसदों को पैसा देकर सदन से गैर हाजिर रहने का सौदा किया था। भाजपा सांसदों ने इस पूरी पेशकश और सौदेबाजी का स्टिंग ऑपरेशन राजदीप और आशुतोष से करवाया था। ये तय हुआ था कि सदन की कार्रवाई शुरु होने के पहले आईबीएन इसका प्रसारण करेगा लेकिन राजदीप की निष्ठा मीडिया के सिद्धांतों और लोकतंत्र के प्रति नहीं नोट की थैलियों की तरफ झुक गई। चैनल ने स्टिंग दिखाया ही नहीं। फिर सरकार को बेनकाब करने के लिए भाजपा सांसदों ने सदन में उनको दी गई नोटों की गड्डियां लहराई थी। इसके बाद भी आप चाहे तो राजदीप का प्रशंसा गान जारी रख सकते है। मुझे आपसे और आपको मुझसे असहमत होने का पूरा अधिकार है।

Yashwant Singh हम मीडिया के आदमी हैं और मुकेश अंबानी जैसा अगर हमारे किसी साथी का अपमान करेगा तो उसकी ऐसी की तैसी.

सुबोध खंडेलवाल Haahaahaa यदि मैं आपको कह दू कि मैं आपको सीरियसली नहीं लेता तो क्या इसका मतलब ये है कि मैंने आपका अपमान कर दिया ? मतलब ये जरूरी है कि हर आदमी राजदीप को सीरियसली ले ? या ये जरूरी है कि अंबानी उन्हें सीरियसली ले ? आपके लिए महत्वपूर्ण क्या है ? ये कि मुकेश अंबानी उन्हें सीरियसली ले या ये कि वो ईमानदारी से पत्रकारिता करे। राजदीप ने इंटरव्यू की शुरुआत ही तलवे चाटने से की । ये क्यों कहा कि मेरे साथ देश के सबसे पावरफुल व्यक्ति है ? ये कहकर राजदीप ने खुद को छोटा और मुकेश अंबानी को बड़ा दिखाने का अति उत्साह दिखाया । यदि राजदीप में सेन्स ऑफ़ ह्यूमर और प्रेजेंस ऑफ़ माइंड होता तो वो अंबानी को करारा जवाब दे सकते थे पर वो तो अंबानी के पास बैठकर गदगद हो रहे थे।ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।

Mahesh Gupta यशवंत जी इसमें किसी की जाति से क्या लेना देना है जो आप जाति पर गालि दे रहे है

Yashwant Singh बनिया जाति को नहीं बल्कि बनियाटिक प्रवृत्ति यानि बनियावाद को गरियाया जा रहा है.

Mahesh Gupta आपने साफ शब्दों मे बनिया जाति का उल्लेख कर उनको बेइज्जत करने का घृणित कार्य किया है

सुबोध खंडेलवाल यशवंत भाई अपनी सृजनात्मकता से व्यापार करने और दूसरों को रोजगार देने वाला हर इंसान बनिया है। चाहे वो रिलायंस वाला मुकेश अंबानी हो या भड़ास वाले यशवंत भाई।

Aanand Singh अम्बानी ने कहा कि वह नहीं मानते कि वह सबसे ताक़तवर हैं। तो इसमें क्या अहंकार है?

Yashwant Singh लगता है कोई आप दूसरा वीडियो देख आए. वह अगर यही कह रहा है तो फिर तो ये पूरी पोस्ट ही बेकार है. धन्य हैं.

Aanand Singh मैंने कहा सुनाई या तो ठीक से नहीं दे रहा है यशवंत जी।

Aanand Singh या तो साफ़ सुनाई नहीं दे रहा! आप मूल बातचीत की यथावत लिंक दीजिए न!

Yashwant Singh उस बातचीत में भी इतना ही है. बाकी तो दूसरे सवालों का सामान्य जवाब है. ताकतवर वाले सवाल के जवाब में अंबानी कह रहा कि मैं तुम्हें सीरियसली नहीं लेता.

Aanand Singh मैंने दोबारा सुना । वह पहले प्रश्न का यह उत्तर देते हैं कि मैं नहीं मानता । और मैं आपको सीरियसली लेता नहीं। इसका अभी फ़िलहाल आशय इतना ही है कि जो बात आप कह रहे हैं उसे नहीं मानता । आपके इस प्रश्न को मैं गंभीर प्रश्न नहीं मान रहा। मेरी धन्यता…

Yogesh Garg पूँजी को सलाम कर रहे है राजदीप फिर कैसा अपमान?

पूजन प्रियदर्शी सीरियसली नहीं लेते तो इंटरव्यू भी नहीं देते।

सुबोध खंडेलवाल गुरु महाराज यशवंत जी आप जिस पत्रकार के अपमान की बात कर रहे हो पहले उससे तो पूछ लो अंबानी की बात उसे अपमानजनक लगी या सम्मानजनक ? और यदि अपमानजनक लगी तो तो खुद अपनी बौद्धिकता और प्रखरता से उस पूंजीपति को वही जवाब क्यों नहीं दिया ? वैसे राजदीप की बॉडी लैंग्वेज तो ऐसी लग रही थी मानो अंबानी के पास बैठकर उन्होंने बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है

Sunil Bajpai ::पत्रकार ::
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते।
बिना सुरा के हम ना रहते
कच्ची भी पा जाते
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते -१

ऐसा कोई भ्रष्ट नहीं है।
जो ना मुझको पास बुलाये।
कुत्तों सा दुत्कारे मुझको
लेकिन बोतल रोज दिलाये।।
कसम ईश की खाकर कहते
तलवे चाटे जाते।
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते -२

पहले तो हालत खराब थी।
और ना थी पहचान
जबसे पत्रकार कहलाया
आलीशान मकान
इसी लिए तो हम भी जमकर
भ्रष्टों की महिमा गाते।
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते -३

ऐसा कोई लाभ नही है
जो है नही उठाया
तलवे चाट चाट कर उनके
लाखों माल कमाया।।
बिना सुन्दरी के सच मानों
हम भी ना सो पाते।।
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते- ४

अगर आप से लाभ मिले तो
जो चाहो कर देंगे।
रातों को रंगीन करो तो
मां – बहने भी देंगे – 5

इसीलिए तो सब कुछ पाकर
उढ़े गगन में जाते।
हम तो भइया सब करते हैं।
पत्रकार कहलाते -७

सुनील बाजपेयी

Thakur Sujan Singh Sikarwar Yashwant Singh bhai rajdeep ka itna paksh lena aap per sak ho raha h…. Rajdeep koi dudh ka dhula nhi h

Surendra Mahto Kushwaha Rajdeep jaise ke kiye shalinta waise hi hai jaise pakistaniyo ke hamdardi….kahe ka shalinta jo khaate india ka hai aur din bhar secular ke aad me india ko aur hindu ko girane ka ek v mouka nhi vhhodate hai…god job Ambani

Maninder Singh Sumit awasthi amish devgan sudhir chowdhry rohit sardana deepak chourasiya mukesh ambani ke puppet hai

Kamal Kumar Singh इसको तो मै भी सीरियसली नहीं लेता,मै कौन सा आमिर या घमण्डु हु।  😀

Yashwant Singh सुधीर चौधरी को सीरियसली लेने वाले राजदीप को क्यों लेंगे? हालांकि मेरा कहना है कि पत्रकारिता को बेहद उदात्तता से देखना चाहिए. कोई भाजपाई विचार का है, कोई कांग्रेसी, तो कोई वामी तो कोई आपिया तो कोई व्यापारी विचार का है तो कोई दलाल टाइप है. राजनीति में जो जो लक्षण दिखते मिलते हैं वो सब मीडिया में भी है, इसलिए किसी एक को पूरा खारिज या पूरा स्वीकार करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए. सबकी अच्छाइयों बुराइयों का तार्किक विश्लेषण करना चाहिए और जिसका जो अच्छा हो उसकी तारीफ, जो बुरा हो उसकी आलोचना की जानी चाहिए.

