Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

अमेरिकी यात्रा के नोट्स (2): भारतीय रेस्टोरेंट संचालक ने 4 हजार डॉलर का बिल लेने से मना कर दिया; मार्टिन लूथर किंग को समर्पित एक सत्र!

शीतल पी सिंह-

Atlanta, मार्टिन लूथर किंग जूनियर का शहर, हमारी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव था। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से निकले हुए और अमेरिका में जा बसे भारतीय समुदाय के लोगों के एक संगठन ने इस शहर में हमारी मेजबानी की। उनका नेतृत्व 84 साल के नौजवान “हसन कमाल” साहब कर रहे थे। वे गोरखपुर के रहने वाले हैं। मैं उन्हें इसलिए नौजवान कह रहा हूँ क्योंकि हमें एयरपोर्ट से होटल तक लाने, आयोजन स्थल ले जाने, दर्शनीय स्थलों को दिखाने और वापसी में पुनः एयरपोर्ट तक छोड़ने के दौरान उन्होंने अपनी कार खुद चलाई।

वाशिंगटन डीसी के 1/2 अक्तूबर के जिस समारोह में हम निमंत्रित थे उसका एक सत्र किंग को भी समर्पित था जिसे डेमोक्रेटिक पार्टी के एक अश्वेत सेनेटर ने भी संबोधित किया था।

15 जनवरी 1929 को अटलांटा, अमेरिका में जन्मे मार्टिन लूथर किंग जूनियर (MLK) अमेरिका के इतिहास में एक सबसे चर्चित और लोकप्रिय नागरिक अधिकार कार्यकर्ता थे, जिन्होंने अहिंसा और समानता के सिद्धांतों पर आधारित आंदोलन चलाकर अफ्रीकी-अमेरिकियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। वे एक बैप्टिस्ट पादरी थे। किंग ने बोस्टन विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी, वे गांधीजी के अहिंसा के दर्शन से गहराई से प्रभावित हुए।

1950 के दशक में, उन्होंने मोंटगोमरी बस बॉयकॉट का नेतृत्व किया, जो अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन की शुरुआत थी। इस आंदोलन ने रंगभेदी कानूनों को चुनौती दी और 1964 के नागरिक अधिकार अधिनियम की नींव रखी। किंग को 1964 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दुर्भाग्यवश, 4 अप्रैल 1968 को मेम्फिस, टेनेसी में उनकी हत्या कर दी गई, लेकिन उनका संदेश “I have a dream“ आज भी दुनिया के हर नागरिक आंदोलन को प्रेरित करता है।

किंग का जीवन गांधीजी के विचारों से जुड़ा हुआ है। महात्मा गांधी, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नेता, ने सत्याग्रह और अहिंसा को दुनिया के सामने पेश किया। किंग ने गांधीजी के इन सिद्धांतों को अपनाया और उन्हें अमेरिकी संदर्भ में लागू किया। किंग ने कहा था कि जब वे थियोलॉजिकल स्कूल में थे, तो उन्होंने सोचा था कि सामाजिक समस्याओं का समाधान केवल हिंसा से हो सकता है, लेकिन गांधीजी के दर्शन ने उन्हें बदल दिया। 1959 में, किंग भारत आए थे जहां उन्होंने गांधीजी के आश्रमों का दौरा किया और भारतीय नेताओं से मुलाकात की। इस यात्रा ने उन्हें और मजबूत किया।

किंग ने गांधीजी को “दुनिया की अंतरात्मा की आवाज” कहा। गांधीजी का प्रभाव किंग के भाषणों और रणनीतियों में स्पष्ट दिखता है, जैसे कि नमक सत्याग्रह की तरह बस बॉयकॉट और मार्च। किंग ने ईसाई धर्म को गांधीजी के अहिंसा से जोड़ा, मानते हुए कि प्रेम और अहिंसा ही सच्ची शक्ति है।

