पुलिस उत्पीड़न के शिकार हिंदुस्तान के फोटोग्राफर की मदद के लिए ‘नेशनल वायस’ चैनल आगे आया

मेरठ में अपने फोटोग्राफर को हवालात में डाले जाने की खबर को हिंदुस्तान अखबार के संपादक पुष्पेंद्र शर्मा निगल गए. न सिर्फ निगल गए बल्कि दूसरे अखबारों दैनिक जागरण और अमर उजाला के पत्रकारों को भी कनवींस कर दिया कि यह खबर नहीं छापी जानी चाहिए. दरअसल एक न्यूज कवरेज के सिलसिले में लालकुर्ती थाने पहुंचे दैनिक हिंदुस्तान के फोटोग्राफर अनुज सिंह ने वहां मौजूद इंस्पेक्टर और पीड़ित महिला की तस्वीर खींच ली.

इससे भन्नाए इंस्पेक्टर धीरज शुक्ला ने मां बहिन की गाली देते हुए अनुज सिंह को हवालात में बंद कर दिया और अनुज का कैमरा तोड़ दिया. इस घटना की खबर जब दूसरे फोटोग्राफरों और पत्रकारों को लगी तो सभी लालकुर्ती थाने पहुंचे और अनुज को हवालात से बाहर निकलवाया. इस मामले में इंस्पेक्टर ने सीनाजोरी करते हुए कैमरामैन अनुज पर कई झूठे मुकदमे भी लिख दिए ताकि हवालात में डालने को जस्टीफाई कर सकें.

एक तो बिना वजह हवालात में डालना और फिर फर्जी मुकदमें लादना. अपने फोटोग्राफर के इस कदर उत्पीड़न पर जहां हिंदुस्तान के संपादकों का खून खौलना चाहिए वहीं इसके उलट हिंदुस्तान मेरठ के संपादक पुष्पेंद्र शर्मा पुलिस विभाग से सेटिंग में लग गए और खबर न छापने का आश्वासन दे डाला. साथ ही दूसरे अखबारों के लोगों को भी कनवींस कर लिया कि इस खबर को नहीं छापा जाना चाहिए. अगले रोज किसी अखबार में फोटोग्राफर के उत्पीड़न की कोई खबर नहीं थी.

इस रुख से मेरठ के फोटोग्राफर सकते में थे. आखिर ऐसे माहौल में कोई कैसे पत्रकारिता कर सकता है, कोई कैसे फोटो खींच सकता है. अपनी ड्यूटी करने पर हवालात में डाल देना और फर्जी मुकदमे लिख देना यह कहां का लोकतंत्र है, यह कैसी मीडिया की आजादी है. फोटोग्राफरों का खौलता खून रंग ले आया और पूरे मामले को इन लोगों ने यूपी के चर्चित व दबंग पत्रकार ब्रजेश मिश्रा तक पहुंचाया. ब्रजेश मिश्रा ने फौरन मेरठ पुलिस के खिलाफ अपने चैनल नेशनल वायस पर अभियान चला दिया. ब्रजेश ने न सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज की तरह इसे पेश किया बल्कि पंद्रह मिनट का कार्यक्रम भी पेश किया जिसमें मेरठ से नेशनल वायस के पत्रकार नरेंद्र सिंह ने विस्तार से फोटो जर्नलिस्ट के पुलिसिया उत्पीड़न के बारे में बताया.

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ब्रजेश मिश्रा ने इस मामले को ट्वीटर पर ट्वीट किया और साथ में यूपी पुलिस, डीजीपी आफिस आदि को टैग कर दिया. देखते ही देखते पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. शासन ने मेरठ के एसपी सिटी के नेतृत्व में जांच बिठा दी. प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए मुंशी को सस्पेंड कर दिया. थानेदार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई. इतने सारे डेवलपमेंट के बाद मेरठ के अखबार वाले घुटनों के बल आ गए और सब इस फालोअप को छापने के लिए मजबूर हो गए.

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