Kamal Kumar Singh हा हा हा। क्या हुआ सुधीर आपके जमात का नहीं ? वो पत्रकार नहीं ? 😀

Yashwant Singh यही तो कह रहा हूं कि सुधीर के साथ भी अगर मुकेश अंबानी ने ऐसी हरकत की होती तो भी मैं मुकेश अंबानी को गरियाता. बात स्टैंड लेने की है. लेकिन आप बता रहे हैं कि मैं भी राजदीप को सीरियसली नहीं लेता. यह दिखाता है कि आपकी भक्त टाइप सोच में अंबानी ने जो हरकत की वो कुछ नहीं, हां आपके जो पूर्वाग्रह हैं राजदीप के प्रति वो यथावत कायम है, अभिव्यक्त हो रहा है.

Kamal Kumar Singh आप चाहे कितना नाराज हो ले, सच तो ये है स्युडो लोगो का चेहरा बेनकाब होने के बाद कोइ भी उन्हें सीरियसली नहीं लेता। मैं भी नहीं। मै कौनसा अम्बानी का पोंछ हु भैया? :D…हाँ , सिरियस मैं सुधीर को भी नहीं लेता। रोहित सरदाना को जरूर लेता हूँ।

Mahesh Singh यशवंत जी मेरे हिसाब से अम्बानी ने कोई गलती नहीं की और कही से वे अशालीन नहीं दिखे बल्कि मुझे सरदेसाई जी या तो जरुरत से ज्यादा चापलूसी या महिनी करते नजर आये जो एक धूर्त आदमी करता है

Dhyanendra Tripathi यशवंत भाई, आप नि:संदेह एक प्रखर मीडिया विश्लेषक और उसकी निगहबानी करने वाले स्वयंसेवक भी है, पर पूरी विनम्रता के साथ कहना चाहता हूं कि मुकेश जी इस साक्षात्कार में कहीं से अहंकारी नज़र नहीं आ रहे. हॉं .. राजदीप जी के सवाल पर उनका ये कहना कि वो उन्हे सीरियसली नहीं लेते का निहितार्थ और भावार्थ शायद उनकी निर्दोषिता को इंगित करता है. वो राजदीप जी से ये कहना चाहते हैं कि वो सबसे ताकतवर शख्सीयत नहीं हैं. यह कहने में उनका लहजा जो भी रहा हो उससे आप कुछ भी निष्कर्ष निकाल सकते हैं पर इसमें अहंकार वाली बात कतई तौर पर नहीं है. मुकेश जी शायद बातचीत में इतने धूर्त और अभिजात नहीं बन पाये हैं कि उनके जवाब बड़े रेटोरिक हों. हॉं जो देश का सबसे धनवान व्यक्ति है, उसमें कुछ खास और अलग तो होगा ही और वो सामने भी आयेगा. आप एक बार उनसे मिल लीजिये, दावा है कि आप का नजरिया बदल जायेगा.. गरियाने के त्वरित नतीजे पर हर बार पहुंचना न्यायसंगत नहीं भाई..

Mahesh Singh यसवंत जी यदि सरदेसाई जी आपको कहे की you are the father of journalism तो आप क्या उत्तर देगे

Yashwant Singh तो मैं कहूंगा ये आपका अनुचित विश्लेषण है, लेकिन इतनी ज्यादा महानता बख्शने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद 😀

Mahesh Singh निःसंदेह

Nakul Chaturvedi राजदीप में न जाने कौन सी बात ख़ास लगती है आपको.. राजदीप के इंटरव्यू की शुरुआत ही ओछी थी… बाकी का फिर क्या हाल होगा.. इतना समझदारों को समझ आता है..

Yashwant Singh ये इंटरव्यू का तरीका होता है नकुल जी. पता नहीं आप पत्रकार हैं या नहीं. इंटरव्यू का एक तरीका यह होता है कि हलके फुलके सवाल से शुरू करें और गंभीर सवाल की तरफ जाएं. शुरुआत हलके फुलके से इसलिए की जाती है ताकि माहौल टेंस न रहे, इंटरव्यू देने वाला सहज फील करे. बाकी राजदीप का जितना विरोध मैंने किया है, वो आपने न तो पढ़ा होगा न सुना होगा, इसलिए कोई सफाई नहीं दूंगा. सोच तब गड़बड़ होती है जब हम अपने पूर्वाग्रह के चश्मे से लगातार चीजों को देखते रहते हैं. अगर अंबानी ने ये हरकत सुधीर चौधरी के साथ की होती तो भी मैं इसी तरह से अंबानी को गरियाता क्योंकि मसला मीडिया जैसे चौथे खंभे के प्रतीक किसी वरिष्ठ पत्रकार को पूरी तरह नान सीरियस बताकर पूरे पेशे की गरिमा को खारिज करने का है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन रिलायंस से डील को लेकर अपना पक्ष क्यों नहीं रख रहा?

शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले हिंदुस्तान टाइम्स के मिंट और दिल्ली एडिशन के रिलायंस के मुकेश अम्बानी को बेचे जाने से सम्बंधित डील को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं. हर कोई ये जानना चाहता है कि क्या वाकई हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन और रिलायंस के बीच कोई डील हुयी है? हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन इस पर कुछ बोल नहीं रहा है और ना ही अपना पक्ष रख रहा है। ना ही इस खबर का खंडन किया जा रहा है। यानि कुछ न कुछ तो शोभना भरतिया और रिलायंस के बीच खिचड़ी पकी है।

हिंदुस्तान के एक संपादक ने अपना पक्ष एक ह्वाट्स ग्रुप में रखा भी लेकिन सिर्फ इस मुद्दे पर कि पांच हजार करोड़ में नहीं बिका यह समूह। आप भी पढ़िए इनका पक्ष…

”हिंदुस्तान टाइम्स मीडिया ग्रुप (एचटी मीडिया और एचएमवीएल) दोनों करीब 65 हजार करोड़ की कंपनियां हैं। इसकी ब्रांड वैल्यु देश के किसी भी मीडिया हाउस के मुकाबले सबसे ज्यादा है। इंटरनेशनल मार्केट में भी एचटी ग्रुप की अच्छी पकड़ है हर साल का रेवेन्यू भी बेहतरीन है। शेयर वैल्यु भी अच्छी है। एचटी मीडिया में मार्केट कैपिटल 1972.54 करोड़ और सालाना रेवेन्यु 2497.73 करोड़ तथा शेयर 85.25 रुपये है। एचएमवीएल में मार्केट कैपिटल 2,007.32 करोड़, रेवेन्यु 926.48 करोड़ सालाना और शेयर 276.90 रुपये है। ऐसी कंपनी क्या 5 हजार करोड़ रुपये में बेची जा सकती है? झूठा प्रचार करने वालों पर तरस आती है।”