अटलांटा में मार्टिन लूथर किंग जूनियर नेशनल हिस्टोरिकल पार्क किंग की स्मृति को समर्पित है। यह पार्क 1980 में स्थापित किया गया और इसमें किंग का जन्मस्थान, उनका चर्च (एबेनेजर बैप्टिस्ट चर्च), और द किंग सेंटर शामिल है। द किंग सेंटर को उनकी पत्नी कोरेटा स्कॉट किंग ने 1968 में स्थापित किया, जो किंग की विरासत को आगे बढ़ाने का आधिकारिक स्मारक है। पार्क में किंग और कोरेटा की कब्रें हैं, साथ ही विभिन्न प्रदर्शनियां जो उनके जीवन, नागरिक अधिकार आंदोलन और अहिंसा के महत्व को दर्शाती हैं।

इस पार्क में महात्मा गांधी की मूर्ति एक विशेष आकर्षण है। 1998 में स्थापित यह कांस्य मूर्ति भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन एसोसिएशंस द्वारा दान की गई थी। मूर्ति गांधी प्रोमेनेड के प्रवेश द्वार के पास स्थित है, जो गांधीजी की शिक्षाओं और दुनिया के विख्यात लोगों द्वारा उनके बारे में व्यक्त किए गए उद्धरणों को ग्रेनाइट पर उकेरे गए संदेशों से सजा है।

यह मूर्ति किंग और गांधीजी के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है। यह स्थान नस्लीय संघर्ष के समय में सामुदायिक नेताओं के लिए तीर्थस्थल बन गया है। मूर्ति गांधीजी को चरखे के साथ दर्शाती है, जो अहिंसा और स्वावलंबन का प्रतीक है। पार्क में गांधीजी, रोजा पार्क्स और किंग से संबंधित कलाकृतियां प्रदर्शित हैं, जो वैश्विक शांति आंदोलनों को जोड़ती हैं।

गांधीजी का किंग की विचार प्रक्रिया में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ अहिंसक विरोध शुरू किया, जो किंग के लिए प्रेरणा स्रोत बना। किंग ने गांधीजी के “सत्याग्रह” को “सोल फोर्स” कहा और इसे नागरिक अवज्ञा के रूप में अपनाया। उदाहरण के लिए, 1963 का बर्मिंघम अभियान और वाशिंगटन मार्च गांधीजी की रणनीतियों से प्रेरित थे। किंग ने लिखा कि गांधीजी ने उन्हें सिखाया कि अहिंसा न केवल एक रणनीति है, बल्कि जीवन का तरीका है। यह प्रभाव आज भी जारी है, जहां विश्व नेता गांधी-किंग की जोड़ी को शांति का प्रतीक मानते हैं। अटलांटा पार्क में गांधीजी की मूर्ति इस संबंध को अमर बनाती है।

यहां यह दर्ज करना मुझे ज़रूरी लग रहा है कि अटलांटा में दो जगहों पर भारतीय समुदाय के दो कार्यक्रमों में हमें विचारों के आदान प्रदान और सवाल जवाब के लिए बुलाया गया। एक कार्यक्रम के बाद आयोजक हमें एक प्रसिद्ध भारतीय मूल के रेस्टोरेंट में खाना खिलाने ले गए।

रेस्टोरेंट एक गुजराती मूल के भारतीय का था जो मुंबई के रहने वाले हैं। उन्होंने आशुतोष को पहचान लिया और फिर हम सब से परिचित हुए और आख़िर में करीब चार हज़ार डालर के खान पान का भुगतान हमारे मेजबानों से लेने से इनकार कर दिया और किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया। ऐसा ही उस होटल में हुआ जहां हम टिकाये गए थे जो बिहार शरीफ़ के रहने वाले एक सज्जन का होटल था। जब हम वापस आ रहे थे और हमारे मेजबान ने बिल क्लियर करना चाहा तो उन्होंने हाथ पकड़ लिए और कहा “क्या मैं हिंदुस्तानी नहीं हूँ“!

(चित्र में जो मेरे साथ हैं वे खुर्जा के रहने वाले एक साहब हैं जो अटलांटा में प्रोफेसर हैं (हमारे मेजबानों में से एक) और उनके भाई भारत में RNI के बड़े अधिकारी रहे हैं। ये साहब मेरे पत्रकार दोस्त कुरबान अली के बचपन में क्लासमेट रहे हैं)

ये भी पढ़ें…

अमेरिकी यात्रा के नोट्स (1) : पत्रकार रुचिरा गुप्ता न्यूयार्क में बस गईं, संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करती हैं, सुनिए मेयर चुनाव का हाल!

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन