ट्रंप के फैसले से अडानी को राहत, अमेरिका में बड़े निवेश की तैयारी
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा फैसलों से पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है। उनके कई नीतिगत बदलावों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। इसी बीच, भारत के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी के लिए राहत भरी खबर आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अडानी ग्रुप ने अमेरिका में अपने बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स को दोबारा शुरू करने की तैयारी कर ली है।
अमेरिका में निवेश योजनाओं को फिर मिली रफ्तार

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अडानी ग्रुप अब अमेरिका में न्यूक्लियर एनर्जी, यूटिलिटीज और पूर्वी तट पर एक बंदरगाह परियोजना में निवेश करने की योजना बना रहा है। यह तब संभव हुआ जब राष्ट्रपति ट्रंप ने विदेशी भ्रष्ट आचरण निवारण अधिनियम (Foreign Corrupt Practices Act – FCPA) के प्रवर्तन को निलंबित कर दिया। इस फैसले से अडानी ग्रुप को कानूनी चुनौतियों से राहत मिलने की उम्मीद है।
क्या है मामला?
पिछले साल जब ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बने थे, तब अडानी ग्रुप ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया था, जिससे 15,000 नौकरियों के सृजन की उम्मीद थी। लेकिन जल्द ही अडानी और उनके ग्रुप के सात अन्य शीर्ष अधिकारियों पर आरोप लगे कि उन्होंने भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल करने के लिए 265 मिलियन डॉलर (लगभग 2200 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी और यह जानकारी अमेरिकी निवेशकों से छुपाई। इस मामले के चलते ग्रुप की अमेरिका में निवेश योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गई थीं।
ट्रंप के फैसले से कानूनी राहत?
हालांकि, ट्रंप प्रशासन द्वारा FCPA के प्रवर्तन को निलंबित करने के फैसले ने अडानी ग्रुप को राहत दी है। सूत्रों के मुताबिक, ग्रुप अब फिर से अमेरिकी कंपनियों के साथ संभावित सहयोग पर विचार कर रहा है और टेक्सस में पेट्रोकेमिकल सेक्टर में निवेश के मौके तलाश रहा है।
अभी भी कायम हैं कानूनी चुनौतियां
हालांकि, कानूनी जोखिम पूरी तरह से टले नहीं हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि गौतम अडानी और अन्य अधिकारियों पर भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर सौर ऊर्जा के ठेके हासिल करने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप है। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वे पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
वॉशिंगटन स्थित विल्सन सेंटर में साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर माइकल कुगेलमैन का मानना है कि यदि अडानी ग्रुप पर लगे आरोप खारिज हो जाते हैं, तो ग्रुप अमेरिका में अपने निवेश को और तेज़ी से आगे बढ़ा सकता है। उनका कहना है कि अडानी ग्रुप की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत है और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके घनिष्ठ संबंध हैं, जिससे ट्रंप प्रशासन उन्हें निवेश के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
क्या अमेरिका में फिर छा सकता है अडानी ग्रुप?
अडानी ग्रुप इस समय दुनिया के कई देशों में बड़े पैमाने पर कारोबार कर रहा है। यदि अमेरिका में उनके निवेश की योजनाएं सफल होती हैं, तो यह उनके लिए एक बड़ी जीत होगी। साथ ही, इस फैसले से फ्रांसीसी ऊर्जा कंपनी टोटलएनर्जीज़ जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी राहत मिलेगी, जिन्होंने अडानी ग्रीन एनर्जी में हिस्सेदारी ली है।
हालांकि, अभी यह देखना बाकी है कि अमेरिकी प्रशासन और न्यायपालिका इस मामले को कैसे संभालते हैं और अडानी ग्रुप किस तरह से अपने कानूनी संकटों से उबरता है। लेकिन ट्रंप के हालिया फैसले से यह साफ हो गया है कि अडानी ग्रुप की अमेरिका में वापसी की राह अब पहले से आसान हो गई है।