धन्यवाद संपादकजी, आपने अपनी बात तो रखी। ये सही बात हो सकती है तो हिंदुस्तान टाइम्स या आप साफ़ साफ़ क्यों नहीं लिखते कि हिंदुस्तान टाइम्स नहीं बिका है और ये खबर पूरी तरह गलत है। या ये क्यों नहीं बताते कि हिंदुस्तान टाइम्स अगर बिका है तो कितने में बिका है। क्या क्या बेचा गया है। सिर्फ प्रिंट राइट्स बिके हैं या कैपिटल भी बिका है। साथ ही हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन अगर अपना ये भी पक्ष रख देता कि हिंदुस्तान टाइम्स बिका है या हिंदुस्तान हिंदी भी और कितने एडिशन बेचे गए हैं तो बात साफ हो जाती।

अगर कुछ एडिशन बेचे गए हैं तो कहां कहां के एडिशन बेचे गये हैं। ये सारी सच्चाई तो हिंदुस्तान टाइम्स प्रबंधन ही जानता है और देश के अपने करोड़ो पाठकों और हजारों कर्मियों तक ये सच्चाई हिंदुस्तान टाइम्स ही पहुंचा पायेगा। उम्मीद है हिंदुस्तान टाइम्स इस पर अपना पक्ष रखेगा ताकि भ्रम की स्थिति दूर हो।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
मुंबई
9322411335
shashikantsingh2@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

इंडिया टीवी ने आजतक की बैंड बजा दी, अंबानी के चैनल के अच्छे दिन आए

इस साल के छठें हफ्ते की टीआरपी में कई बड़ी और नई बातें हैं. सबसे पहले ये कि अंबानी के चैनल के अच्छे दिन आ गए हैं. लगता है अंबानी की नजर टीआरपी मापने वाली संस्थाओं पर पड़ गई है जिसके कारण टीआरपी ने बंपर उछाल मारा है. पहले आईबीएन7 और आजकल न्यूज18इंडिया के नाम से चलाए जा रहे अंबानी के चैनल की टीआरपी इस कदर बढ़ी कि वह सीधे नंबर चार पर आ पहुंचा है. लगातार सात-आठ नंबर पर रहने वाला चैनल अगर अचानक चार नंबर पर आ जाए तो लगता है कि कुछ तो खेल है.

उधर, आजतक चैनल पूरी तरह चौपट हो गया लगता है. इंडिया टीवी ने आजतक की बैंड बजा दी है. इंडिया टीवी इस हफ्ते भी न सिर्फ नंबर वन है बल्कि अपनी कुर्सी की मजबूती दी है. नंबर दो आजतक से इंडिया टीवी ने अपना फासला बढ़ा लिया है. इस हफ्ते जिन दो चैनलों को सबसे ज्यादा टीआरपी मिली है, वे इंडिया टीवी और न्यूज18 इंडिया ही हैं. देखें आंकड़े….

Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 6

India TV 16.7 up 1.5
Aaj Tak 15.4 up 0.2
Zee News 11.9 dn 0.7
News18 India 11.0 up 1.5
ABP News 10.8 same 
India News 10.2 dn 0.5
News 24 8.9 dn 1.3
News Nation 8.7 dn 0.5
Tez 2.7 same 
NDTV India 2.1 same 
DD News 1.6 dn 0.1

TG: CSAB Male 22+

India TV 17.7 up 2
Aaj Tak 14.6 dn 0.2
Zee News 12.6 dn 0.9
News18 India 12.2 up 1.8
ABP News 10.6 dn 0.5
News Nation 8.9 dn 0.7
India News 8.3 dn 0.1
News 24 7.9 dn 1.3
Tez 3.0 up 0.2
NDTV India 2.7 same 
DD News 1.5 dn 0.2

इसके पहले वाले हफ्ते का हाल जानें….

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

प्रिंट मीडिया की अब तक की सबसे बड़ी डील : रिलायंस ने हजारों करोड़ रुपये में खरीदा हिंदुस्तान टाइम्स

मुकेश अंबानी होंगे एक अप्रैल से हिंदुस्तान टाइम्स के नए मालिक : शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले हिंदुस्तान टाइम्स के बारे में चर्चा है कि इस अखबार को हजारों करोड़ रुपये में देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस के मुकेश अंबानी को बेच दिया गया है। कुल डील कितने में हुई है, इसका पता नहीं चल पाया है। चर्चा है कि प्रिंट मीडिया की इस सबसे बड़ी डील के बाद शोभना भरतिया 31 मार्च को अपना मालिकाना हक रिलायंस को सौंप देंगी और एक अप्रैल 2017 से हिंदुस्तान टाइम्स रिलायंस का अखबार हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो एक अप्रैल 2017 से रिलायंस प्रिंट मीडिया पर अपना कब्जा जमाने के लिए मुफ्त में ग्राहकों को हिंदुस्तान टाइम्स बांटेगा।

ये मुफ्त की स्कीम कहां कहाँ चलेगी, इसका पता नहीं चल पाया है और इस हजारों करोड़ की डील में कौन-कौन से हिंदुस्तान टाइम्स के एडिशन है और क्या हिंदुस्तान हिंदी अखबार भी शामिल है, इसका पता नहीं चल पाया है लेकिन ये हिंदुस्तान टाइम्स में चर्चा तेजी से उभरी है कि हिंदुस्तान टाइम्स को रिलायंस ने हजारों करोड़ रुपये में ख़रीदा है। अगर ये खबर सच है तो हिंदुस्तान टाइम्स के कर्मचारी 1 अप्रैल से रिलायंस के कर्मचारी हो जाएंगे।

फिलहाल रिलायंस द्वारा प्रिंट मीडिया में उतरने और हिंदुस्तान टाइम्स को खरीदने तथा मुफ्त में अखबार बाटने की खबर से देश भर के अखबार मॉलिकों में हड़कंप का माहौल है। सबसे ज्यादा टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। शोभना भरतिया और रिलायंस के बीच यह डील कोलकाता में कुछ हुयी। फिलहाल इस डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

शशिकान्त सिंह

पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट

9322411335

इसे भी पढ़ें…

 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मुंबई के बाद अब दिल्ली एचटी को भी रिलायंस को बेचे जाने की चर्चा

देश भर के मीडियामालिकों में हड़कंप, कहीं मुफ्त में ना अखबार बांटने लगे रिलायंस…

देश के सबसे बड़े उद्योगपति रिलायंस वाले मुकेश अंबानी द्वारा मुंबई में एचटी ग्रुप के अखबार मिन्ट और फ्लैगशिप हिन्दुस्तान टाईम्स खरीदने की चर्चा के बाद अब यह चर्चा भी आज तेजी से देश भर के मीडियाजगत में फैली है कि मुकेश अंबानी ने दिल्ली में भी हिन्दुस्तान टाईम्स के संस्करण को खरीद लिया है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पायी है। हिन्दुस्तान टाईम्स के दिल्ली संस्करण में कर्मचारियों के बीच आज इस बात की चर्चा तेजी से फैली कि रिलायंस प्रबंधन और हिन्दुस्तान टाईम्स प्रबंधन के बीच कोलकाता में इस खरीदारी को लेकर बातचीत हुयी जो लगभग सफल रही और जल्द ही हिन्दुस्तान टाईम्स पर रिलायंस का कब्जा होगा।

रिलायंस के प्रिंट मीडिया में आने और हिन्दुस्तान टाईम्स को खरीदने की चर्चा के बाद आज देश भर के नामी गिरामी अखबार मालिकों में हड़कंप मच गया। सभी बड़े अखबार मालिकों में इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं जिस तरह रिलायंस ने जियो को लांच कर लोगों को मुफ्त में मोबाईल सेवा प्रदान कर दिया या रिलायंस के आने के बाद जिस तरह मोबाईल फोन जगत में रिलायंस का सस्ते दर का मोबाईल छा गया कहीं इसी तरह प्रिंट मीडिया में भी आने के बाद रिलायंस लोगों को मुफ्त अखबार ना बांटने लगे। ऐसे में तो पूरा प्रिंट मीडिया का बाजार उसके कब्जे में चला जायेगा।

यही नहीं सबसे ज्यादा खौफजदा टाईम्स समूह है। उसे लग रहा है कि अगर रिलायंस हिन्दुस्तान टाईम्स को मुफ्त में बांटने लगेगा या कोई लुभावना स्कीम लेकर आ गया तो उसके सबसे ज्यादा ग्राहक टूटेंगे और उसके व्यापार पर जबरदस्त असर पड़ेगा। आज देश भर के मीडियाकर्मियों में रिलायंस द्वारा मुंबई में मिंट तथा फ्लैगशिप हिन्दुस्तान टाईम्स को खरीदने की खबर पर जमकर चर्चा हुयी।

कुछ लोगों ने जहां इस फैसले को खुशी भरा बताया वहीं कुछ इस बात से भी परेशान थे कि इस खरीदारी में क्या हिंदी वाले हिन्दुस्तान समाचार पत्र के संस्करण भी खरीदे गये हैं। फिलहाल हिन्दुस्तान के किसी भी संस्करण के रिलायंस द्वारा खरीदे जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है। रिलायंस के प्रिंट मीडिया जगत में आने से छोटे और मझोले अखबार मालिकों में भी भय का माहौल है। उनको लग रहा है कि रिलायंस उनके बाजार को भी नुकसान पहुंचायेगा। फिलहाल माना जा रहा है कि रिलायंस जल्द ही अपना पूरा पत्ता हिन्दुस्तान टाईम्स को लेकर खोलेगा।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्स्पर्ट
मुंबई
९३२२४११३३५


पत्रकार Praveen Dixit ने इस प्रकरण के बारे में एफबी पर जो कमेंट किया है, वह इस प्रकार है…

”The silent deal… Last week, HT chairperson Shobhana Bhartiya met up with Reliance supreme Mukesh Ambani. The idea was to sell Mint and eventually, the flagship, Hindustan Times. The second meeting between the merchant bankers in faraway Kolkata and the deal further cemented for Mint. Mint staffers in Mumbai have already moved into the office of CNBCNews18, some fired. This budget, the First Post and CNBC feeds went to Mint Live, an indication that things were working out to mutual benefit.”


इसे भी पढ़ें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

शोभना भरतिया ने एचटी ग्रुप को मुकेश अंबानी को बेचा!

मुंबई से एक बड़ी खबर आ रही है. हिंदुस्तान टाइम्स समूह को इसकी मालकिन शोभना भरतिया ने भारत के सबसे बड़े व्यापारी मुकेश अंबानी को बेच दिया है. हालांकि यह चर्चा कई दिनों से थी कि शोभना भरतिया एचटी समूह को बेच रही हैं लेकिन इस सूचना की पुष्टि नहीं हो पा रही थी. अब यह बात लगभग कनफर्म हो गई है कि मुकेश अंबानी सबसे बड़ा टीवी नेटवर्क खरीदने के बाद सबसे बड़ा प्रिंट नेटवर्क भी तैयार करने में लग गए हैं और इस कड़ी में एचटी ग्रुप को खरीद लिया है.

मुंबई से मीडिया एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह ने भड़ास4मीडिया को सूचना दी है कि शोभना भरतिया मिंट व हिंदुस्तान टाइम्स मुकेश अंबानी को बेच रही हैं. हिंदुस्तान टाइम्स से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक इसकी मालकिन शोभना भरतिया और रिलायंस कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी के बीच एक बड़ी डील हो गई है जिसके तहत मुकेश अंबानी अखबार मिंट और फ्लैगशिप हिंदुस्तान टाइम्स को खरीद रहे हैं. इन दोनों अखबारों के मुम्बई के कर्मचारी अब रिलायंस के कर्मचारी होंगे और मुंबई के सीएनबीसी न्यूज़ 18 के कार्यालय में बैठेंगे.

सीएनबीसी न्यूज़18 पर रिलायंस का कब्जा है. आपको बता दूँ कि हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान के सैकड़ों कर्मचारियों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की मांग को लेकर क्लेम भी लगा रखा है. कई मामलों में शोभना भरतिया को पार्टी भी बनाया गया है. बाजार में चर्चा है कि इस बड़ी डील में हिंदुस्तान टाइम्स और हिंदुस्तान अखबार समेत पूरे ग्रुप को खरीदने को लेकर भी मुकेश अंबानी और शोभना भरतिया के बीच बातचीत हुई है लेकिन फाइनल नतीजा क्या रहा, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

इनपुट : मुंबई से पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकान्त सिंह. संपर्क  : 9322411335

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पीएम ने की महाराष्‍ट्र के इस गरीब कि‍सान से मुलाकात जिसका वजन 70 किलो गिर चुका है :)

नई दि‍ल्‍ली : सोमवार को देश की शुरुआत एक खुशनुमा दोपहर से तब हुई, जब चुनाव प्रचार के अपनी अति‍व्‍यस्‍त कार्यक्रम से मौका नि‍कालकर प्रधानमंत्री ने महाराष्‍ट्र के इस गरीब कि‍सान से मुलाकात की। इस कि‍सान की गुरबत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गरीबी में इसका वजन 70 कि‍लो गि‍र चुका है।

जब इस बात की खबर प्रधानमंत्री को मि‍ली तो उन्‍होंने इस कि‍सान को सीधे गांव से बुलाया और अपने बेडरूम में मुलाकात करके सांत्‍वना दी।

पीएम से मि‍लने के बाद कि‍सान ने बताया कि पीएम ने उसके सारे कर्जे माफ करने का वादा कि‍या है। कि‍सान ने यह भी धमकी दी कि अगर पीएम ने उसके और उसके पि‍ता के सारे कर्जों को शीघ्र ही माफ न कि‍या तो उनका परि‍वार देशघाती कदम उठाने पर मजबूर होगा। स्रोत- सीटीआई

(उपरोक्त वयंग्य कथा के लेखक राहुल पांडेय दिल्ली में पत्रकार हैं. उनका यह लिखा उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है.)

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मुकेश अंबानी अमेरिकी मीडिया को भी पटाने में कामयाब, अपनी पत्नी को घोषित कराया सबसे ताकतवर बिजनेस वुमन!

Deepak Sharma : खुद का न्यूज़ चैनल हो तो फिर चाहे प्राइम टाइम एंकरिंग करनी हो या अपने नाम से कोई शो…तो ये कौन सी बड़ी बात है? लेकिन अगर आपके पास दुनिया की सबसे बड़ी बिज़नेस पत्रिका का लाइसेंस हो तो फिर क्या होगा? …. जान कर हैरत होगी कि फोर्ब्स मैग्ज़ीन ने नीता अम्बानी को एशिया की सबसे ताकतवर बिज़नेस वुमन घोषित कर दिया. ये जानते हुए भी कि नीता अम्बानी रिलायंस के बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. यानि नीता अपने पति मुकेश की वजह से सिर्फ बोर्ड में मनोनीत हैं. नीता का रिलायंस के अहम बिज़नेस फैसलों में कभी लेना देना नहीं रहा. फिर भी उन्हें बिज़नेस की सबसे बड़ी उपाधि मिल गई है.

दरअसल अभी तक देसी पत्रकार ही कारपोरेट मीडिया के गुलाम थे लेकिन अब मुकेश भाई ने अमरीका के बड़े से बड़े पत्रकारों और सम्पादकों की कलम अपने पास गिरवी रख ली है. इसके ताज़ा शिकार अमेरिकी मीडिया टाइकून स्टीव फोर्ब्स यानि फोर्ब्स मैगज़ीन के मालिक और प्रधान संपादक हुए हैं. स्टीव ने मुकेश के स्वामित्व वाली कम्पनी, नेटवर्क १८ से करार किया है और इसी के चलते “भाभी जी” को खुश करने के लिए उन्हें अपने मैगज़ीन के ताज़ा संस्करण में एशिया का सबसे ताकतवर बिजवूमन घोषित कर दिया है. धन्य है प्रभु…कर लो दुनिया मुट्ठी में.

आजतक न्यूज चैनल में स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम के हेड रह चुके पत्रकार दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सीएनएन-आईबीएन ने बिहार पर अपना सर्वे अपने आकाओं अंबानी व मोदी की नाराजगी की आशंका के चलते नहीं दिखाया?

गुरुवार की शाम से देश के सभी न्यूज चैनल बिहार चुनाव में एक्जिट पोल दिखाने में जुटे हुए थे, लेकिन देश का एक नामी अंग्रेजी चैनल सीएनएन-आईबीएन दूसरों के सर्वे चला-दिखा कर काम चला रहा था। ऐसा नहीं था कि चैनल ने सर्वे नहीं कराया था। अंदर की खबर ये है कि सीएनएन-आईबीएन ने सर्वे एजेंसी एक्सिस से बिहार चुनाव में एक्जिट पोल का सर्वे करवाया था।

लेकिन सूत्रों की मानें तो एक्सिस ने अपनी रिपोर्ट में बता दिया कि जेडीयू गठबंधन को 175 से ज्यादा सीटें मिल रही हैं। लेकिन दूसरे न्यूज चैनल कांटे की टक्कर दिखा रहे थे। ऐसे में सीएनएन-आईबीएन अपना एक्जिट पोल दिखाने की हिम्मत नहीं कर पाया। इस सर्वे को नरेंद्र मोदी के डर से रोका गया या फिर मुकेश अंबानी के, या दोनों के, ये तो पता नहीं है, लेकिन मीडिया के गलियारों में सीएनएन-आईबीएन के इस कारनामे की चर्चा खूब हो रही है।

जब मीडिया हाउस का मालिक देश का सबसे बड़ा धनपशु हो और वो धनपशु देश के सबसे ताकतवर सत्ताधारी का करीबी हो तो ऐसे में मीडिया हाउस को आकाओं की नाराजगी खुशी को ध्यान में रखना ही पड़ता है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

घाटे वाले मीडिया कारोबार पर शेयरधारकों ने मुकेश अंबानी से पूछे सवाल

मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आमसभा में समूह के चेयरमैन मुकेश अंबानी को निवेशकों के तमाम तरह के सवालों का सामना करना पड़ा। निवेशकों ने मुख्य रूप से कंपनी के प्रतिष्ठित शेयर के मूल्य में आ रही गिरावट व घाटे वाले मीडिया कारोबार के संबंध में सवाल पूछे। एक शेयरधारक के अनुसार शेयरधारकों विशेष रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा गैर प्रमुख क्षेत्रों मसलन मीडिया, रिटेल, दूरसंचार आदि पर ध्यान केंद्रित किए जाने से नाखुश थे।

साथ ही उनकी नाराजगी लाभांश देने में हिचकिचाहट को लेकर भी थी, जबकि समूह के पास 2,140 अरब रूपए का नकदी का आरक्षित भंडार है। इसके अलावा कंपनी के पास 84,000 करोड़ रूपए की नकदी पड़ी है जो उसकी चुकता इक्विटी पूंजी का 60 गुना है। इस बीच, देश की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी की 41 वीं सालाना आम बैठक में मुकेश अंबानी की पत्नी व रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी भी मौजूद थीं। नियामकीय मांग को पूरा करने के लिए नीता को हाल में कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि, आमसभा में मुकेश अंबानी की मां कोकिलाबेन अंबानी मौजूद नहीं थीं।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आईबीएन7 के संपादक सुमित अवस्थी को दूसरे पत्रकार ने ‘Certified Modified journo’ करार दिया!

(वरिष्ठ पत्रकार और उद्यमी शीतल पी. सिंह)

शीतल पी. सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं. एक जमाने में चौथी दुनिया की लांचिंग टीम के हिस्सा थे. इंडिया टुडे में भी काम कर चुके हैं. अमर उजाला से अखबारी करियर शुरू करने से पहले शीतल सोशल और पोलिटिकल एक्टिविस्ट हुआ करते थे. देश समाज बदलने का जज्बा लिए ग्रासरूट लेवल यानि गरीबी के ग्राउंड जीरो पर काम किया करते थे. बाद में बिजनेस में आए और अपने उद्यम से आर्थिक रूप से समृद्ध हो गए. लेकिन इस भागमभाग में मीडिया कहीं पीछे छूट गया. अब फेसबुक और ट्विटर ने उन्हें फिर से लिखने कहने बोलने का माध्यम दे दिया है.

शीतल पी सिंह ने अपने फेसबुक वॉल पर आईबीएन7 के संपादक सुमित अवस्थी को Certified Modified journo करार दिया है. सुमित अवस्थी ने एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने पीएम के डायरेक्ट आए मैसेज को दिखाया है और पीएम के एक साल पूरा होने पर उनकी तारीफ की है. दरअसल सुमित अवस्थी उसी आईबीएन7 के संपादक हैं जिसके मालिक मुकेश अंबानी हैं. मुकेश अंबानी ने लोकसभा चुनाव से पहले ही सबको कह दिया था कि इस बार मोदी का भरपूर सपोर्ट करना है. देखते ही देखते आईबीएन7 और सीएनएन-आईबीएन से मोदी को लेकर क्रिटिकल रुख रखने वालों को भगा दिया गया और मोदी भक्त पत्रकारों की जमात को जोड़ा जाने लगा.

नतीजा ये कि अब इन चैनलों में कोई बहस नहीं होती, एकतरफा दुष्प्रचार किया जाता है. मोदी और अंबानी को महफूज रखते हुए बाकी सभी पर ये चैनल हमलावर रहते हैं. इस पूरे गेम को महीन नियंत्रण संचालन सुमित अवस्थी और अन्य इन्हीं जैसों द्वारा किया जाता है. इसके बाद से पूरे मार्केट में आईबीएन7 और सीएनएन-आईबीएन के संपादकों-पत्रकारों की हैसियत पर बट्टा लग गया है. देखिए सुमित अवस्थी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट और शीतल पी सिंह का स्टेटस.

