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जाति और आरक्षण का मामला आते ही अंजना ओम कश्यप ने RJD प्रवक्ता डॉ कंचना यादव को लाइव डिबेट से बाहर किया!

आईपी सिंह-

किस तरह से कंचना यादव जी को अंजना ओमकश्यप बेइज्जत कर रही है क्यों कि कंचना पिछड़े वर्ग से आती हैं इसलिए विपक्ष से बार-बार अपील करता हूँ कि BJP के इन न्यूज चैनलों के बहस में अपने प्रवक्ताओं को #विपक्ष न भेजे।

यही काम ABP न्यूज पर चित्रा अग्रवाल (त्रिपाठी) करती है।

हटाओ हटाओ स्क्रीन से जैसे इनके बाप का स्क्रीन होता है ये सब अपनी औकात भूल गयी हैं।

देखें वीडियो-

https://x.com/anumavidisha/status/2016711251028824174?s=46


मीडिया में जब तक डायवर्सिटी नहीं आएगी, वह मनुवाद और मनुवादियों से मुक्त नहीं होगा। अंजना ओम कश्यप से लेकर ऋचा अनिरुद्ध तक सब इस समय उसी तरह से उबल रहे हैं जैसे मंडल कमीशन की सिफ़ारिशें लागू किए जाने के बाद उबले थे। -डॉ मुकेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार


अंजना ओम कश्यप ने यहाँ अपने पद का ही इस्तेमाल किया है और उनका जातिगत अहंकार साफ़ तौर पर दिखाई देता है। उन्होंने साफ़ कह दिया चलो, हमारे चैनल से हटो। मानो यह चैनल उनकी जागीर हो। यही सब तो विश्वविद्यालयों में भी होता है। कह दिया जाता है चलो, यहाँ से निकलो, तुम्हारे लिए कोई नौकरी नहीं है। तुम्हारे लिए यहाँ दाख़िले में भी जगह नहीं है जैसे विश्वविद्यालय उनके पिता और दादाजी की विरासत हो। -डॉ कंचना यादव


यही तो असलियत है। ब्राह्मणत्व का अहंकार सिर चढ़कर बोलता है और एक यादव प्रतिभा के तर्कों से विचलित होकर टीवी स्क्रीन से हटा दिया जाता है। यही जातिगत भेदभाव और दुर्भावना की सही तस्वीर है। अगर देश के एक शीर्षस्थ टीवी चैनल पर ब्राह्मणवादी अहंकार इस तरह से सामने आता है, जिसे लाखों लोग लाइव देख रहे हैं तो आप सोच सकते कि जहाँ कोई देखने वाला नहीं, वहाँ का अहंकार कितना हिंसक और उपद्रवी किस्म का होगा! -त्रिभुवन


डॉ कंचना यादव-

भेदभाव और और जातीय अहंकार अंजना ओम कश्यप जी के व्यवहार में साफ़ दिखाई दिया, जो उन्होंने कल बहस के दौरान मेरे साथ किया।

मैंने तो केवल उनके एक पुराने बयान को याद दिलाया था, जिसमें वह कहती हैं..

“मैं व्यक्तिगत रूप से आरक्षण की विरोधी हूँ। मुझे लगता है कि आरक्षण सबसे बड़ा अन्याय है। मेरे पिता ओमप्रकाश तिवारी हैं। हम भूमिहार हैं, मेरे पति ब्राह्मण हैं। हम सभी ऐसे परिवेश में पले-बढ़े हैं जहाँ हम आरक्षण से घृणा करते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि हमारा हिस्सा हमसे छीन लिया गया है।”

मैंने तो सिर्फ़ उनके इसी बयान को कोट किया था। इस पर वह भड़क गईं, गुस्सा हो गईं। मुझे टीवी स्क्रीन से हटवा दिया गया और फिर बहस से भी निकलवा दिया गया।

