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ब्लैकमेलिंग और एक्सटॉरशन के साक्ष्य थे तो जयपुर पुलिस ने पत्रकारों को हिरासत में लेकर छोड़ा क्यों?

राजस्थान की सियासत और मीडिया जगत से जुड़ा एक बड़ा मामला अब सुर्खियों में है। डिप्टी सीएम दीया कुमारी के वकील ने अदालत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ‘द सूत्र’ के पत्रकार आनंद पांडे और हरीश दिवेकर ने उनसे 5 करोड़ रुपये की मांग की थी। आरोप यह भी है कि दीया कुमारी के स्टाफ में तैनात भंवर पुष्पेंद्र सिंह और बलवीर सिंह से 2 लाख रुपये नकद भी वसूले गए। अदालत ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी, लेकिन बड़ा सवाल अब यह है — जब ब्लैकमेलिंग और वसूली के सबूत मौजूद थे, तो जयपुर पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर छोड़ा क्यों? क्या पुलिस पर किसी का दबाव था?


इस पूरे प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार श्रीपाल शक्तावत लिखते हैं-

बड़ा खुलासा : कोर्ट में डिप्टी सीएम दीया कुमारी के एडवोकेट का आरोप. ‘द सूत्र’ के आनंद पांडे और हरीश दिवेकर ने पांच करोड़ मांगे.

इसी क्रम में दीया कुमारी के स्टाफ में तैनात भंवर पुष्पेंद्र सिंह और बलवीर सिंह से लिये दो लाख रुपए.

फैसला : आनंद पांडे और हरीश दिवेकर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज.

यक्ष प्रश्न : ब्लैकमेलिंग और एक्सटॉरशन के प्रमाण थे तो जयपुर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर क्यों छोड़ा? किसके दबाव /प्रभाव में थी पुलिस?


नोट : इस मसले पर किसी को अपना पक्ष रखना हो तो भड़ास को मेल करें – [email protected]

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