Sheetal P Singh : Certified Modified journo exhilarating by his achievement…

इसे भी पढ़ सकते हैं…

अंबानी-मोदी भक्त पत्रकार उमेश उपाध्याय किसे बता रहे हैं पुश्तैनी पत्रकार और सुपर दरबारी पत्रकार!

xxx

इतनी खुली दलाली 56 इंच के सीने से ही मुमकिन है…

xxx

 

अंबानी के रिलायंस और नमो की सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों कतरा रहे हैं बड़े मीडिया घराने

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

टेलीविजन से मुक्ति का मेरा एक दशक : पत्रकार के लिए भी नियमित टीवी देखना जरूरी नहीं!

वक्त के गुजरने की गति हैरान करती है! टीवी को घर से निकाले एक दशक पूरा हो गया! लेकिन लगता है कल की ही बात है। उस वक्त मैं अमर उजाला नोएडा में था, रात की ड्यूटी करके ढाई बजे रूम पर पहुँचता और बस फिर क्या, बिना कपड़े बदले कुर्सी पर पसर जाता और पौ फटने तक न्यूज़ चैनलों को अदालत बदलता रहता। वही एक जैसी बासी ख़बरें सब चैनलों पर देखता रहता। मेरी इस आदत के चलते पढ़ना लिखना एकदम रुक ही गया था। पूरा रूटीन डिस्टर्ब रहता। सुबह छह सात बजे सोता। 11-12 बजे उठता। नींद आधी अधूरी। शरीर की लय ताल बिगड़ी रहती। फिर सोने की कोशिश। लेकिन कोई फायदा नहीं। तब तक फिर ऑफिस जाने की तैयारी। सब कुछ गड़बड़। ऑफिस के अलावा मेरा अच्छा खासा वक्त टीवी देखने में जा रहा था। मेडिटेशन सिट्टिंग्स बंद हो चुकी थी। अब टीवी ध्यान दर्शन चल रहा था। एनएसडी की विजिट्स अब कम हो गई थी। वीकेंड मूवीज और आउटिंग भी बंद क्योंकि टीवी है ना! एलजी का यह नया गोल्डन आई अब मेरी आँखों में खटकने लगा था।

अंततः इस टीवी से मुक्ति पाने की ठानी। लेकिन ये इतना आसान नहीं था। एक दिन टीवी दर्शन ऊब की चरमावस्था में पहुँचने के बाद, इस बुद्धू बक्से को इसके डब्बे में पैक कर, सहारनपुर पैरेंट्स के पते पर पार्सल कर दिया! उस दिन यह कारनामा करने के बाद मैंने एक विजेता के भाव अपने भीतर मासूस किए थे। क्योंकि टीवी एक आदत बन चुका था और किसी भी आदत को काटना और अपना नियंत्रण हासिल करना एक युद्ध जीतने से कम नहीं है! तब से आजतक फिर मैंने कभी अपने रूम में टीवी की जरुरत महसूस नहीं की। हाँ कभी गांव जाता हूं तो यदा कदा फॉक्स ट्रैवलर देख लेता हूँ। सच मानिए टीवी से मुक्ति पाकर बतौर पत्रकार मुझे नुकसान नहीं फायदा ही हुआ।

टाइम मैनेजमेंट बढ़िया हुआ। पढ़ने लिखने सोचने विचारने के लिए अब मेरे पास ज्यादा वक्त था। मजेदार ये कि टीवी पर दौड़ने वाले घटनाक्रम को भी मैंने कभी मिस नहीं किया। इसका सीधा फंडा था। अगर कोई चैनल कुछ हटकर, उल्लेखनीय दिखाता है तो उसकी स्वतः ही इतनी चर्चा हो जाती है कि उस आइटम को देखने की जरूरत ही नहीं रहती। बाकि के लिए मैं जनसत्ता के साप्ताहिक स्तम्भ ‘अजदक’ और सन्डे एक्सप्रेस का ‘टेलिस्कोप’ नियमित देखता रहा हूं। इससे आपको पता चल जाता है कि इस सप्ताह किसकी बकबक बढ़िया या घटिया रही।

आज के दौर मैं सोशल मीडिया ने तो अब आपको और भी विकल्प दे दिए है। यूट्यूब, ट्विट्टर की लाइव स्ट्रीमिंग और फेसबुक पर टीवी दर्शक लिखते ही रहते हैं कि किसने क्या दिखाया। मुझे लगता है अगर टीवी न्यूज़ ने कुछ इनोवेटिव नहीं किया तो सोशल मीडिया और मोबाइल की जुगलबंदी पारंपरिक टीवी न्यूज़ को निगल लेगी! यह सब यहां लिखने का मकसद यही बताना है कि नियमित टीवी देखना और पत्रकारिता करना दोनों का आपस में बहुत ज्यादा सम्बन्ध नहीं है। इंटरनेट ऐज में टीवी न्यूज़ एक बासी खबर है! आप अपने वक्त का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

लेखक मुकेश यादव स्प्रिचुवल जर्नलिस्ट हैं. कई अखबारों में काम करने के बाद अब आजाद पत्रकारिता, घुमक्कड़ी और आध्यात्मिक ज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने उपरोक्त विश्लेषण अपने ब्लाग पर लिखा है, वहीं से साभर लेकर भड़ास पर प्रकाशित किया गया है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आईबीएन7 और ईटीवी वालों ने स्ट्रिंगरों को वेंडर बना डाला! (देखें फार्म)

अंबानी ने चैनल खरीद लिया तो जाहिर है वह एक तीर से कई निशाने साधेंगे. साध भी रहे हैं. मीडिया हाउस को मुनाफे की फैक्ट्री में तब्दील करेंगे. मीडिया हाउस के जरिए सत्ता की दलाली कर अपने दूसरे धंधों को चमकाएंगे. मीडिया हाउस के जरिए पूरे देश में रिलायंस विरोधी माहौल खत्म कराने और रिलायंस पक्षधर दलाली को तेज कराने का काम कराएंगे. इस कड़ी में वे नहीं चाहते कि जिले से लेकर ब्लाक स्तर के पत्रकार कभी कोई आवाज उठा दें या रिलायंस की पोल खोल दें या बागी बन जाएं. इसलिए रिलायंस वाले खूब विचार विमर्श करने के बाद स्ट्रिंगरों को वेंडर में तब्दील कर रहे हैं. यानि जिले स्तर का आईबीएन7 और ईटीवी का स्ट्रिंगर अब वेंडर कहलाएगा और इस बाबत दिए गए फार्मेट पर हस्ताक्षर कर अपने डिटेल कंपनी को सौंप देगा.

इस वेंडरशिप के जरिए रिलायंस की योजना यह है कि जिले स्तरीय पत्रकार को वेंडर बनाकर उससे कंटेंट डिलीवर कराने के नाम पर समझौता करा लिया जाएगा. इस समझौते में कई अन्य पेंच भी हैं. लेकिन अंततः यह पूरा समझौता पत्रकारिता के बुनियादी नियमों के खिलाफ है. अब स्ट्रिंगर अपने को कंपनी चैनल का आदमी नहीं बता पाएगा. उसकी अपनी खुद की सारी जिम्मेदारी होगी. वह बस कंटेंट देगा और बदले में पैसे लेगा. इसके अलावा वह कहीं कोई क्लेम दावा नहीं कर सकता. आईबीएन7 और ईटीवी के स्ट्रिंगरों में इस बात की नाराजगी है कि अब तो उन्हें कंपनी वाले स्ट्रिंगर भी नहीं रहने दे रहे, वेंडर बना दिया है, जिसका पत्रकारिता से कोई मतलब नहीं है. सूत्रों का कहना है कि रिलायंस वाले पत्रकारों को वेंडर बनाने का काम सिर्फ आईबीएन7 और ईटीवी में ही नहीं कर रहे हैं बल्कि कंपनी के दूसरे न्यूज चैनलों में भी कर रहे हैं.

आईबीएन7, सीएनएन-आईबीएन और ईटीवी को जिस ढंग से इन दिनों चलाया जा रहा है, उससे अब सबको पता चल गया है कि आखिर कारपोरेट के चंगुल में आने पर पत्रकारिता का क्या हाल होता है. उमेश उपाध्याय जो कभी पीआर का काम देखा करते थे, इन दिनों कंटेंट हेड के बतौर चैनलों में डंडा चला रहे हैं. इनके भाई सतीश उपाध्याय बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष हैं. इन दोनों के बारे में कहा जाता है कि ये अंबानी के इशारे पर काम करने वाले हैं. अंबानी की लूट के खिलाफ आवाज उठाने वाले केजरीवाल व इनकी पार्टी के बारे में कोई भी सकारात्मक खबर, बाइट दिखाने पर चैनल में पाबंदी है. इस तरह ये मीडिया हाउस देखते ही देखते सत्ता तंत्र और मुनाफा तंत्र का औजार बन गया है. इसमें अब वही लोग काम करने के लिए बचे रहेंगे जिन्हें पत्रकारिता से नहीं बल्कि पैसा से मतलब है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मुकेश अंबानी खरीदेंगे अंतरराष्ट्रीय बिजनेस अखबार ‘फायनेंशियल टाइम्स’!

मुकेश अंबानी ने ईटीवी, आईबीएन7, सीएनएन-आईबीएन समेत कई चैनलों-मीडिया कंपनियों को खरीदने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया का मोलभाव करना शुरू कर दिया है. ताजी सूचना के मुताबिक उनकी नजर अंतरराष्ट्रीय बिजनेस अखबार ‘फायनेंशियल टाइम्स’ पर है. भारत के साथ विदेशों में भी अपना मीडिया साम्राज्य फैलाने को लेकर लालयित अंबानी के एक प्रतिनिधि ने पियरसन समूह से संपर्क साधा है. अंतरराष्ट्रीय बिजनेस अखबार फायनेंशियल टाइम्स को प्रकाशित करने वाली कंपनी का नाम पियरसन समूह है. 

नेटवर्क 18 और ईटीवी पर कब्जा करने के बाद मुकेश अंबानी की नई सक्रियता चौंकाने वाली है. वह दुनिया के सबसे बड़े मीडिया मुगल बनने की आकांक्षा पाले हैं. ज्ञात हो कि एक जमाने में द संडे आर्ब्जवर और द आर्ब्जवर ऑफ बिजनेस एंड पॉलीटिक्स में भी रिलायंस समूह की हिस्सेदारी रही है लेकिन इन दोनों का प्रकाशन वर्ष 2000 में बंद हो गया था. इसी के साथ उस जमाने में मीडिया में आने की रिलायंस की कोशिशों ने दम तोड़ दिया था. ये कोशिशें नए सिरे से परवान चढ़ाई है धीरूभाई अंबानी के बेटे मुकेश अंबानी ने. फायनेंशियल टाइम्स करीब 120 साल पुरान बिजनेस अखबार है. 1957 में इस अखबार का पियरसन ने टेकओवर किया था. वर्ष 2012 में फायनेंशियल टाइम्स और उसके डिजिटल कारोबार की कुल कीमत 98.3 अरब रुपए थी.

फायनेंशियल टाइम्स के बिकने की खबर वर्ष 2012 में भी आई थी पर कंपनी के सीईओ मारजोरी स्कॉरडीनो ने इस खबर को गलत बताया था. लंदन स्थित पियरसन समूह के पास फायनेंशियल टाइम्स कुल स्वामित्व होने के साथ-साथ जानीमानी पत्रिका द इकॉनामिस्ट में 50 फीसदी और पेंग्विन रेंडम हाऊस में 47 फीसदी हिस्सेदारी है. वर्ष 2013-14 में फायनेंशियल टाइम्स का पीयरसन समूह के कुल बिजनेस में 8 फीसदी का योगदान था. 2013-14 में फायनेंशियल टाइम्स ने 449 मिलियन पौंड का कारोबार किया था. कंपनी को 55 मिलियन पौंड का फायदा भी हुआ था.

ज्ञात हो कि मुकेश अंबानी ने नेटवर्क18 और टीवी18 ब्रॉडकास्टर्स का इस वर्ष के शुरुआत में अधिग्रहण किया था. इसके तहत समाचार चैनल सीएनबीसी टीवी 18, सीएनएन-आईबीएन, आईबीएन लोकमत और आईबीएन 7 के साथ-साथ एंटरटेनमेंट चैनल कलर्स, कॉमेडी सेंट्रल, एमटीवी अंबानी के नियंत्रण में हैं.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पारदर्शिता का जमाना : संपादकों की पीठ पर मोदी का हाथ और मोदी की पीठ पर अंबानी का…

Om Thanvi : यह पारदर्शिता का जमाना है साहब। पत्रकार नेताओं के प्रति अपनी आसक्ति नहीं छुपाते, नेता पूंजीपतियों के प्रति। इनको उनका हाथ अपने सर पर चाहिए, उनको उनका हाथ अपने काँधे पर।

Amit Bhaskar : ये निहायती शर्म से डूब मरने वाली बात है की देश के प्रधानमन्त्री का ऑफिस अम्बानी और उनकी धर्मपत्नी के बातों को वाक्य दर वाक्य ट्वीट कर रहा है। PMO क्या पागल हो गया है? अगर मोदी साहब को अम्बानी परिवार से इतना ही लगाव है तो आप चमचागिरी अपने नरेद्र मोदी वाले ट्वीटर हैंडल से करें। PMO का मतलब है प्रधानमंत्री ऑफिस और ये किसी के बाप की जागीर नहीं है.. ये देश को समर्पित है… ये आपके निजी पसंद के लोगों के बातों को लिखने का पेज 3 नहीं है। लगता है आप प्रधानमंत्री बन गए लेकिन अब तक भाषण देने के भूत को अपने भीतर से निकाला नहीं है। कुछ काम भी कर लो… गौड़ा साहब से ही पूछ लो, कहाँ से पैसे आ गए। अब प्रधानमंत्री हो आप भाई साहब। लानत है।

Dilip Khan : नए निज़ाम में अंबानी की चौड़ाई इतनी बढ़ गई है कि अब नीता अंबानी के कार्यक्रमों की घोषणा पीएमओ करता है. ‘नीता अंबानी विल स्पीक, वॉच’..ऐसा लग रहा है जैसे वही प्रधानमंत्री हो. बेशर्मी की हद है.  निजी रिश्ते रहे किसी उद्योगपति के साथ…इससे पहले भी रहे हैं. देश के हर प्रधानमंत्री के चार पांच आका उद्योगपति रहे हैं, लेकिन पीएमओ अंबानी के भाषण की सूचना दे…ये तो शर्मनाक है.