यही है जातीय अहंकार और भेदभाव।

वह इसे शांति से सुन सकती थीं और तथ्यों के आधार पर खंडन भी कर सकती थीं। लेकिन जो लोग एक्टर धर्मेंद्र जी की झूठी मौत की खबर चला सकते हैं, लालू जी को झूठे “जंगलराज” और “भूरा बाल साफ़ करो” जैसे मुद्दों पर बहस करवा सकते हैं,जब बात खुद पर आती है तो उनका रवैया अहंकार, घमंड और जातीय दंभ में बदल जाता है। उस स्थिति में वे किसी की भी इज़्ज़त नहीं करतीं।

Madam, this is not personal. This is who you are your arrogance and attitude. And throwing someone out of a debate, yes, this is exactly how caste arrogance operates in universities. I hope you will understand.

उनके इस बयान के बारे में मेरे एक-दो दोस्तों ने मुझे पहले ही बताया था और आरक्षण के विषय पर अंजना जी की राय को लेकर मुझसे पहले ही सवाल करने को कहा था। क्योंकि अंजना जी UGC के नए नियम को नेचुरल जस्टिस के ख़िलाफ़ बता रही थीं, इसलिए मैंने उनके उसी पुराने बयान के संदर्भ में जो नेचुरल जस्टिस और आरक्षण के विरोध में था सवाल पूछा।

अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने खुद ही बता दिया कि जातीय अहंकार क्या होता है, जातीय विशेषाधिकार क्या होता है और नेचुरल जस्टिस वास्तव में क्या होता है। इस पर अब और बहस की ज़रूरत नहीं है।

वह बौखला कर चिल्लाने लगी कि मैंने उस पर केस किया है। 2019 में यह अंग्रेज़ी में छपा था, फिर 2020 में हिंदी में भी प्रकाशित हुआ। आज तक वह लेख उपलब्ध है। अगर वह गलत था तो उसे हटवाया क्यों नहीं गया?

असल में वह गलत था ही नहीं। कारवां के पास इसके सबूत थे। वह कुछ नहीं कर सकती। घमंड, अहंकार, बदतमीज़ी, जातिगत अहंकार और पद का दुरुपयोग करके वह किसी को बहस से बाहर कर सकती हैं, लेकिन आरक्षण-विरोधी चेहरा कहाँ छुपाएँगी?


न्यूज हंटर्स नामक हैंडल का ट्वीट-

अंजना ओम् कश्यप ने RJD के प्रवक्ता कंचना यादव को Live TV डिबेट से बाहर किया।

कंचना यादव ने जब अंजना ओम् कश्यप के एक पुराने इंटर्व्यू का हवाला देकर अंजना के ऊपर आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाया तो अंजना ओम् कश्यप भड़क गई और कंचना यादव को शो से बाहर कर दिया। कंचना यादव अंजना ओम् कश्यप के जिस इंटर्व्यू की बात कर रहे थे वो इंटर्व्यू अंजना ओम् कश्यप ने वर्ष 2019 में कारवाँ पत्रिका के पत्रकार निकिता सक्सेना को दिया था और जो अंग्रेज़ी में 1 दिसम्बर 2019 को छापा था और 20 जनवरी 2020 को हिंदी में छापा था।

अब अपने पुराने इंटर्व्यू पर खुद ही भड़क रही है और अंजना ओम् कश्यप ने बोला कि उनको मिसकोट किया गया है। अगर पत्रकार ने आपको मिसकोट किया है और जैसा कि आप बोल रही हैं कि अपने उस इंटर्व्यू की कई जगह आलोचना किए हैं तो फिर आपने कारवाँ पत्रिका के उस पत्रकार के ख़िलाफ़ केस क्यूँ नहीं किए?


कंचना यादव ने आज अंजना ओम कश्यप का दलित, पिछड़ा और आरक्षण विरोधी चेहरा दुनिया के सामने बेनक़ाब कर दिया, जिससे अंजना ओम कश्यप इतना बौखला गई कि कंचना को तुरंत स्क्रीन से ऑफ़ एयर कर दिया, किसी दलित पिछड़े प्रवक्ता को इस जातिवादी के शो में नहीं जाना चाहिए। -अनिल यादव

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