Usha Dubey : इस फोटो को देखने के बाद किसका खून गर्म नही होगा कि यह देश का p.m है या देश की जनता के साथ मजाक..??

हितेन्द्र अनंत : “कर लो PMO मुट्ठी में”

नवनीत चतुर्वेदी : (दृश्य एक) मित्रों !!!! नीता मुकेश अम्बानी से मेरा बहुत पुराना रिश्ता है… मुकेश भाई का हाथ भी हमारी पीठ पर है. प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्वीट नीता अम्बानी की नजर में पेश है… (दृश्य दो) एक सजायाफ्ता चीफ एडिटर ज़ी न्यूज़ सुधीर चौधरी के साथ. भाइयो-बहनों! मैं गुजराती हूँ, बिज़नेस के गुण मेरी नस नस में है… मुझे पता है पीआर प्रबंधन, मीडिया मैनेजमेंट, अम्बानी-अडानी को कैसे सेट किया जाता है… अभी कल की ही बात है… जिन लोगों के लिये मैं कभी कुर्सियां लगाता था मित्रों… मैंने कल उन्हें घिघियाने और एक सेल्फ़ी के लिये मजबूर कर दिया… साले बड़े धुरंधर पत्रकार संपादक बना करते थे… किसी को चीन, पाकिस्तान, पेट्रोल, डीजल, स्वास्थ्य, कालाधन, हमारे वादे, दिल्ली चुनाव, महाराष्ट्र का सीन, महंगाई कुछ भी पूछने का मौका तक नहीं दिया!!!

Sharad Shrivastav : अंत मे सरकार ने अंबानी भाई की गैस के दाम बढ़ा ही दिये। काफी लोग खुश हैं की यूपीए वाले 8 डालर कर रहे थे, लेकिन देश भक्त मोदी सरकार ने 5.61 डालर ही किए। मोदी जी ने वादा भी किया था, देश नहीं बिकने दूँगा। पर साहब ये दाम डालर मे क्यों हैं। रिलायंस देश की कंपनी है, गैस देश के समुद्र से ही निकाली जा रही है। और बेची भी देश मे ही जा रही है। जब पहली बार गैस के दाम फिक्स हुए थे तब भी डालर मे थे, और रुपया रहा होगा 35-40 के आस पास। गैस के दाम डालर मे तो कई सालो तक वही रहे, लेकिन रुपए मे डबल हो गए। जरा सी होशियारी और अंबानी भाई ने बिना कुछ किए धरे अपना प्रॉफ़िट डबल कर लिया। आज भी भले रेट अंबानी की मांग से कम हों, लेकिन डालर की वजह से भविष्य मे उसे फायदा होता ही रहेगा। आखिर मोदी जी डालर को रुपए के 40 के भाव थोड़े ही करने जा रहे हैं। और वैसे तो आप जानते नहीं होंगे लेकिन मालूम कीजिएगा गैस की अन्तराष्ट्रिय कीमतें 3.67 डालर हैं। अपने देश मे गैस निकलाना बहुत महंगा है। गैस ही निकलती है। पता नहीं क्यों पर ऐसा लगता है की सरकार कोई भी हो जब ये बड़े लोग आते हैं तो उनके सामने रेड कार्पेट ( कपड़े) बिछा कर ( उतार कर) स्वागत करने को तैयार रहती हैं।

फेसबुक से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Push to keep corporates off media

New Delhi : The telecom regulator today recommended that political parties, companies and religious bodies should be barred from entry into broadcasting and television channel distribution. Trai said the restriction should be put in place to ensure plurality of viewpoints and restrain commercial interests from impeding the flow of unbiased news. It added that the government should provide an “appropriate exit route” to such organisations that have already been granted permission to enter these areas.

The regulator pointed out that it had made these recommendations in November 2008 and then again in December 2012 when it was asked by the ministry of information and broadcasting to spell out guidelines for media ownership.

“Six years have elapsed without any concrete action being taken by the government… these recommendations …may be implemented forthwith,” Trai said in a 115-page report released today that defined critical issues such as control and suggested the need to restrict cross-media ownership.

The regulator went a little further this time round when it said that even “surrogates” of these entities should be barred entry. However, the recommendations of the regulator are not binding on the government. The report comes a few months after Reliance Industries took over the Network18 media group owned by Raghav Bahl, formally acquiring a clutch of television channels through a multi-layered arrangement it had crafted in January 2012.

The Reliance group first invested Rs 2,600 crore to pick up stakes in several regional channels operated by the Andhra Pradesh-based Eenadu group and then worked out an arrangement with Bahl under which the Network18 group gained control over the board of directors and the management of all the ETV channels.

In May, Bahl left Network18 after a final payoff from RIL, leaving the country’s largest conglomerate in complete control over several news and entertainment channels. The Trai report noted that there were other corporate groups that have acquired media interests: the Aditya Birla group gained control over the TV Today network, and Anil Ambani’s ADAG has a substantial investment in UTV Bloomberg through Reliance Capital, the group’s financial services company.

“The media cannot be allowed to be captured by narrow interests of its titular ownership. It must be ensured that no particular interest is allowed to dominate media, both at the aggregate level and at the level of the individual media entity,” the report said.

The regulator said “the media cannot, and should not, be bracketed with general commodities and services. The market for ideas is very different from that for, say, shoes or biscuits. The media serves a higher purpose and needs separate consideration”.

Several political parties, such as the CPM, are said to be “supporting” news channels, especially in the south. The Trinamul government in Bengal offers financial assistance to at least one news channel.

Control & influence

The report said an entity could be considered to “control” a media company if it owned at least 20 per cent of the total share capital of the media outlet.

But it then went on to split hairs between de jure and de facto control. It said de jure control could be achieved in any of three ways:

Having not less than 50 per cent of the voting rights in the media company;

The ability to appoint more than 50 per cent of the members of the board of directors;

Control over the management or affairs through decision-making in the strategic affairs of the media company and appointment of key managerial personnel. It defined de facto control as a string of agreements, contracts and/or understandings, overtly or covertly drafted, whether legally binding or not, that enable the entity to control the business decisions of the media company. The definition of control is an iteration of the recommendations it made last month when it spelt out guidelines for the issue of new direct to home (DTH) licences.

In its latest report, Trai went a step further when it said loan conditionalities should also be considered as another instrument to achieve “control” over a media entity. It said that if a company advanced a loan to a media entity that “constitutes not less than 51 per cent of the book value of the total assets of the media entity”, the latter will be deemed to be controlled by the company.

The telecom regulator culled this litmus test from the income tax act’s definition of “associate enterprises”. This addresses the sort of arrangements that companies have lately tended to use to gain control of media entities. Independent Media Trust (IMT), which is controlled by Reliance Industries, subscribed to zero coupon optionally convertible debentures (ZOCDs) of six companies promoted and owned by Bahl, who controlled Network18 with a 40 per cent shareholding. Convertible debentures are recognised as a form of debt. RIL had the option to convert the debentures into equity with voting rights at any time within 10 years.

“Not only the provision for conversion of options into equity but the very act of acquisition of an option is concluded to confer de facto control on the acquirer,” the report said.

“On grounds of the inherent conflict of interest, the authority recommends that ownership restrictions on corporates entering the media should be seriously considered by the government and the regulator,” the report said. साभार- द टेलीग्राफ

संबंधित खबर…

ट्राई ने कहाः मीडिया में राजनीतिक दलों और औद्योगिक घरानों के प्रवेश को रोका जाए

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: